Blog

  • बारिश से मन खुशहाल पर सड़क बेहाल

    सावन महीना लग चुका हैं और श्रद्धालु कांवड़ यात्रा भी शुरू करने की तैयारी में है ।मौसम भी बारिश का है जिसमें उमस से छुटकारा मिलता है और चारों तरफ हरियाली ही हरियाली देखने को मिलती है मन खुश हो जाता है पर बारिश के साथ कुछ समस्याएं भी आती हैं।

    उत्तरप्रदेश मैं आगरा हाईवे पर एमजी रोड पर अभी कुछ दिन पहले आई बारिश की वजह से जगह-जगह पानी भर गया जिसकी वजह से जाम लग गया और 100 व200 मीटर दूरी तय करने में ही घंटों लगे।

    इधर आईएसबीटी से सिकंदरा तक मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है जिसकी वजह से सर्विस रोज और हाईवे के डिवाइडर पर बैरीकेडिंग लगाई है ।हाईवे पर नाले चौक होने की वजह से बारिश के पानी को निकासी नहीं मिलती और जलभराव की स्थिति हो जाती है जिससे यातायात बाधित होने लगता है। एएक

    बारिश के वक्त में यह स्थिति लगभग पूरे आगरा शहर में देखने को मिलती है । जिस वजह से जाम लग जाता है यातायात व्यवस्था विगड़ती है ,शहरवासियों को इस समस्या से जूझना पड़ता है।

    हर बार वही बारिश और वही परेशानी ये हाल आगरा का ही नहीं बल्कि बारिश में देश के हर शहर में यह स्थिति देखी जा सकती है। मानसून के समय में वही दृश्य आंखों के आगे आ जाते हैं जिसमें सड़कें जलमग्न, और फिर सड़कों पर वाहन का फंसना पैदल चलने वाले राहगीरों की परेशानी व यातायात बाधित होना। हर बार मानसून में अमूमन यही समस्याएं देखने को मिलती हैं। इस सब की वजह से जान -माल का भी नुकसान हो जाता है।

    पहाड़ी क्षेत्रों मे मानसून के वक्त में स्थिति और भी भयाभय हो जाती है और एक बहुत बड़े पैमाने पर जान -माल को नुकसान होने का खतरा भी रहता है। हालांकि सरकार राहत और बचाव कार्य के लिए सेवा को वहाल करती है। बाढ़ संभावित क्षेत्रों मे स्थाई निर्माण पर रोक भी लगाई जाती है । पर मानसून के खत्म होने के बाद स्थाई लोग बाढ़ संभावित क्षेत्रों मे फिर से बसने लगते हैं और फिर से मानसून में समस्या का चक्र दोहराया जाता है।

    बारिश के मौसम में अधिकतर ऐसी समस्या देखने और सुनने मिलती हैं तो ऐसे में इन समस्याओं से सरकार कोई भी सबक लेना चाहिए । और समस्या निवारण हल ढूंढ़ने चाहिए इसके साथ ही शहरवासियों को भी मानसून के वक्त में समझदारी दिखानी चाहिए ।

  • सबक नीट पेपर लीक मामले से

    अभी हाल ही में जंतर मंतर पर छात्रों और सीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा हुए आंदोलन में हमें बहुत कुछ देखने को और सीखने को मिला और काफी अनुभव भी मिला साथी ही एक बहुत बड़ा सबक भी मिला है।

    संसद भवन के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव और जिसकी वजह से मानसून सत्र का पहला दिन हंगामे की वजह से संसद का स्थगित होना राजधानी में लोकतंत्र के दो दृश्य और दोनों ही चिंताजनक स्थिति में दर्शाते हुए दिखाई दिए ।

    यह समझने में समस्या है कि नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे को लेकर छात्रों की व्यापक आक्रोश और उस पर सवार विपक्ष राजनीतिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देना राजनीतिक मजबूरी का परिणाम है या राजनीति का एक नया अध्याय शुरू हो गया है।

    आवश्यकता है परीक्षा सुरक्षा को लेकर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए और नीट पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन किया उसमें पारदर्शिता भी जरूरी क्योंकि प्रश्नप्रत्र की रक्षा करोड़ों युवा छात्रों के विश्वास की रक्षा है।

