सावन महीना लग चुका हैं और श्रद्धालु कांवड़ यात्रा भी शुरू करने की तैयारी में है ।मौसम भी बारिश का है जिसमें उमस से छुटकारा मिलता है और चारों तरफ हरियाली ही हरियाली देखने को मिलती है मन खुश हो जाता है पर बारिश के साथ कुछ समस्याएं भी आती हैं।
उत्तरप्रदेश मैं आगरा हाईवे पर एमजी रोड पर अभी कुछ दिन पहले आई बारिश की वजह से जगह-जगह पानी भर गया जिसकी वजह से जाम लग गया और 100 व200 मीटर दूरी तय करने में ही घंटों लगे।
इधर आईएसबीटी से सिकंदरा तक मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है जिसकी वजह से सर्विस रोज और हाईवे के डिवाइडर पर बैरीकेडिंग लगाई है ।हाईवे पर नाले चौक होने की वजह से बारिश के पानी को निकासी नहीं मिलती और जलभराव की स्थिति हो जाती है जिससे यातायात बाधित होने लगता है। एएक
बारिश के वक्त में यह स्थिति लगभग पूरे आगरा शहर में देखने को मिलती है । जिस वजह से जाम लग जाता है यातायात व्यवस्था विगड़ती है ,शहरवासियों को इस समस्या से जूझना पड़ता है।
हर बार वही बारिश और वही परेशानी ये हाल आगरा का ही नहीं बल्कि बारिश में देश के हर शहर में यह स्थिति देखी जा सकती है। मानसून के समय में वही दृश्य आंखों के आगे आ जाते हैं जिसमें सड़कें जलमग्न, और फिर सड़कों पर वाहन का फंसना पैदल चलने वाले राहगीरों की परेशानी व यातायात बाधित होना। हर बार मानसून में अमूमन यही समस्याएं देखने को मिलती हैं। इस सब की वजह से जान -माल का भी नुकसान हो जाता है।
पहाड़ी क्षेत्रों मे मानसून के वक्त में स्थिति और भी भयाभय हो जाती है और एक बहुत बड़े पैमाने पर जान -माल को नुकसान होने का खतरा भी रहता है। हालांकि सरकार राहत और बचाव कार्य के लिए सेवा को वहाल करती है। बाढ़ संभावित क्षेत्रों मे स्थाई निर्माण पर रोक भी लगाई जाती है । पर मानसून के खत्म होने के बाद स्थाई लोग बाढ़ संभावित क्षेत्रों मे फिर से बसने लगते हैं और फिर से मानसून में समस्या का चक्र दोहराया जाता है।
बारिश के मौसम में अधिकतर ऐसी समस्या देखने और सुनने मिलती हैं तो ऐसे में इन समस्याओं से सरकार कोई भी सबक लेना चाहिए । और समस्या निवारण हल ढूंढ़ने चाहिए इसके साथ ही शहरवासियों को भी मानसून के वक्त में समझदारी दिखानी चाहिए ।