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  • खिड़की से सफर का नजारा

    हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी पास तो कभी दूर के सफर पर जरूर निकला होगा है ।सफर का आनंद ही अलग होता है । सफर करना भी चाहिए क्योंकि इससे मानसिक शांति और जानकारी भी मिलती है। सफर पर निकलने के एक-दो दिन पहले से ही मन आनंदित होता है।

    सफर कई तरीके के होते हैं किसी की शादी मैं जाने के लिए ,रिश्तेदारी में जाने के लिए ,दोस्तों के पास घूमने के लिए या फिर छुट्टियों पर घूमने निकालना।

    सफर जब थोड़ा बड़ा हो जैसे कि एक शहर से दूसरे शहर का सफर करना ऐसे सफर में आनंद कुछ और ज्यादा आता है।

    सफर करते वक्त हर व्यक्ति की सोच होती है की खिड़की वाली सीट मिल जाए तो अच्छा होगा क्योंकि खिड़की वाली सीट पर बैठकर सफर में दोगुना आनंद आता है ।

    जब कभी सफर के दौरान खिड़की वाली सीट नहीं मिलती तो सफर का आनंद कुछ अधूरा सा लगता है। खिड़की के पास बैठकर सफर मजे से कटता है खिड़की से रास्ते के नजारे को देखना हवा के झोंकों का चेहरे को छूना ऐसे बहुत सारे नजारे होते हैं जिसका आनंद खिड़की पर बैठकर ही मिल सकता है।

    पर कुछ लोग जैसे की ट्रेन से सफर करते हैं स्टेशन पर भीड़ मैं खुली खिड़की से ही सामान वगैरा अंदर घुसाने की कोशिश करते हैं जो उचित नहीं लगता , कुछ चोर उचक्के चलती ट्रेन से खिड़की में हाथ डालकर खिड़की पर बैठे यात्री के हाथों से उनका मोबाइल ,पर्स जैसी चीज छीन ले जाते हैं । जिससे दुर्घटना होने का खतरा भी रहता है।

  • कोचिंग संस्थान में अग्निकांड

    लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग से 15 छात्रों मौत की खबर दिल दहलाने वाली है।

    लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित तीन मंजिला इमारत में दोपहर में हुई आग हादसे में युवाओं की मौत की जो तस्वीर सामने आई है वह बहुत दुखदाई है।

    तीन मंजिला इमारत में आग लगने के वक्त इमारत में आग की लपटें और चारों तरफ धुआं भर गया। और धुआं बढ़ने से एनीमेशन सेंटर के छात्रों में भगदड़ मच गई स्थिति काफी भयभीत हो गई।

    इससे पहले भी आग लगने की कई मामले आए हैं और हर बार सुरक्षा व्यवस्था की कमी ही इस सब का कारण बनती है और इस बार भी कुछ ऐसा ही होगा।

    अलीगंज तीन मंजिला इमारत में आग लगने से 15 छात्रों की मौत हो चुकी है। तीन मंजिला इमारत का आवासीय मानचित्र की स्वीकृति पर व्यवसायिक इस्तेमाल हो रहा था मामले में दोषी पाए गए पांच जोनल अफसर सहित 18 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हालांकि आग लगने की वजह नहीं पता चल सकी ।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड प्रदेश के लिए बड़ा सबक है और इस पीड़ा दायक घटना से सीख लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए समुचित इंतजाम किए जाएं। और कहा किसी भी हाल में कोचिंग सेंटर और नर्सिंग होम बेसमेंट में नहीं चलेंगे।

    इस वक्त अलीगंज क्षेत्र में हुए अग्निकांड से सबक लेते हुए जांच बैठाने की स्वीकृति दे और आगे बढ़े ।बेगुनाहों को बचाने के लिए ठोस एवं न्याय पूर्ण कार्यवाही करें। और ऐसी न्याय व्यवस्था बनाई जाए जहां सुरक्षा के नियम कागज पर ही ना लिखे जाएं बल्कि जमीन पर भी दिखाई दें।