    नीट प्रश्न पत्र लीक मामले को लेकर छात्र और युवाओं में बढ़ता आक्रोश और विरोध-प्रदर्शन सरकार द्वारा तनाव कम करने की दिशा में पहल करना और सरकार की कोशिश नाकाम होना भी स्वयं में एक बड़ा प्रश्न है क्या जेन जी और छात्रों की बीजेपी सरकार से उम्मीद खत्म हो चुकी है।

    संसद के अंदर भी स्थिति निराशाजनक ही है जब सदन में सार्थक बहसों के स्थान पर नारेबाजी होने लगे और हंगामे की वजह से सदन का स्थगन की भेंट चढ़ना ऐसे में लोकतंत्र कमजोर सा दिखाई दे रहा है ।

    बीते समय में यह सब कुछ हमने देखा और साथ में हमने देखा कि जब सरकार अपनी मनमानी करें तो विपक्ष, छात्र और गुस्साए लोगों द्वारा साथ मिलकर आंदोलन करना, संसद को न चलने देना इस प्रकार के अनैतिक कार्यों की वजह से संतुलन बिगड़ा है।

    ऐसे में सरकार को संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर देना चाहिए और विपक्ष को भी विरोध करने की भूमिका में न रहकर सरकार के साथ सदन के सफल संचालन की जिम्मेदारी में दायित्व निभाना चाहिए।

    दूसरी तरफ ऐसी परीक्षा व्यवस्था का निर्माण करना चाहिए जहां परीक्षा से जुड़े किसी भी अव्यवहारिक तत्व का पकड़ा जाना निश्चित हो जिस देश की परीक्षा प्रणाली पर युवा छात्रों को भरोसा मिले।

  • सवाल लोकतंत्र का

    दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए धरना प्रदर्शन की चर्चाएं पूरे देश में हो रही है। कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों ने नीट पेपर लीक मामले में आंदोलन धरना और प्रदर्शन किया और अपनी शर्ते रखी। शर्त अनुसार धर्मेंद्र प्रधान जी ने इस्तीफा भी दिया। जंतरमंतर पर जीत की खुशी का जश्न मनाकर छात्र भी अपने-अपने घर को लौट गए ।यह जीत बहुत बड़ी जीत है छात्रों की और कॉकरोच जनता पार्टी की।

    इस पूरे आंदोलन में लोकतंत्र के नियम भी समझने को मिले की लोकतंत्र मे स्वतंत्रता,सामान्यता, सहभागिता सबके लिए बराबर है और आम जनता व नागरिक के पास शासन की शक्ति होती है।

    इस आंदोलन में प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने भी छात्रों को साथ दिया और प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे स्पष्ट है कि लोकतंत्र में अपने उद्देश्यों को पाने के लिए और अपनी बात को रखने का वैध जरिया है। कहां जाए तो आम नागरिक के पास अपनी बात को पहुंचने का जरिया लोकतंत्र से होकर है।

    पर लोकतंत्र में रहकर हमें नागरिक होने के साथ-साथ देश के प्रति और लोकतंत्र के प्रति समझदारी भी दिखानी होगी और हमें अपने संवादों में प्रयोग किये गए और कहे गए शब्दों पर ध्यान रखने का जिम्मा भी संभालना होगा । लोकतंत्र में शांति और समझदारी के साथ नागरिक को अपनी बात रखने असहमति जतानी आनी चाहिए ना की अराजकता और हिंसा से। क्योंकि जंतर मंतर पर आंदोलन के वक्त कुछ असामाजिक तत्वों की वजह से आंदोलन को अराजकता और हिंसा की तरफ मोड़ दिया गया और इसका नुकसान मासूम जनता को भी उठाना पड़ा।

    लोकतंत्र में शांतिपूर्ण ढंग से और पारदर्शिता के साथ देश के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने का और असहमति जताने का प्रावधान है और यह वैध जरिया है। नेता प्रतिपक्ष भी अपने असंतोष और असहमति को जाहिर करने के लिए लोकतंत्र का रास्ता अपनाते हैं।

