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  • अद्भुतता से भरा हुआ त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर

    शिव जी की महिमा तो सब जानते हैं ।जो कि बहुत ही अपरंपार है और कभी ना खत्म होने वाली महिमा है। हमने भगवान् शिवजी की महिमा के बारे में तो बहुत सुना है पर क्या आप लोगों ने कभी शिव जी के मंदिर के बारे में भी सुना है क्या। तो आज भगवान शिव के एक मंदिर त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर के बारे में सुनते हैं और क्या है इस मंदिर की विशेषता यह भी जानते हैं।

    त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर से जुड़ी जरूरी बातें

    त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के नासिक शहर से 28 किलोमीटर दूर त्र्यंम्बक शहर में बना हुआ है। यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है।

    सबसे पहले मंदिर की बनावट की बात करें तो काले पत्थरों की संरचना से अद्भुत निर्माण हुआ है इस मंदिर का और इसी कारण यह अद्भुत भी लगता है। मंदिर का निर्माण अपने आप में काफी अद्भुत है और देखने में भी बहुत सुंदर है।

    मंदिर का निर्माण 18 वीं शताब्दी में बालाजी बाजीराव ने कराया बताया जाता है। इस मंदिर के निर्माण में 16 लाख का खर्चा हुआ बताया जाता है। 16 लाख रुपए की राशि उस वक्त के समय पर बहुत बड़ी रकम बताई जाती है।

    त्र्यंम्बकेश्वर मन्दिर गोदावरी नदी के किनारे पर स्थित है।

    त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस मंदिर में स्थित ज्योतिर्लिंग उभरा हुआ नहीं बल्कि एक गहरे कुंड के जैसा है और इसमें तीन सुक्ष्म ज्योतिर्लिंग स्थित है जिन्हें ब्रह्मा विष्णु और महेश का संयुक्त रूप माना जाता है और इसी कारण इस मंदिर का नाम त्र्यंबकेश्वर मंदिर पड़ा। इस मंदिर में एक मुकुट भी है जो कि हीरे पन्ने से जड़ा हुआ बताते हैं और बताया जाता है इस मुकुट को पांडवों ने चढ़ाया था।

    त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर से जुड़ी कथा

    त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर एक प्राचीन मंदिर है और इस मंदिर से कई रहस्य भी जुड़े हुए हैं जो कि सुनने में बहुत ही अनोखे लगते हैं त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर से जुड़ी कहनी भी है जो की काफी प्रचलित है।

    कहां जाता है त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर की जगह पर प्राचीन समय में महर्षि गौतम अपनी पत्नी अहिल्या के साथ निवास करते थे ।एक बार की बात है महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या के कारण गाय की हत्या हो गई। गाय की हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए महर्षि गौतम ने कठोर तपस्या की और महर्षि गौतम की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने वरदान मांगने को कहा। इसपर महर्षि गौतम ने वरदान रूप में पाप से मुक्ति पाने के लिए मां गंगा को अवतरित हों ऐसा वरदान मांगा।

    भगवान शिव के आशीर्वाद से मां गंगा धरती पर अवतरित हुई और उसी जलधारा से गोदावरी उत्पन्न हुई ऐसा बताया जाता है। गोदावरी नदी को दक्षिण की गंगा भी कहा जाता है।

    त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर से हिंदू धर्म की गहरी आस्था जुडी हुई है और भक्त जन दर्शन करने के लिए पूरी आस्था के साथ मंदिर जाते हैं और खुशी-खुशी दर्शन मात्र से ही आनंदित हो जाते हैं।

  • सावन माह में महादेव जी की महिमा

    बारिश के मौसम में जब बारिश होती है तो मौसम भी सुहावना हो जाता है बारिश की वजह से चारों तरफ हरियाली ही हरियाली देखने को मिलती है और गर्मी से भी राहत मिलने लगती है बारिश के समय में ही हिंदू धर्म के अनुसार सावन माह आता है जो कि पूरे एक महीने का होता है और सावन महीने में भगवान शिव की भक्तों द्वारा पूजा अर्चना की जाती है।