  • उज्ज्वला योजना

    प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई उज्ज्वला योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों के लिए विशेष कर महिलाओं को धुएं में भोजन बनाने से मुक्ति दिलाना और स्वस्थ ईधन उपलब्ध कराना है ।

    क्या है उज्ज्वला योजना

    भारत देश के गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री द्वारा उज्ज्वला योजना 1 मई 2016 को शुरू की गई। इस योजना का उद्देश्य है महिलाओं को धुएं से आजादी और स्वस्थ ईंधन प्रदान करना था । पहले इस योजना के अंतर्गत साल में 9 एलपीजी सिलेंडर मिलते थे परंतु अब 4 कर दिए गए है।

    गरीब लोगों के लिए

    उज्ज्वला योजना शुरू करने का मकसद गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार के लिए है ।जिन परिवारों के पास बीपीएल कार्ड है उन परिवार को फायदा दिलाने के लिए उज्ज्वला योजना शुरू की गई।

    धुएं से आजादी

    उज्ज्वला योजना के बाद से हर घर में स्वस्थ ईंधन दिखने लगा। और उज्ज्वला योजना का सबसे अधिक फायदा महिलाओं को हुआ क्योंकि अब भोजन धुएं में बैठकर नहीं पकाना पड़ता और इससे महिलाओं को धुएं से होने वाली समस्याओं से भी आजादी मिली ।

    एलपीजी सिलेंडर की संख्या

    अभी तक एलपीजी सिलेंडरों के साल में मिलने की संख्या 9 थी। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह द्वारा सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी गई है। एलपीजी सिलेंडर की संख्या घटाने की वजह के पीछे एक समस्या यह भी बताई जा रही है कुछ लाभार्थी सब्सिडी वाले सिलेंडरों का व्यवसायिक उपयोग कर रहे थे।

    पारदर्शिता

    उज्ज्वला योजना में पारदर्शिता होना बहुत जरूरी है क्योंकि कुछ लाभार्थी इसका दुरुप्रयोग कर रहे हैं जिस कारण सरकार को सब्सिडी सिलेंडर की संख्या घटानी पड़ी। परंतु कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनकी ईंधन की खपत अधिक है और उन्हें सरकार के इस फैसले से परेशानी हो सकती है। इसलिए सरकार को उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की जांच करना जरूरी है। जिससे उचित न्याय मिले।

  • राम मंदिर और चढ़ावे की चोरी

    अयोध्या में स्थित राम मंदिर मैं चढ़ावे चोरी की घटना की बातें जोरों पर है आखिर क्या है यह मामला और क्या सच है क्या झूठ है। आज के वक्त में इंसान के अंदर की इंसानियत खत्म हो चुकी है । क्या इंसान इतना गिर चुका है कि चढ़ावे तक को भी न छोड़े।

    विश्वहिंदू परिषद् (विहिप) ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे चोरी की जांच हो इसके लिए मांग की है। और साथ ही कहा है जो कोई इस चोरी में शामिल हैं और मिले हुए हैं उन्हें कानून द्वारा सजा मिलनी चाहिए।

    राम मंदिर पर आए चढ़ावे की चोरी करना उन भक्तों के सथ धोखा और उनकी भक्ति के साथ छल है जिन्होंने पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ अपने आराध्य को श्री राम मंदिर में सेवा रूप में चढ़ावा भेंट किया था।

    ऐसे में भक्तों की भावनाओं को ठोस लगी है । राम भक्तों की आस्था से खिलवाड़ भी हुआ है तो भक्तजन भी चाहेंगे कि जल्द से जल्द कानून द्वारा अपराधियों को पकड़ा जाए और सजा भी दी जाए।