    यहां सवाल है लोकतंत्र के साथ नागरिक की समझ कैसी है। क्या लोकतंत्र में अपनी असहमति जताने के साथ-साथ अराजक होना और किसी भी सम्माननीय व्यक्ति के खिलाफ भद्दी भाषा या टिप्पणी करना शोभा देता है । देश के नागरिक मर्यादा में रहकर भी अपनी असहमति और गुस्से को प्रदर्शित कर सकते हैं और यही सबसे अच्छा तरीका है।

  • इस्तेमाल और सवाल पैलेट गन का ।

    प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पैलेट गन का प्रयोग किया गया था इस बात को लेकर भी सवाल उठे हैं आखिरकार क्या होती है पैलेट गन ।

    पैलेट गन क्या होती है पहले हमें इसको समझना होगा पैरेट गुण का प्रयोग पुलिस फोर्स भीड़ को कंट्रोल करने के लिए करती है पैलेट गन में बारूद होता है जिसमें कई सारे छोटे-छोटे मेटल पैलेटस‌ होते हैं जिसे छोड़ने पर हवा में मैटल टैलंट फैलते हैं परंतु पैलट गन के बॉडी पर पास से लगने पर घाव हो जाते हैं जिससे घायल होने के कारण हो सकते हैं।

    राहुल गांधी जी पैलट गन का मुद्दा उठाया है और उन्होंने मीडिया के सामने व पैलेट गन से घायल हुए व्यक्ति के घाव भी दिखाएं और कहा कि सरकार पैलेट गन का प्रयोग करने से साफ इनकार कर रही है ।

    दिल्ली पुलिस ने भी पैलेट गन का इस्तेमाल करने से इंकार कर दिया है तो फिर प्रदर्शन कार्यों पर पैलट गन का प्रयोग करने का आदेश आखिर किसने दिया इसकी जांच भी होनी चाहिए। ंं

    छात्रों पर पैलेट गन का प्रयोग होने के मुद्दे पर अब सीआरपीएफ़ का बयान आया है की प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का प्रयोग हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच होगी।

    आखिर पैरेट गन के प्रदर्शनकारियों पर किए गए प्रयोग से कब तक झूठ बोलकर बचेंगे और कौन इस सबके पीछे है और किसे इस सबसे फायदा मिलेगा ।

  • सवाल Gen Z की पावर का

    बड़े-बड़े नेता वह चाहे कोई भी हो पश्चिम बंगाल की ममता दीदी, उत्तरप्रदेश के अखिलेश यादव या नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी यह सब मिलकर भी सरकार की मनमानी को नहीं रोक सके जो की साधारण से छात्रों और जेन जी और सीजेपी ने कर डाला ।

    आखिर जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक मामले में गुस्साए छात्रों द्वारा मांगे गए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आखिरकार हो ही गया ।

    शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा दे दिया है जिससे पूरे देश में छात्रों द्वारा जश्न मनाया जा रहा है ।

    समझा जाए तो जेन जी की पावर के आगे सरकार को घुटने टेकने पड़े यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद से ही एक तरफ यह भी देखा जा सकता है कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने से आपको कोई नहीं रोक सकता बल्कि ये आपका हक है।

    जेन जी और छात्रों के साथ-साथ विपक्ष के नेताओं मे भी खुशी की लहर है और सब आपनी अपनी खुशी को सोशल मीडिया के मंच पर जाहिर कर रहे हैं ।

    समझने वाली बात है क्या कभी किसी ने सोचा था कि एक -दो महीने पहले बनी सीजेपी सरकार की नाक में दम भी कर देगी और डटकर सामना भी करेगी ।

    सोनम वांगचुक जी के अनशन के बाद से सीजेपी और छात्रों द्वारा शुरू किए आंदोलन को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी का भी सहारा मिला जिससे छात्रों में और जोश आ गया ।

    जैन जी के इस प्रदर्शन में जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को सरकार की तरफ से रोकने की काफी मशक्कत की गई पर असफलता ही हाथ लगी और निराशा मिली।