    महादेव कथा

    सावन के पूरे महीने भारत देश में भक्तों द्वारा पूजा अर्चना की जाती है और व्रत भी रखें जाते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव माता पार्वती जी के साथ सावन महीने में धरती पर निवास करने आते हैं।

    सावन महीने में भक्तगण कांवर लाते हैं जिसमें गंगाजल होता है। कांवर के जल को भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है।

    भगवान शिव के सावन महीने को लेकर एक कथा प्रचलित है की जब देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन हुआ था तो समुद्र मंथन से निकलने वाली वस्तु को देवता और राक्षस आपस में बांट रहे थे।

    उसी समुद्र मंथन में से विष भी निकला जिसे कोई भी ग्रहण नहीं करना चाहता था तो ऐसे में उस विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया ।

    विष को ग्रहण करने के बाद भगवान शिव जी को पानी पीने की इच्छा हुई जिसके लिए भगवान शिव माता पार्वती जी के साथ धरती पर आए और पानी पिया ।

    तभी से सावन महीने में भक्तजन शिव मंदिरों में जाकर भगवान शिव को जल अर्पण करते हैं।

    पौराणिक कथा

    पौराणिक कथाओं के अनुसार भी भगवान शिव को सावन माह अत्यंत प्रिय है और सावन माह में भक्त जन अपने आराध्य भगवान शिव को मनाने का जतन करते हैं क्योंकि सावन महीने में कहते हैं भगवान शिव अपने भक्तों पर कृपा लूटाते हैं ।

    कथा के अनुसार भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने सावन महीने में भगवान शिव की आराधना की जिस कारण भगवान शिव जी को भी सावन महीना पसंद है ।

    सावन के महीने में कुंवारी लडकियां भगवान शिव पर जल चढ़ाने मंदिरों में जाती हैं और पूरे विधि विधान के साथ व्रत को रखती हैं और एक अच्छे पति को पाने की मंगलकामना भी करती हैं।

    देवों में देव महादेव जी को सावन महीने में भक्त लोग अपनी भक्ति से प्रभु को खुश करने में ही अपनी खुशी समझते हैं और पूरे सावन महीने विश्वास के साथ भगवान शिव की आराधना को करते हैं।

  • हनुमान कथा

    हनुमानजी की कथाएं अनेकों है ।हनुमान जी की हर कथा में अलग ही आनंद और सुनने में एक अलग प्रकार का रस मिलता है । हनुमान जी की कथाएं जितनी भी सुनो सब आनंदित होती है और इन कथाओं को बार-बार सुनने की भक्तों में इच्छा भी रहती है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार की बात है।जब पूरी सृष्टि और धरती जलमग्न हो गई और चारों तरफ जल ही जल दिखाई दे रहा था ।सृष्टि को बचाने के लिए कहीं से कोई भी उम्मीद नहीं दिख रही थी तब महर्षि मार्कंडेय जल में स्थित एक बहुत ही विशालकाय वटवृक्ष के समीप पहुंचें।

    महर्षि मार्कंडेय जी ने जल मग्न में धरती के बीच उस विशाल वटवृक्ष के पत्ते पर एक बालक को लेटे देखा जो की अत्यंत सुंदर था जिसके चेहरे पर मुस्कान के साथ अत्यंत तेज था ।महर्षि जी ने देखा कि वह बालक कोई और नहीं बल्कि साक्षात् बाल रूप में भगवान श्रीविष्णु नारायण जी थे ।

    जब महर्षि मार्कंडेय उस बालक रूपी श्री विष्णु जी के पास पहुंचे तो बालक ने अपनी एक श्वांस से महर्षि जी को अपने मुख के भीतर ले लिया। श्री विष्णु जी के उदर में जाकर महर्षी जी ने देखा तो वहां उन्हें संपूर्णसृष्टि, ब्रह्मांड ,सातों दीप, पर्वत ,नदियां, सूरज ,चंद्रमा,तारे और सारे ही देवता गण मौजूद मिले ।

