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  • साहस और सोच

    साहस वह होता है जो इंसान को जीवन में आगे बढ़ने और बेहतर बनने की प्रेरणा देता है इस धरती पर कई महान पुरुषों ने समय-समय पर साहस के कार्य किए हैं । कई व्यक्तियों ने उन महापुरुषों से प्रेरणा लेकर साहस के कदम भी उठाए हैं ।

    क्या कभी देखा है एक छोटा बच्चा जो अभी ठीक प्रकार से चलना नहीं सीखा है बार-बार उठना है बार-बार गिरता है और हर बार साहस के साथ फिर से खड़ा हो जाता है । हालांकि बच्चा साहस नामक शब्द को नहीं समझता है।

    इसी प्रकार एक योद्धा साहस के साथ युद्ध लड़ता है बिना हार जीत की सोचे ।

    ऐसे कई उदाहरण हैं जहां हमें साहस का परिचय मिलता है साहस आत्मविश्वास को बढ़ावा देने का कार्य करता है। एक आम इंसान में भी साहस की वजह से कुछ कर गुजरने का जज्बा जन्म लेता है।

    इसी प्रकार मनुष्य की सकारात्मक सोच भी किसी कार्य को करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है किसी भी कार्य करने के पहले ही मनुष्य के मन में उस कार्य के प्रति जिस प्रकार की सोच होगी कार्य भी उसी दिशा में आगे बढ़ने लगता है।

    कहते भी तो हैं मन के हारे हार है मन के जीते जीत।

    किसी भी महापुरुष के जीवन में साहस और सकारात्मक सोच ही‌ दो ऐसे गुण होते हैं जो एक साधारण से इंसान को महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए ‌ प्रेरित करते हैं और भीड़ से अलग एक नई पहचान देते हैं ।

    साहस और सकारात्मक सोच जीवन जीने का एक नया दृष्टिकोण देते हैं ऐसे मनुष्य के सामने जिसमें साहस और सकारात्मक सोच है वह किसी भी परिस्थिति में घबराते नहीं है बल्कि अपनी परिस्थितियों को स्वीकार करके और परिस्थितियों से बाहर निकलने का रास्ता खोजने में जुट जाते है।

    पहले के वक्त में जब संसाधनों की कमी थी या ना के बराबर थो श्रृं उस वक्त में भी इंसान साहस और सकारात्मक रवैया को अपनाते थे और अपने आनेवाली पीढ़ी को भी इन शक्तियों से परिचित कराते थे जिससे कि आने वाले जीवन में मनुष्य कठिनाइयों का सामना भली भांति कर सके ।

    मनुष्य जीवन साधारण जीवन है परंतु इस जीवन में समय-समय पर अच्छी सोच और अच्छे साहस के साथ जीना ही हमारा कर्तव्य है ।

  • असम बाढ़ से बेहाल

    असम में बाढ़ जिसमें 7 जिले भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं ।हर तरफ पानी ही पानी दिख रहा है असम में आई बाढ़ की वजह से लाखों लोग बेघर हो चुके हैं और बहुत से गांव भी जलमग्न हो गये हजारों की संख्या में व्यक्ति राहत शिवरों और सड़कों पर डेरा जमाए हुए हैं ।

    19 जुलाई को असम में आई बाढ़ ने वहां के जनजीवन को प्रभावित किया है ।इस बाढ में काफी लोगों का बहुत-कुछ बर्बाद और कुछ हद तक खत्म भी हो चुका है। स्थिति विनाशकारी बनी हुई है ।असम में इस बार आई बाढ़ बताया जा रहा है कि पिछले 60 सालों से भयंकर है ।

    तबाही के इस मंजर में चारों तरफ बाढ़ का पानी ही दिखाई दे रहा है हालांकि प्रशासन राहत सामग्री और अन्य मदद भेज रहा है । पर ऐसे में व्यक्तियों की रोजमर्रा के जीवन पर काफी फर्क पड़ा है।

    बाढ़ के इस जलप्रलय से असम में चारों तरफ हाहाकार मच रहा है क्योंकि इस बाढ में कुछ मृत्यु हुई हैं बाढ़ मे 600 के लगभग गांव भी प्रभावित हुए हैं।

    असम में हर साल बाढ़ आती है इसकी वजह है ,असम चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है जब बारिश आती है पहाड़ों पर से बारिश का सारा पानी नीचे आने लगता है । यह सारा पानी ब्रह्मपुत्र नदी में आता है परंतु जब नदी का पानी खतरे निशान से ऊपर हो जाता है जिसके बाद सारा पानी गांव और शहरों में पहुंच जाता है और बाढ़ की वजह बन जाता है ।