    क्या मोदी और शाह की जोड़ी जेन जी को पसंद नहीं आ रही और क्या सरकार द्वारा बनाए नियमों को जेन जी नजरअंदाज कर रहा है । मुद्दा कुछ भी हो पर सरकार को छात्रों के मन की बात को समझना होगा।

    धर्मेंद्र प्रधान जी का इस्तीफा हो चुका है और जंतर मंतर से सभी छात्रों ने जश्न मना कर अपने-अपने घर की राह को पकड़ लिया है पर उससे पहले जेन जी ने अपनी प्रतिभा और अपने दम खम की सरकार को झलक दिखला दी है और वह रुकेंगे नहीं इसका भी संकेत दिया है।

    इसके साथ ही समझना होगा वो चाहे सरकार हो या फिर कोई भी बड़ी हस्ती ।आज के छात्रों में अपने हक को पाने के लिए जोश और ज़िद है।

  • सवाल कांग्रेस को कितना फायदा आन्दोलन से

    जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन पर सबकी नजर है ।जिस तरह छात्रों और प्रदर्शनकारियों‌ ने आंदोलन में सरकार को घेरा है इसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है।

    इस आंदोलन को सब अपने-अपने नजरिए और अपने-अपने फायदे से देख रहे हैं। यह तो हम सब भली भांति जानते हैं कि यह आंदोलन शुरू हुआ था सोनम वांगचुक जी के अनशन से और धीरे-धीरे एक बड़े आंदोलन में तब्दील हो गया ।

    अब इस आंदोलन में नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी छात्रों का साथ देने के लिए आगे बड़े हैं और उनके साथ खड़े होकर सरकार पर छात्रों की शर्तों को मंजूर करने का दबाव बना रहे हैं।

    धरना व प्रदर्शन के दौरान युवा वर्ग बेहद आहत है और ऐसे में राहुल गांधी के आगे बढ़ने से छात्रों को भी बहुत बड़ा सपोर्ट मिला है। देखा जाए तो यह सपोर्ट राहुल गांधी जी को भी सरकार के खिलाफ खुद को खड़ा करने और देश को अपनी ढृढ छवि दिखाने का अवसर भी लेकर आया है।

    इस आंदोलन में राहुल गांधी जी पूरे विश्वास और धैर्य के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

    ऐसे में राहुल गांधी जी उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव जी के साथ अपनी राजनीतिक छवि को और मजबूत कर सकते हैं ।अखिलेश यादव और राहुल गांधी जी के बीच सियासी तालमेल का फ़ायदा अगले साल उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों में मिलने के आसार हो सकते हैं।

    हालांकि की राहुल गांधी जी को अपनी चुनावी चाल बेहद ही सावधानी के साथ चलनी होगी। बहुत ही समझदारी के साथ राजनीति के नेतृत्व को सफलता में बदलना होगा और देश पर अपनी अमिट छाप बनाने का अवसर नहीं चुकना चाहिए

    प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी जी के धरने-प्रदर्शन के बाद से सरकार ने कांग्रेस पर छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है कांग्रेस को ऐसे आरोपों से विचलित होने की जरूरत नहीं है बल्कि लोकतंत्र अपने उद्देश्यों को हासिल करने का मान्यता प्राप्त वेध जरिया है जिसका इस्तेमाल करने का अधिकार सभी को है और नेता प्रतिपक्ष को भी है

    ये समय राहुल गांधी जी के लिए खुद की छवि और राजनीतिक दृष्टि से सुधरने का अवसर लाया है ऐसे में राहुल गांधी जी को आंदोलन के साथ साथ राजनीति में भी अपने पैर प्रभावी रूप से गाड़ने होंगे और स्वयं को सरकार के खिलाफ ढृढ छवि के साथ खड़ा करना चाहिए।

  • सवाल मशीनी युग का

    अभी कुछ समय पहले ही चीनी स्टार्ट अप मूनशाॅट एआई ने के3 को लांच कर ए आई के वैश्विक परिदृश्य में हलचल मचा दी है ।