    महर्षि मार्कंडेय जी ने जब श्री विष्णु जी के उदर में जाकर इस अलौकिक दृश्य को देखा तो यह देखकर महर्षि जी बहुत ही‌ आश्चर्य चकित रह गए।

    और उसी प्रलय के समय जब ब्रह्मांडीय और प्रचंड जलधाराएं उस बट वृक्ष को उखाड़ने का प्रयास करने लगीं तो विशाल काय वट वृक्ष की रक्षा के लिए श्री विष्णु जी के परम भक्त हनुमान जी अपनी असीम ऊर्जा के साथ और अपनी पूरी शक्ति से वहां प्रकट हो गए ।

    हनुमानजी ने वट वृक्ष की रक्षा के लिए और वृक्ष को उखाड़ने से बचाने के लिए अपनी विशाल भुजाओं और पुंछ से उस वट वृक्ष को संभाला और वट वृक्ष के पत्ते पर लेटे प्रभु श्रीहरि विष्णु जी को चारों तरफ से सुरक्षित घेर लिया और इस तरह भक्त हनुमान जी ने अपनी शक्ति से प्रलय के बवंडर को शांत किया।

    भक्त हनुमान अपने भक्तों के लिए भी और अपने प्रभु की रक्षा के लिए भी हर पल सेवा भाव के साथ सदा हजिर रहते हैं।

  • खुद को पहचानिये

    कभी-कभी हम इंसान जरा सी बात को बहुत बड़ा मान बैठते हैं और कई दिनों तक उन्हीं बातों में उलझे रह जाते हैं ।

    कुछ लोग बहुत ही भावुक प्रवृत्ति के होते हैं अगर उनसे कोई मजाक में भी कोई बात कह दे तो । भावुक प्रवृत्ति के ऐसे व्यक्ति जरा सी बात को भी बहुत ही गंभीरता से ले बेठते हैं और खुद में कमियों को देखने लग जाते है ।

    वक्त है हमें अपने आपको पहचानने का और समझने का हमें समझना होगा कि हम जैसे भी हों हम बेहतर हैं और किसी और के कुछ कहने पर हमें उसके जैसा सोचना नहीं है। हमें इसका भी ध्यान रखना होगा और साथ में खुद को उदास नहीं करना बल्कि सकारात्मक रवैया अपनाना चाहिए।

    हमें दूसरों के द्वारा हम पर किए गए मजाक को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए बल्कि ऐसी बातों को भूल जाना चाहिए और सब कुछ भूलकर आगे बढ़ना होगा क्योंकि यही जीवन है।

    कुछ लोग खुद से ही खुद को औरों के मुकाबले कम समझते हैं और किसी दूसरे के बताए हुए मार्ग पर चलना ही उनका जीवन बन जाता है ऐसे व्यक्ति कभी भी अपने बारे में भला बुरा समझने की कोशिश भी नहीं करते हैं। ऐसे लोगों के अंदर खुद पर विश्वास करने की बहुत बड़ी कमी होती है इसलिए वह खुद को औरों से कमतर ही समझते रहते हैं।

    और कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो कि बहुत काबिल और होशियार होते हैं पर इसके बावजूद उनके अंदर भी विश्वास की भारी कमी होने कारण औरों से बातचीत करने में भी घबराते हैं हिचकते हैं।

    इस प्रकार समाज में हमें कई प्रकार के व्यक्ति दिखाई देते हैं जो की श्रेष्ठ होते हुए भी खुद को कम ही समझते हैं जिस वजह से वह कभी भी अपने अंदर के प्रतिभा को पहचान भी नहीं पाते और अपने जीवन में दुखी रहते हैं व समाज के दबंग व्यक्तियों द्वारा सताए जाते रहते हैं।

    संसार के हर व्यक्ति में कुछ कमियां और कुछ अच्छाइयां होती ही हैं अगर व्यक्ति अपने अंदर की अच्छाइयों को पहचाने और अपनी अच्छाइयों को बढ़ावा दे तो वे भी किसी से काम नहीं होंगे। इस तरह हर व्यक्ति अपने आप को प्रतिभाशाली बना सकता है।