    पर क्या सरकार चोरी करनेवालों को बचा रही है। क्योंकि प्रदेश सरकार ने एफ आई आर तक नहीं दर्ज कराई हो सकता है कि कानून जब चढ़ावा चोरी मामले की छानवीन करेगा तो शायद और भी कई बड़े नाम सामने आने की आशंका ‌‌हो।

    राम मंदिर से चढ़ावा चोरी की घटना ने सुरक्षा-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं क्योंकि मंदिर के आसपास का इलाका और मंदिर परिसर सीसीटीवी कैमरे की नजर में रहते हैं और कंट्रोल रूम में निगरानी की व्यवस्था भी रखी गई है इस सब के बावजूद भी चढ़ावा चोरी होता रहा और और इस चढ़ावे चोरी की किसी को भनक तक नहीं लगी।

    कुछ भी हो सकता है परंतु राम भक्त चाहेंगे कि राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी करने वालों को कानून द्वारा सजा सुनाई जानी चाहिए बगैर किसी सहानुभूति के फिर चाहे वह कोई भी व्यक्ति क्यों ना हो ।

  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

    आज की व्यस्त जिंदगी और भाग दौड़ भरी जिंदगी में इंसान खुद के लिए वक्त नहीं निकल पा रहा और अपनी जिम्मेदारी अपनों की जिम्मेदारी आज की सोच कल की सोच अच्छे भविष्य को बनाने की सोच में फुरसत वाली जिंदगी कहीं खो गई है।

    तनाव ,अशांति फिक्र इन सब की वजह से स्वास्थ्य पर असर पड़ता दिखता है। और बेचैनी भरी जिंदगी जीने को बेबस है । लेकिन हम दिन के कुछ पल योग करते हैं तो इससे हम अपने मन को और शरीर को स्वस्थ रखने की कोशिश कर सकते हैं ।

    योग की सबसे महत्वपूर्ण और बहुत अच्छी बात यह है कि योग करने से शरीर ही स्वस्थ नहीं होता बल्कि योग करने से मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

    आज के वक्त मे हम एआई युग में जी रहे हैं । हमारी लाइफ में सोशल मीडिया ने भी जगह बना ली है जो कि हमें कहीं न कहीं मानसिक समस्याएं भी दे रही है।

    अगर हम प्रतिदिन योग करने की आदत बना लें और दिन के कुछ वक्त खुली हवा में शांति के साथ और खुश मन से गहरी सांस लेते हुए ध्यान करते हुए योग करते हैं तो हम देखेंगे की योग हमें मानसिक समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मदद करता है।

    नियमित योगाभ्यास से मन को शांति और स्थिरता मिलती है।योग हमें सही सोचने में भी मदद करता है और हमारे कई रोगों में योग करने से फायदा भी होता है।

    21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया है। आज के वक्त में योग की विशेषताओं को सिर्फ भारत देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर के देश मानते हैं और समझते भी हैं।

  • सवाल आर्थिक व्यवस्था का

    हाल ही में कुछ दिनों पहले खबर आई कि भारत की जीडीपी में 7..7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हई। और फिर तभी रिजर्व बैंक ने आने वाले साल के लिए ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% कर दिया।

    लगभग एक साल से देश की अर्थ व्यवस्था की हालत कुछ ठीक नहीं है रुपया दिन-प्रतिदिन कमजोर पड़ता गया डॉलर के मुकाबले ऐसे में उपभोग की मांग कमजोर बनी हुई है घरेलू निजी निवेश कुछ ठीक नहीं है और विदेशी निवेश लौट रहा है।

    इस वक्त भारत देश को गिरती अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए आर्थिक सुधारो की जरूरत‌ करनी होगी। विनिर्माण क्षेत्र में गिरती अर्थव्यवस्था के कारण संतुलन बिगड़ गया है अमीर और सामान्य वर्ग के बीच में आर्थिक असमानता स्पष्ट दिख रही है और और शेयर मार्केट भी समस्याओं का सामना कर रही है।