    एक तरफ एआई ,डाटा सेंटर ,मार्केट वैल्यूएशन और कैपिटल निवेश में है भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। और दूसरी तरफ मूनशॉट एआई ने नया मॉडल पेश किया है जिससे पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है।

    देखा जाए तो यह मशीनी दुनिया को बढ़ावा देगा और मानव जीवन में सहूलियत मिलेंगी।

    पर क्या यह मशीन अब इंसान के सारे कार्य को अपने हाथ में ले रही है क्या कभी सोचा है यह हमारे फायदे के लिए है या मानव जीवन को चुनौती देने का कार्य करेगी कुछ भी हो मनुष्य को समय रहते स्थिति को समझना होगा।

    देखा जाए तो जून 2026 की चैलेंजर रिपोर्ट जो भर्ती के रुझान पर नजर रखती है उसे पता चलता है कि इस महीने एआई से जुड़ी 14000 से ज्यादा नौकरियों में कटौती की घोषणा की गई थी ।

    नौकरियों की मांग और पूर्ति से पता चलता है शुरुआत से लेकर ऊंचे पदों तक हर स्तर पर रोजगार की मौके कम होते जा रहे हैं ।

    एआई का असर कंपनियां के दावों में भी दिखाई पड़ता है माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला ने कहा कि एआई 30% कोड लिख रहा है। इसी तरह ओरेकल में अपने सालाना रिपोर्ट में बताया ए आई की वजह से 21000 नोकरियां कम हो गई है।

    क्या वाकई में इंसानी काम धीरे-धीरे मशीन संभालने लगेंगी आगे आने वाला भविष्य क्या होगा और क्या हमारा भविष्य सुरक्षित भी है या आने वाले भविष्य के लिए मशीन चुनौती लेकर आएंगी हमें इसको समझना होगा।

  • फास्ट ट्रैक कोर्ट

    विपक्ष और छात्रों का आंदोलन खत्म करने के लिए पीएम मोदी ने बृहस्पतिवार सुबह 9:00 बजे नीट पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन के बारे में कहा है।

    पीएम मोदी ने कहा पेपर लीक मामला कोई मामूली विषय नहीं है लाखों विद्यार्थी और माता-पिता के लिए बेहद पीड़ादायक है । इसके साथ ही उन्होंने कहा छात्रों का 1 वर्ष बर्बाद ना हो किसी सरकार ने पूरी शक्ति का उपयोग करके 22 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा का प्रबंधक किया।

    पीएम मोदी द्वारा फास्ट्रेक कोर्ट के गठन का ऐलान करने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुलगांधी ने सरकार पर शब्दों के बार करते हुए कहा की सरकार ने शिक्षा-व्यवस्था पर कब्जा किया है और युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है और बर्बाद होने में बढ़ावा भी दिया गया हर व्यक्ति को संरक्षण दिया जो इन कार्यों के जिम्मेदार हैं।

    इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बताया छात्रों की मांग साफ हैं ।छात्रों से माफी मांगें , छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो, और सबसे पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना चाहिए।

    पीएम मोदी के नीट पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन का एलान करने के बाद गृहमंत्री अमित शाह की निगरानी में उच्च स्तर की बैठक चलीं।

    दिल्ली हाई कोर्ट ने फास्ट्रेक कोर्ट के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है।

    देश में चारों तरफ से आंदोलन की खबरें बढ़ती ही जा रही है तो ऐसे में पीएम मोदी का नीट पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन बनाना क्या छात्रों का गुस्सा शांत करने में प्रभावी हो सकता है या नहीं पर पिछले कुछ दिनों से छात्रों ने जो आंदोलन किया है उससे यह तो साबित होता है छात्र जब इंसाफ मांगने की जिद पर आ जाएं तो सरकार को भी झुकना पड़ता है।

  • कावड़ यात्रा

    सावन महीना शुरू हो चुका है और सावन महीने में कावड़ यात्रा की बातों के बारे में सुनने में और देखने की अक्सर खबरें आती रहती हैं ।