    इसलिए व्यक्ति को खुद को पहचानना होगा और समाज में अपनी स्थिति को सुधार कर जीवन के एक नए शिखर पर आगे बढ़कर खुदको साबित भी करना चाहिए

    हमें अपनी पहचान को स्वयं के आधार पर बनानी होगी ना कि दूसरों की राय पर अपनी पहचान बनायें । आप क्या हो और आप कौन हो इसका पता आपसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता तो फिर स्वयं की पहचान बनाने में दूसरों की राय की क्या जरूरत यह समझना होगा और समझाना भी होगा ।

  • व्यवस्था और प्रशासन में कितनी जरूरी है पारदर्शिता

    कोई भी बड़ा कार्य हो या किसी बड़े कार्य के लिए की गई घोषणायें जब होती है ।तो उसमें सबसे पहले उस कार्य में हुए हर वक्त की व्यवस्था ,विश्वास और पारदर्शिता को लेकर मन में कई सवाल उठते रहते हैं और इन सवालों का उठना मानवीय क्रिया है।

    हम बात कर रहे हैं बीते वक्त में हुए छात्रों द्वारा आंदोलन, नीट पेपर लीक होना, संसद के मानसून सत्र का बार-बार रद्द होना और इसके अलावा बारिश के मौसम में नई सड़कों का धंसना यह सब समस्त समस्या है जो मिलजुल कर हमारे देश की व्यवस्था और प्रशासन की नितियों पर सवाल उठाती हुई दिख रही है। साथ में इन सब कार्यों मे पारदर्शिता का हो ना क्या जरूरी नहीं है।

    इन सब में जनता का भरोसा भी होता है और जब देश की व्यवस्था और प्रशासन पर से विश्वास उठ जाता है तो फिर इस सबकी जवाबदेही किस से मिलेगी ।

    भ्रष्टाचार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए केवल आर्थिक क्षति का विषय नहीं होता बल्कि न्याय ,विश्वास, व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन जाता है। जब उसमें मनमानी चलती है।

    पर क्या व्यवस्था और विश्वास की सारी जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन का ही दायित्व है क्या इसमें देश के नागरिक का कोई दायित्व नहीं हमें यह भी समझना होगा।

    किसी भी देश के प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने में उस देश की सरकार जिम्मेदार मानी जाती है। जब सरकार अपनी दायित्व को भली भांति ना निभाकर अपनी मर्जी से चलाती है । तो जनता भी क्रोधित होकर जवाब देने के अभियान में जुट जाती है और इसका ताजा उदाहरण पूरा देश अभी बीते दिनों मे देख चुका है।

    जब निर्णयों , व्यवस्था और विश्वास में पारदर्शिता ना होकर पक्षपात किया जाता है तब विकास की गति तेज नहीं बल्कि धीमी पड़ जाती है यह समझना होगा हमारे देश को चलाने वालों को ।व्यवस्था या निर्माण कार्य में जब भ्रष्टाचार होने पर इसे कानून से जोड़ा जाता है जो कि प्रयाप्त या पूर्ण नहीं कहलाता है बल्कि यह शासन का भी दायित्व है कि हर कार्य को पारदर्शिता के साथ करे जिससे जनता के विश्वास को कायम रख सके ।

    आचरण और अनुशासन में रहकर लोकतंत्र के मूल्यों का सम्मान किया जाना चाहिए प्रशासन का अर्थ केवल भ्रष्टाचार पर कार्रवाई नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें अनियमितता की संभावना ना रहे ।

  • रांची में छात्र आंदोलन

    बीते दिनों दिल्ली के जंतर मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्रों द्वारा आंदोलन जिसमें देश के जेन जी ने विरोध प्रदर्शन किया ।इस आंदोलन में युवाओं और सोशल मीडिया की ताकत का एक नया पैमाना भी स्थापित हुआ । इस विरोध प्रदर्शन में जेन जी ने सफलता प्राप्त की और साथ में अपनी शर्त भी मनवाई।