    भारत ने जीडीपी में 7.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई। भारत कभी पांचवी अर्थव्यवस्था पर था फिर चौथे स्थान पर पहुंच गया और 1 साल से रुपए की कमजोर स्थिति के कारण छठवे स्थान पर आ पहुंचा है।

    ये वक्त है रुपए की कमजोर होती स्थिति को सुधारने के लिए अर्थशास्त्रियों द्धारा सुझाए गए सुझावों को अमल में लाना। अर्थशास्त्रियों द्वारा सुझाए गए सुझावों से अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के कुछ न कुछ रास्ते जरूर मिलेंगे।

    अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। महंगाई बढ़ रही है तेल ,गैस, उर्वरक तथा अन्य वस्तुओं पर महंगाई बड़ी है ।जिससे भारत का व्यापारिक संतुलन भी प्रभावित हुआ है अमेरिका ईरान के युद्ध का असर विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ा है।

    अर्थव्यवस्था की गिरती हालात से वह समस्याएं भी दिखने लगी हैं जिन पर सरकार का कभी ध्यान नहीं गया भारत का प्राइवेट सेक्टर जो कि निवेश नहीं कर पा रहा रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी देश में हालत बहुत खराब है ।

    फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था कोई किनारा होते नहीं दिख रही है भारत की राजनीति इन सवालों से घिरी हुई है।

  • लिंग निर्धारण रोधी कानून

    सुप्रीम कोर्ट ने प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) अधिनियम यानी पीपीपीएनडीटी कानून को सख्ती से लागू करने की जरूरत है यह कहा है ।जन्म के पूर्व लिंग की जांच कराने की और बेटे की चाहत रखना और पितृसत्तात्मक सोच और लिंग चयन की जारी प्रथाओं की कड़ी आलोचना भी की है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा जब तक समाज में स्त्रियों के प्रति जन्मजात कमजोर वाली सोच होना । स्त्रियां पुरूष के बराबरी नहीं ले लेती और यह एहसास नहीं होता । ऐसे प्रयासों की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए।

    लिंग निर्धारण परीक्षण

    सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि लिंग निर्धारण क्या है यह जैविक प्रक्रिया है जो की जन्म से पूर्व होती है जीव जो कि नर है या मादा है तय करती है और विकसित करती है।

    हमारे भारत देश में बेटों की चाहत सदियों पुरानी है ऐसा माना जाता रहा है की बेटे ही वंश चलाते हैं इसलिए जिस घर में बेटे नहीं होते उस घर का वंश खत्म हो जाता है यह माना गया है इसलिए हिंदू परिवारों में बेटे का होना आवश्यक होता है।

    बेटियों को शुरू से ही पराया धन और घर का बोझ माना जाता रहा है इसलिए बहुत से मां-बाप जन्म पूर्व लिंग का परिक्षण करा लेते हैं और पता कर लेते हैं की होने वाला बच्चा लड़की है या लड़का जो की एक कानूनन अपराध है।

    समय-समय पर सरकार द्वारा कानून बनते रहे हैं ।

    पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम 1994 यह कानून भारत की संसद द्वारा एक संघीय कानून है इसके तहत कन्या भ्रूणहत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए अधिनियम पारित हुआ। इस अधिनियम से प्रशव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध लगा।

    प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक (पीएनडीटी) 1996 के तहत इस कानून में जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है अगर अल्ट्रासाउंड अल्ट्रा सोनोग्राफी द्वारा कोई दंपति जन्म से पूर्व लिंग की जांच कराते हैं तो उस दंपति को, जांच करने वाले डॉक्टर को, और लैब कर्मी को 3 से 5 साल की सजा मिल सकती है और इसके अलावा 5 से ₹10 हजार का जुर्माना भी लगने का प्रावधान है।

    कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए सरकार द्वारा कानून बनाया गया घटते लिंगानुपात को लेकर।