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा सावन माह की कावड़ यात्रा में सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। कांवड़ यात्रा शांतिपूर्वक हो इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ व सहारनपुर मंडल के पुलिस प्रशासनिक अफसरों के साथ बैठक की ।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कावड़ यात्रा मार्ग पर पुलिस वल होना चाहिए इसके साथ कावड़ यात्रा के प्रमुख मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन द्वारा निगरानी रखने के आदेश दिए।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा है कावड़ यात्रा मार्ग में शराब व मांस की दुकानें बंद रहें व कोई भी चालक नशे की हालत में वाहन ना चलाएं।

    इधर आगरा में मेट्रो के निर्माण कार्य की वजह से एमजी रोड और हाईवे पर लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है इसलिए कांवड़ मेले से पहले मेट्रो के निर्माण कार्य की वजह से हो रही जाम की समस्या को दूर करना पड़ेगा।

    मेट्रो निर्माण कार्य की वजह से होने वाले जाम की वजह से कांवड़ श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना ना करना पड़े इसके लिए भी प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की सही व्यवस्था के निर्देश दिए गए।

    शांति समिति की यह बैठक थी। इसमें कावड़ श्रद्धालुओं की व्यवस्था और कांवड़ यात्रा मार्गो की सुरक्षा की बातचीत हुईं ।

    सावन महीने में श्रद्धालु कावड़ यात्रा में शामिल होकर खुद भी व्यवस्था को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं ।

  • सवाल विपक्षी नेताओं के धरने का

    सोनम वांगचुक जी का अनशन क्या रंग लाएगा ये उस वक्त किसी को नहीं पता था और वही अनशन धीरे-धीरे एक आंदोलन बन जाएगा यह भी किसी ने नहीं सोचा होगा। सोनम वांगचुक के अनशन में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग थी ।

    पर सोनम वांगचुक जी को अस्पताल ले जाने के बाद विपक्ष नेताओं ने संसद में हंगामा खड़ा किया और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की बढ़ते हंगामे की वजह से लोकसभा को स्थगित करना पड़ा।

    नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर छात्रों द्वारा किए गए विरोध में पुलिस द्वारा छात्रों पर हुई कार्यवाही को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका-गांधी के नेतृत्व में कांग्रेसी मंगलवार को प्रधानमंत्री के आवास के बाहर धरने पर बैठ गए।

    हालांकि शाम के वक्त पुलिस द्वारा नेता हटा दिए गए परंतु को धरनास्थल से लोकसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ,राहुल गांधी ,प्रियंका-गांधी,और साथ में समर्थन देने पहुंचे अखिलेश यादव। इन सभी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया ।

    हालांकि सरकार ने कहा कि वह विपक्ष से संसद में चर्चा करने को तैयार हैं । सरकार ने राहुल गांधी पर राजनीतिक रुख़ बदलने का आरोप भी लगाया।

    राहुल जी ने हिरासत के वक्त सोशल मीडिया पर मोदी जी के लिए पोस्ट भी डाला जिसमें उन्होंने लिखा छात्रों को न्याय दिलाने की लड़ाई न रुकेगी और न झुकेगी।

    धरना स्थल पर राहुल गांधी जी एक नए अंदाज में नजर आए उनके चेहरे पर छात्रों पर हुए विरोध को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी साफ़ दिख रही थी।

    कांग्रेस ने सरकार के सामने अपनी पांच मांगे रखी है । कांग्रेस के अनुसार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ,गृहमंत्री अमित शाह का राज्य सभा व लोकसभा दोनों सदनों में बयान , इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच और साथ में छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।

    संसद की कार्यवाही जंतर मंतर पर हुए आंदोलन और छात्रों के साथ हुई लाठी चार्ज के विरोध में और साथ में नीट पेपर लीक मामले में शिक्षामंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर हुए हंगामे की वजह से दूसरे दिन भी नहीं चल सकी।

    सरकार को छात्रों और विपक्ष द्वारा किए आंदोलन को शांति से निपटाने का कोई मार्ग शीघ्र अतिशीघ्र तलाशना होगा । सरकार को नीट पेपर लीक मामले में छात्रों और विपक्ष नेताओं को जवाब भी देना चाहिए।