    इससे हमें यह तो पता चलता है कि एक आम नागरिक अपनी आवाज को उठाना जानता है और एक साथ मिलकर आंदोलन के भागीदारी बन कर सत्ता पक्ष को झुकाना भी जानता है

    पेपर लीक की घटना में छात्रों के विश्वास को गहरी चोट लगी जब छात्रों ने ईमानदारी और कड़ी मेहनत से तैयार किए गए परिश्रम को व्यर्थ होते देखा तो उनका गुस्सा जवाब दे गया और आंदोलन के रूप में गुस्सा फूटा।

    दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को अभी शांत हुए कुछ दिन ही हुए थे कि एक नया छात्र आंदोलन शुरू हो गया।

    झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक ओएमआर सीट से छेड़छाड़ और धांधली के खिलाफ कर रहे छात्रों का आन्दोलन लोगों के ध्यान और चर्चा का विषय बन चुका है।

    रांची छात्र आंदोलन में पिछले कुछ दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कुछ छात्र अनिश्चितकालीन धरने और आमरण अनशन पर बैठ गए हैं और छात्रों ने अपनी मांगी रखी है छात्रों के मुताबिक प्रतियोगी परीक्षा में लगातार हो रहे पेपर लीक एवं भ्रष्टाचार पर रोक लगनी चाहिए।

    रांची छात्र आंदोलन को 22 23 दिन हो चुके हैं पर अभी तक इस आंदोलन को खत्म करने का ठोस कदम झारखंड सरकार नहीं उठा सकी है।

    हालांकि की इस मामले को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से निष्पक्ष जांच न्याय का भरोसा दिलाया है और छात्र प्रतिनिधियों को बातचीत करने के लिए आमंत्रित भी किया गया इस आंदोलन को सोनम वांगचुक से भी समर्थन मिलने लगा है जिस वजह से हेमंत सोरेन की सरकार पर दबाव बन गया है।

    रांची छात्र आंदोलन में छात्र सड़कों पर उतर कर सरकार के खिलाफ नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं और अभी तक इस आंदोलन को सरकार की तरफ से संतुष्टि पूर्ण जवाब नहीं मिला है और यह आंदोलन अब किस दिशा में बढ़ेगा या इस आंदोलन में छात्रों की सहमति में सरकार भी सहमत होगी यह देखना बाकी है।

  • सवाल संसद के स्थगित होने का

    इस बार के पूरे मानसून सत्र में संसद अभी तक ना के बराबर ही चली है। दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों द्वारा हुए आंदोलन के बाद से ही संसद का लगातार स्थगित होना एक गंभीर और चिंताजनक विषय है। संसद राष्ट्रीय संपत्ति है और लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच भी है।

    संसद एक ऐसा मंच है जहां पर सरकार और विपक्ष के बीच सुनवाई होती है मतभेदों का समाधान किया जाता है पक्ष विपक्ष में सहमति संवाद और तकरार भी होती है ।पर जब संसद में जब यह कार्यवाही शालीनता के साथ ना हो कर एक हंगामे में तब्दील हो जाती है और परिणाम संसद का रद्द होना होता है ।

    इस बार के मानसून सत्र में विपक्ष सरकार से संसद में मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कार्रवाई पर चर्चा करना चाहता है और साथ में गृहमंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर जवाब दें ऐसा भी विपक्ष चाहता है ।

    मानसून सत्र में विपक्ष राम मंदिर चंदा चोरी के मामले पर भी चर्चा करना चाहता है और चर्चा को करने के लिए काफी वक्त से अड़ा हुआ है। पर क्या संसद की कार्रवाई को रोकना कहां तक उचित है इस बात को भी पक्ष और विपक्ष को समझना होगा।

    संसद का बार-बार स्थगित होना । संसद की कार्यवाही को नियमितरूप से ना चलने देना आखिर कब तक होगा और कब यह गतिरोध टूटेगा ।

    सदन का सुचारू रूप से संचालन होना विपक्ष और सरकार दोनों की जिम्मेदारी और सहमति से ही हो सकता है।

    दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देने पर विपक्ष की मांग को मानकर सरकार ने सहमति जता तो दी है। पर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते मतभेदों से एक अलग ही माहौल और चिंता जनक विषय बन गया है ।

    पर एक बात तय है कि संसद में गृहमंत्री का आना और विपक्ष द्वारा संसद की कार्यवाही को संयमित तरीके से चलने देना संसद के बार-बार स्थगित होने की गतिरोध से बाहर निकालने की शुरुआत हो सकता है।

  • लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस-वे

    हमारे भारत देश में हो रही विकास की लहर हमें चारों तरफ दिखाई देती है और इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हम भी उन्नति की दिशा में कदम आगे बढ़ा रहे हैं और चाहते हैं कि दुनिया के मानचित्र मे विकसित देशों में भारत भी अनूठा स्थान बनाने में सफल रहे ।

    पर जब देश के विकास में धांधली शामिल होती है तो स्थिति बेहतर बनने के बजाय बिगड़ती ही नजर आती है ।इसी का एक नया उदाहरण है लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस-वे जिसका निर्माण होने में हजारों-करोड़ों रुपए लगे जिसका उद्घाटन होने के कुछ समय बाद ही कई जगह से धंसने के कारण चर्चा में आ गया है । जिसको लेकर सोशल मीडिया पर भी सरकार के कार्य की खोचड़ी हो रही है।

    पिछले कुछ सालों से देश में हाईवे ,एक्सप्रेसवे, मेट्रो ,रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और पुल के निर्माण ने गति पकड़ रखी है लेकिन सवाल यह है यह सब निर्माण मानव जाति के हित में जीवन की सुगमता के लिए हो रहे हैं पर क्या इन निर्माणों में गुणवत्ता का भी ख्याल रखा गया है ।

    क्या यह निर्माण देश की जनता के विश्वास पर खरे उतरेंगे इसलिए हमें समझना होगा यह समस्या केवल एक एक्सप्रेसवे की नहीं है बल्कि यह निर्माण मनुष्य जाति को कोई जोखिम न दें इसका भी है।

    मानसून का समय है तो ऐसे में देश के कई राज्यों और कई शहरों से सड़कों की टूटने पुलों के क्षतिग्रस्त होने की खबरें आती हैं पर सोचने वाली बात ये है कि कुछ समय पहले ही हुए लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस के उद्घाटन के बाद का पहले ही मानसून में क्षतिग्रस्त होना बेहद शर्मनाक है।

    हमारे भारत देश में कई शहरों में कोई 100 साल पहले बनी इमारत ,पुल ,सड़क जो आज भी खड़ी हुई है और रोजाना लाखों लोगों का जिन पर आवागमन भी होता रहता है। इनका निर्माण उस वक्त हुआ जब संसाधन और तकनीक आज के मुकाबले बहुत कम था ।ऐसे में दोष किसका है मैं पता करना भी जरूरी है।

    डिजिटल डिजाइन है डिजिटल युग है संसाधन भी भरपूर हैं उसके बाद भी कानपुर लखनऊ एक्सप्रेस के निर्माण में हुई लापरवाही जिसकी वजह से कानपुर लखनऊ एक्सप्रेसवे पर आवागमन कर रहे मुसाफिरों के लिए समस्या का विषय बनी हुई है।

    कानपुर से लखनऊ तक 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस की हर एक किलोमीटर सड़क बनने पर 66 करोड रुपए खर्च हुए हैं ।इस प्रकार कुल लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस 4200 करोड रुपए की लागत से बना है । जिसके लगातार धंसने की वजह से गुणवत्ता और तकनीक पर उठते सवालों को लेकर चर्चा से घिरा हुआ है।

    कानपुर लखनऊ एक्सप्रेसवे जिसका अभी कुछ दिन पहले ही लोकार्पण हुआ था और लेकिन कुछ समय बाद से ही लगातार जगह-जगह सड़क की धंसने की आती खबरे निर्माण में हुई लापरवाही एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और तकनीक पर भी संदेह होने लगा है। आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा और कहां त्रुटि हुई है यह कैसे पता चलेगा इस तरह के कई सवालों से घिरा हुआ कानपुर लखनऊ एक्सप्रेसवे।