    बाढ़ का पानी सड़कों और मैदान से होकर घरों में पहुंचता है तो स्थिति और भयाभय हो जाती है ।जिस कारण असम में हर साल क्षेत्रीय लोगों को यह स्थिति देखने को मिलती है और हर साल उन्हें अपने घरों को छोड़कर के अपने जरूरी सामान के साथ राहत शिविरों में बाढ़ से बचने के लिए और मदद की आस में चले जाते हैं।

    पानी में खेत डूबे हुए हैं, घरों में घुसा हुआ कीचड़ मलवा और राहत सामग्री मिलने का इंतजार करते लोग यह दृश्य है असम में आई बाढ़ के वक्त का ।जहां खड़े होकर आप अपने चारों तरफ बर्बाद होते हुए खेत खलियान, घर मकान देखेंगे और यहां तक की किसी-किसी इंसान की पहचान तक खत्म हो चुकी है कुछ लोगों कि फिर से बसने की आस भी बाढ में खत्म हो चुकी है ।

    हालांकि असम में आई बाढ़ की स्थिति पर कुछ हद तक काबू कर लिया गया है‌ पर स्थिति को सामान्य होने में अभी कुछ वक्त लग सकता है ब्रह्मपुत्र नदी में पानी का स्तर भी सामान्य होने में समय लगेगा । असम में आई बाढ़ में स्थानीय लोग भी एक- दूस‌रे की मदद कर रहे हैं और इंसानियत का परिचय भी दे रहे हैं ।

    हर बार जब भी चुनाव होते हैं तो नेताओं द्वारा बड़े-बड़े वादे किए जाते लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद कोई भी वादे क्यों नहीं पूरे किए जाते ।हालांकि प्रशासन द्वारा बाढ़ से परेशान हुए लोगों को राहत सामग्री और इसके अलावा बाढ़ में हुए नुकसान की भरपाई भी कराई जाएगी इसके अलावा और भी कई सहायता मुहैया कराई जा रही है। पर सवाल यह है कि प्रशासन समय रहते इस आने वाली आपदा से निपटने को तैयार क्यों नहीं होता ।

  • सफलता का बीज मन में

    कोई भी मनुष्य तब तक हारा हुआ नहीं कहलाता जब तक कि वह प्रयास करना ना छोड़े परंतु जब मनुष्य किसी कार्य के प्रति मन में ही कार्य के असफल होने की सोचता है तो उसकी हार भी निश्चित है ।इसलिए किसी भी कार्य की शुरुआत में ही आपका मन आपका मस्तिष्क कार्य के प्रति जैसी भावना रखेगा कार्य को उस प्रकार की ही गति मिलती है।

    मनुष्य की सबसे बड़ी असफलता उसके मन से ही मिलना शुरू होती है कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो कि अपने जीवन काल में कभी भी असफल ना हुआ हो परंतु किसी भी व्यक्ति के मन में असफल होने का विचार उसके असल जीवन की सफलता में असफलता का बीज बोने का कार्य करता है।

    हम में से कई लोग असफल होने के बाद यह मान बैठते हैं कि सारे रास्ते बंद हो चुके हैं और अब कुछ नहीं हो सकता और यही सोच कर प्रयास करना भी छोड़ देते हैं तो ऐसे व्यक्ति स्वयं अपने बेहतर भविष्य को बनाने के सारे रास्ते बंद कर चुके होते हैं।

    आपने देखा होगा हमारे आसपास में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कि हार जाने के बाद भी हार को स्वीकार नहीं करते और आगे बढ़ने का निरन्तर प्रयास करते रहते हैं और अपने बेहतर भविष्य को बनाने उसके लिए हर प्रयास को करते हैं ।

    वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इस सोच के होते हैं जो कि कर्म करते ही फल मिलने की चाहत रखते हैं वे चाहते हैं कि बीज होते ही फल मिल जाए ऐसे व्यक्ति वक्त का इंतजार नहीं करते ऐसे व्यक्तियों में सवर और संयम की कमी होती है ।

    हर मनुष्य सफल होना चाहता है लेकिन आपके सामने जब लक्ष्य है तो लक्ष्य के प्रति अपने मन में भी सफलता का विश्वास बनाए रखना जरूरी है आपको यह भी समझना होगा सफलता कभी भी एक दिन में नहीं मिलती और एक प्रयास में अगर आप असफल हो जाते हैं तो आपको हार स्वीकार करके आगे बढ़ना होगा क्योंकि जब तक आपके अंदर जीतने और सीखने की इच्छा है तब तक आपके सफल होने की संभावनाएं भी जीवित है।

  • सवाल बदलती तकनीक के साथ विचार बदलना सही है।

    तकनीक हमेशा से बदलती रही हैं जिस तरह इंसान का पहनावा, बोलचाल रहन-सहन साधारण शब्दों में कहा जाए तो जीवन शैली बदलती है इस तरह तकनीक भी बदलती हैं ।

