इंसान के मन मे हर वक्त कोई न कोई विचार चलता ही रहता है कभी-भी खाली नहीं रहता और यह दुनिया के हर इंसान के साथ होता है। जैसे मनुष्य दुनिया में रहता है समाज में रहता है अपने परिवार में रहता है ठीक उसी प्रकार उसके दिमाग में बातें रहती है व्यक्ति अपने दिमाग में ही हर स्थिति और हर व्यक्ति को अपने दिमाग में फिट कर लेता है और उसके साथ बातचीत करने लगता है देखने में मनुष्य ऊपर शांत लगेगा लेकिन उसके दिमाग में जाने किस से बातचीत हो रही होती है।
जब कभी मनुष्य की बेवजह तबियत खराब होती है और वह व्यक्ति डॉक्टर को दिखाने जाता है तो डॉक्टर कहते हैं चिंता कम किया करो डॉक्टर के नजरिए से देखा जाए तो हमारी बेवजह तबीयत बिगड़ने की वज़ह हमारा दिमाग में नकारात्मक बातों का सोचना होता है ऐसे में हर व्यक्ति क्या कहना होता है की दिमाग के ऊपर उसका क्या अधिकार है मतलब की दिमाग को सोचने से कैसे रोकाजा सकता है।
इंसान अगर चाहे तो सब कुछ कर सकता है इंसान को यह नहीं भूलना चाहिए की दिमाग उसके शरीर का एक हिस्सा है ना कि वह दिमाग के कंट्रोल में है। व्यक्ति अगर चाहे तो अपने दिमाग को अपने कंट्रोल में कर सकता है और चिंता और अशांति जैसी स्थिति से बाहर निकल सकता है।
जिस तरह एक किसान अपने खाली खेत में नए बीज बोकर नई फसल को तैयार करता है और अच्छी फसल प्राप्त करता है तो यहां हमें यह समझना होगा कि जब मनुष्य अपनी मेहनत से खाली खेतों को हरा भरा कर सकता है तो क्या वह अपने दिमाग में नए और सकारात्मक विचारों को नकारात्मक विचारों से बदलकर नहीं भर सकता क्या।
अब आप सोचोगे कि यह कैसे हो सकता है कैसे एक व्यक्ति अपने दिमाग से नकारात्मक विचार खत्म करके सकारात्मक विचारों को अपने दिमाग में भर सकता है।
इसके लिए आपको कुछ उपाय करने होंगे जो बहुत ही सरल और आसान है
सोते समय पर
सबसे पहला उपाय यह होगा कि आप जब सोने के लिए अपने बिस्तर पर पहुंच जाते है तो थोड़ी देर आपके दिमाग में जो भी चलता है उस पर ध्यान देने की आवश्यकता है उस वक्त दिमाग में चलने वाली बातचीत को रोक कर कुछ अच्छी बातचीत शुरू करनी होगी यह बातचीत आप से ही जुड़ी होनी चहिए या फिर बीते हुए वक्त की कोई हंसी मजाक से संबंधित बातचीत को दिमाग में जाना होगा और जैसे ही आपको नींद आना महसूस होने लगे तो भी कुछ अच्छा सोचते हुए ही आप सोने की कोशिश करें।
सुबह होने पर
सुबह होने पर हमारा दिमाग अक्सर खाली होता है या अभिषेक सुन्न भी कह सकते हैं ऐसे में अगर आप सुबह सबसे पहले शीशे के सामने खड़े होकर 5 मिनट के लिए खुद को देखते हुए मुस्कुराते रहें और साथ में अपने दिमाग में फिर से बीते समय की अच्छी और हंसी की यादों को याद करें और महसूस करें कि अभी हो रहा है यह बहुत अच्छा तरीका है अपने दिमाग से नकारात्मक विचारों को खत्म करके इसकी जगह सकारात्मक विचारों को जन्म देना।
खान-पान
मनुष्य के दिमाग में नकारात्मक विचारों की वजह व्यक्ति का खान-पान भी होता है यदि कोई भी व्यक्ति अपने सही समय पर खाना नहीं खाता है या फिर उसके खाने में प्रोटीन विटामिन की कमी होती है तो ऐसा खानपान मनुष्य की नकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। कुछ घरों में महिलाएं स्वयं के खान पान पर कोई ध्यान नहीं देती समय पर खाने पीने की आदत ना होने की वजह से स्वभाव की चिड़चिड़ी हो जाती हैं इसलिए मनुष्य को अपने सकारात्मक विचारों को बढ़ाने के लिए समय पर खाने-पीने स्वास्थ्यवर्धक पौष्टिक भोजन खाना खाना चाहिए।
इसी प्रकार और भी छोटे-छोटे उपाय हैं जैसे कि सही समय पर सोने उठना बैठना भी हमारे नकारात्मक विचारों को खत्म करने में सहायक होते हैं इसके अलावा हमें अपनी खुशियों के लिए भी समय निकालना सीखना होगा।
इस प्रकार छोटी-छोटी लगने वाली साधारण सी खुशियां भी हमें बहुत बड़ी खुशी की तरह लगने लगती है और हम अपने खाली दिमाग को खाली खेत की तरह मन चाहे सकारात्मक विचारों से भर सकते हैं और कुछ समय बाद हमारे दिमाग में सकारात्मक विचार स्वयं से निर्मित होने लगेंगे ।