  • युवा की निजता और बच्चों के बचपन में घुसती सोशल मीडिया

    आज के वक्त में लगभग हर व्यक्ति सोशल मीडिया पर है ऐसा लगता है मानो सोशल मीडिया हमारी जिंदगी में अभिन्न अंग बन गया है

    युवा वर्ग और बच्चे सोशल मीडिया पर ही अपना अधिकतर समय बिताते हैं और अपनी निजी जीवन के निजिकरण को काफी हद तक सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं इस सबसे अनजान कि आनेवाले समय में अपना निजिकरण शेयर करना उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

    बदलते समय में सोशल मीडिया का हमारे जीवन में जरूरत से ज्यादा दखल देना और कभी-कभी एआई द्वारा हमारी तस्वीरों का बिना हमारी अनुमति के उपयोग करना भी हमारे लिए घातक हो सकता है और धोखाधड़ी जैसी घटनाएं भी हो सकती है । इसलिए पारदर्शिता होना बहुत जरूरी है।

    ठीक इसी प्रकार बच्चों के बचपन के साथ भी सोशल मीडिया खिलवाड़ करती नजर आती है सोशल मीडिया का प्रभाव बच्चों के व्यक्तित्व व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित भी कर रहा है ।सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से अवसाद ,चिंता ,अनिद्रा, आत्मसम्मान में कभी ऐसी गंभीर समस्याएं भी देखने को मिल रही है।

    जैसे-जैसे डिजिटल कम्युनिकेशन बढ़ रहा है ।साथ में जटिल और गहरी समस्या भी देखने को मिल रही हैं । सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा अत्यंत जरूरी है हालांकि सोशल मीडिया पर 18 साल से कम उम्र के बच्चे अपना अकाउंट नहीं बना सकते जो कि उनकी सुरक्षा को देखते हुए अच्छा है ।

    सोशल मीडिया में बच्चो के यौन शोषण और पोर्नोग्राफी से जुड़ी सामग्री दूसरा बेहद गंभीर मामला है और चिंता जनक भी है ।इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के माध्यम से बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देना आईटी कानून बीएनएस और पोक्सो कानून के तहत गंभीर अपराध है।

    संविधान के अनुच्छेद 15 और 39 के अनुसार बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। बच्चों के यौन शोषण को रोकने के लिए अमेरिका और दुनिया के दूसरे देशों में भी सख्त कानून है। अमेरिका चिल्ड्रन ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट के तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया जॉइन नहीं कर सकते हैं।

    बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सोशल मीडिया पर भारत में दिल्ली उच्च न्यालय फैसले और दूसरे कानूनों के अनुसार मजबूत नियामक और उचित क्रियान्वयन के माध्यम से नाबालिक बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है।

  • सवाल जीवन में बदलाव कैसे लाएं

    आज के वक्त में हर व्यक्ति अपने वर्तमान जीवन की परेशानियों से निकलकर खुद से ही अपने जीवन को एक बेहतर स्थिति में लाना चाहता है देखा जाए तो मनुष्य की यह सोच गलत नहीं साबित होती।

    प्राणी का स्वभाव परिवर्तन शील है और परिवर्तन प्राचीन काल से ही होते आया है ।

    इतिहास ऐसे कई अनगिनत व्यक्तियों की गाथाओं से भरा है ।जिन्होंने अपनी विकट परिस्थितियों से निकलकर एक बदली हुई सोच के साथ नए जीवन का स्वागत किया जो कि सुविधाओं से भरा हुआ हो ऐसे जीवन का स्वागत किया।

    इतिहास में इन व्यक्तियों को संघर्ष का सामना भी करना पड़ा इन्हें समाज में व्यक्तियों द्वारा बनाए मजाक को भी सुनना पड़ा पर इनके कदम फिर भी नहीं रुके और इन्होंने अपने जीवन में बदलाव करके सबको चकित भी किया ।