    इस कानून का उद्देश्य गर्भाधान से पहले और जन्म से पूर्व लिंग चयन करने और जांच करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना था।

    भारत देश में लिंग जांच कराना गैर कानूनी है।

  • आगाज फीफा वर्ल्ड कप का

    आखिरकार फीफा वर्ल्ड कप का या कहे फुटबॉल के महाकुंभ की शुरुआत हो चुकी है। फुटबॉलके प्रेमियों का प्रशंसकों का इंतजार आखिरकार खत्म ही हुआ। मेक्सिको सिटी में प्रशंसकों और दर्शकों से भरे स्टेडियम में रंगारंग कार्यक्रम के साथ ही मैडोना और शकीरा की अद्भुत प्रस्तुति के सथ फुटबॉल के महाकुंभ का आगाज हुआ।

    मेक्सिको सिटी का स्टेडियम दर्शकों और प्रशंसकों खचाखच भरा हुआ था करीब 80 हजार दर्शक स्टेडियम मे मौजूद थे फीफा वर्ल्ड कप का आयोजन की शुरुआत देखने को।

    दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल फीफा विश्व कप के आयोजन की शुरुआत हो चुकी है जिसमें 48 टीम खेलेगी और 104 मैच इस पूरे टूर्नामेंट में होंगे इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट पर लगभग पूरे विश्व की निगाहें हैं।

    हालांकि फीफा फुटबॉल विश्व कप का आगाज़ का आयोजन अमेरिका कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में हुआ । और साथ में विवादो की चर्चा भी फीफा फुटबॉल विश्व कप में हो रही है जैसे की टिकट की कीमतों और अमेरिका के सख्त प्रवासन नियमों को लेकर देश में नाराजगी है विश्व कप की चर्चा मैदान से ज्यादा आवेदन नीति ,वीजा विवादों, रिकॉर्ड टिकट कीमतों, यात्रा लागत ऐसे कई विवाद सुनने में आ रहे हैं और अमेरिका की मेजबानी में ईरान की टीम फुटबॉल मैदान में खेलते देखना यह बहुत दिलचस्प बात होगी।

    विश्व कप जैसे आयोजन हमेशा राष्ट्रीय गौरव कुटनितिक संदेशों से जुड़े रहते हैं ।

    फुटबॉल फीफा विश्व कप में दर्शक उत्साहित हैं अपने चहेते खिलाड़ी को मैदान पर खेलते देखने के लिए ।

    राजनीतिक प्रशासनिक विवादों के बावजूद दर्शकों का फुटबॉल प्रेमियों का उत्साह कम नहीं है और दर्शक मैदान में अपने चहेते ‌खिलाड़ियों को देखने के इंतजार में है ।

  • कौन हैं आपके दोस्त

    जी हां कौन हैं आपके दोस्त जो आपके साथ रहते हैं और आपके सुख दुख के साथी भी होते हैं इस दुनिया में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसका कोई भी दोस्त ना हो या फिर वह किसी का दोस्त ना हो।

    दोस्त (Friend)

    दोस्त जो हमारी जिंदगी के हर पल में हमारे साथ रहते हैं ।हमारे दुख -सुख में हमारे साथ खड़े रहते हैं ।दोस्त हमारे बचपन से लेकर बुढ़ापे तक बनते हैं तो कभी-कभी बचपन का ही दोस्त हमारे बुढ़ापे तक साथ रहता है।

    नए समय के नए दोस्त

    आज के वक्त की स्थिति बदल चुकी है ।हम अपने जीवन के हर क्षेत्रमें तरक्की कर रहे हैं ।और आगे बढ़ रहे हैं आज के वक्त में टेक्नोलॉजी का ज़माना है जिससे कोई भी अछूता नहीं रहा और हर व्यक्ति के पास स्मार्टफोन जैसी टेक्नालॉजी आ चुकी है जोकि काफी फायदेमंद है ।

