खिड़की से सफर का नजारा

हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी पास तो कभी दूर के सफर पर जरूर निकला होगा है ।सफर का आनंद ही अलग होता है । सफर करना भी चाहिए क्योंकि इससे मानसिक शांति और जानकारी भी मिलती है। सफर पर निकलने के एक-दो दिन पहले से ही मन आनंदित होता है।

सफर कई तरीके के होते हैं किसी की शादी मैं जाने के लिए ,रिश्तेदारी में जाने के लिए ,दोस्तों के पास घूमने के लिए या फिर छुट्टियों पर घूमने निकालना।

सफर जब थोड़ा बड़ा हो जैसे कि एक शहर से दूसरे शहर का सफर करना ऐसे सफर में आनंद कुछ और ज्यादा आता है।

सफर करते वक्त हर व्यक्ति की सोच होती है की खिड़की वाली सीट मिल जाए तो अच्छा होगा क्योंकि खिड़की वाली सीट पर बैठकर सफर में दोगुना आनंद आता है ।

जब कभी सफर के दौरान खिड़की वाली सीट नहीं मिलती तो सफर का आनंद कुछ अधूरा सा लगता है। खिड़की के पास बैठकर सफर मजे से कटता है खिड़की से रास्ते के नजारे को देखना हवा के झोंकों का चेहरे को छूना ऐसे बहुत सारे नजारे होते हैं जिसका आनंद खिड़की पर बैठकर ही मिल सकता है।

पर कुछ लोग जैसे की ट्रेन से सफर करते हैं स्टेशन पर भीड़ मैं खुली खिड़की से ही सामान वगैरा अंदर घुसाने की कोशिश करते हैं जो उचित नहीं लगता , कुछ चोर उचक्के चलती ट्रेन से खिड़की में हाथ डालकर खिड़की पर बैठे यात्री के हाथों से उनका मोबाइल ,पर्स जैसी चीज छीन ले जाते हैं । जिससे दुर्घटना होने का खतरा भी रहता है।

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