    पर क्या कभी सोचा है की टेक्नोलॉजी जो हमें फायदा दे रही है हमसे हमारे दोस्त भी तो छीन रही है। आज हर व्यक्ति के पास दोस्त से मिलने का टाइम ना के बराबर है अगर हमें दोस्तों से कुछ बात करनी होती है तो अपने फोन से या फिर ऑनलाइन होकर हम उनसे मिल लेते हैं।

    पर याद करो जब पहले स्मार्टफोन जैसी सुविधा नहीं थी । आप सब दोस्त मिलते थे तो आप पार्क में कई घंटों बैठकर बातचीत किया करते थे । और संडे के दिन स्पेशली क्रिकेट जैसे खेल भी खेला करते थे। लेकिन अब सब ऑनलाइन दोस्त हो चुके हैं और अब पार्कमें भी किसी को बैठने के लिए फुर्सत नहीं है। सब अपने वाई-फाई कवर एरिया में ही रहना पसंद करते हैं।

    आज के वक्त में सोशल मीडिया पर ही दोस्त बन चुके हैं और व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए बातचीत हो जाती हैं। पर कोई भी अब बाहर निकल कर बातचीत करना नहीं चाहता समय बदल चुका है।

    बदलते समय में बदलती टेक्नोलॉजी हमारे जीवन को काफी सरल बना रही है पर कुछ चीजें पहले जैसी नहीं रही है। इसलिए बदलते वक्त में जो दोस्त एआई ,स्मार्टफोन पर सोशल मीडिया के कई मंच पर मिल गए हैं उनसे दोस्ती के साथ साथ अपने गली के दोस्त, स्कूल के दोस्त को नहीं भूलना चाहिए और कभी-कभी बिना टेक्नोलॉजी के भी दोस्तों से मिलना सीखना चाहिए।

  • ग्रहिणियां राष्ट्रीय निर्माता

    सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है गृहणियां घर संभालने वाली महिलाएं नहीं बल्कि राष्ट्रीय निर्माता हैं। उनके द्वारा घर के किए गए कार्य को और समाज के लिए किए गए कार्य को उचित कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए ।

    गृहणी घर के सारे कार्यों को निस्वार्थ भाव से करती है पर उसके द्वारा किए गए कार्य का कोई मोल नहीं समझा जाता ।

    यह तो हम सब अच्छी तरीके से जानते हैं कि घर को परिवार को चलाने के लिए और इसकी जिम्मेदारी ग्रृहणी ही कुशलता से कर सकती है।

    महिलाओं के लिए खुशी का समय है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के घरेलू काम को कानूनी मान्यता मिले ऐसा कहा है।

    अदालत ने कहा गृहणियों का योगदान सिर्फ़ परिवार तक ही सीमित नहीं होता बल्कि वह मानव संसाधन और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है इसलिए उन्हें केवल होम मेकर के बजाय राष्ट्र निर्माता कहा जाना चाहिए ।और भविष्य में गृहणियों के योगदान को समाज और न्याय व्यवस्था दोनों मैं उचित सम्मान मिलेगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा होम मेकर यानी ग्रहणियों को परिवार के कमाने वाले सदस्यों पर ही निर्भर रहना पड़ता है जो की एक समस्या भी है । गृहणी घर के सारे कार्य को और परिवार की देखभाल को सुचारू रूप से करती है और गृहणियों पर ही परिवार की देखभाल और घर के कार्यों की जिम्मेदारी होती है।

    अदालत ने कहा किसी ग्रहणी के कार्य को कुछ न समझना महिलाओं के कार्य को कम आंका जाता है जबकि गृहणी बच्चों की पहली शिक्षक होती हैं।

    गृहणी परिवार के नैतिक मूल्यों अनुशासन सामाजिक व्यवहार मानवी संवेदनाओं का विकास करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं इस तरह गृहणी देश की आर्थिक और सामाजिक विकास की आधारशिला बनती है।