    वर्तमान समय में मनुष्य आज भी परेशानी और भविष्य की चिताओं में गिरा रहता है और वर्तमान जीवन के आनंद को नहीं ले पाता जबकि मनुष्य का जीवन बहुमूल्य होता हैं। हम बीते हुए कल को तो नहीं बदल सकते पर आने वाले वक्त और वर्तमान को अपनी सोच के साथ बदल सकते हैं।

    वर्तमान और भविष्य को बदलने से पहले या बेहतर बनाने से पहले मनुष्य की अपनी सोच को बदलना होगा । पुराने वक्त की सोच से बाहर निकाल कर अपने दिमाग में चल रही परेशानियों से निपटना होगा और जीवन के प्रति सकारात्मक रवैया अपनाना होगा ।

    वर्तमान के मनुष्य के पास बदलती तकनीक के बहुत-से संसाधन है जिससे व्यक्ति के पास समस्याओं के समाधान भी होते हैं ‌ इस प्रकार व्यक्ति अपनी सोच अपने नजरिया को बदल सकता है ।

    कभी-कभी हमारी सोच रूढ़ीवादी सोच ,पुरानी सोच होती है जिसमें हम खुद को बदलने से पहले समाज क्या कहेगा, चार लोग क्या कहेंगे इस तरह की नकारात्मक बात सोचते रहते हैं ।पर सच तो यह है कि आज के वक्त में किसी को इतनी फ़ुर्सत नहीं है कि वह आपके बारे में सो‌चे‌ इसलिए हमें इस तरह की नकारात्मक बातों से बाहर निकलना होगा और अपने पुराने विचारों को भी खत्म करना होगा।

    जब मनुष्य मस्तिष्क में नकारात्मक विचार ही बनेंगे तो हमारा भविष्य हमारा वर्तमान बेहतर कैसे बन सकता है मनुष्य मस्तिष्क में हर वक्त शिकायत तुलना किसी को बेइज्जत करना, जवाब देना खुद के बारे में गलत सोचते रहना यही सब चलता रहता है। ऐसे में मनुष्य के पास जो भी बेहतर अवसर होते हैं जीवन को बदलने के प्रति व्यक्ति उन्हें भी लगातार अनदेखा करता रहता है । यह सब नकारात्मक सोच की वजह से ही होता है।

    अपने आने वाले जीवन को बेहतर बनाने के लिए हमें चाहिए कि अपने जीवन के प्रति पुराने विचार सोचना छोड़ दें और नए विचारों को सोचने समझने की कोशिश करें क्योंकि हमें अपने जीवन को बेहतर बनाना है तो हमें अपने विचारों को भी बेहतर बनाना होगा ।

    ऐसे में व्यक्ति के दिमाग में एक सवाल कौंधता है क्या बदलती तकनीक के साथ विचार बदलना जीवन शैली बदलना कहां तक उचित है तो ऐसे में मेरा समझना है की बदलती तकनीक के साथ और नई सोच के साथ आगे बढ़ना जीवन में घाटे का सौदा ना के बराबर होगा ।

    नई सोच के साथ बदलती तकनीक के साथ मिलकर चलना इंसान के वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनाने का और उज्जवल भविष्य के नए रास्तों को खोलने का माध्यम है।

  • सवाल खोज मनुष्य मस्तिष्क की

    मनुष्य जीवन सदियों से हमेशा कुछ खोजते हुए ही आया है क्योंकि मनुष्य के मन मे खोजने की क्रिया निरंतर चलती रहती है और जिज्ञासु प्रकृति का स्वभाव ही मनुष्य जीवन है ।

    कभी-कभी मनुष्य की खोज अपने आसपास होती है तो कभी-कभी खोज करने के लिए अपने मन के अंदर की यात्रा पर निकल पड़ता है। वह जानना चाहता है अपने कई सवालों के जवाब जैसे की क्या ईश्वर है, इस ब्रह्मांड को किसने रचा जीवन क्या है मृत्यु क्या है अच्छे बुरे कर्म क्या हैं और क्या बाकई कर्मों के हिसाब से फल मिलते हैं । ऐसे कई अनगिनत सवाल मनुष्य मन में उठते रहते हैं।

    कभी-कभी मनुष्य ब्रह्मांड की शक्ति को भी समझना चाहता है मनुष्य सूरज ,चंदा ,तारे और नीले आकाश को व गृहों की गति को समझना और जानना चाहता है और इन रहस्यों को उजागर करना चाहता है।

    कभी तो मनुष्य खुद से ही सवाल करता है और उनके जवाब भी खुद से देता है इसलिए सबसे पहले मनुष्य को अपनी खुद की पहचान को समझना होगा ।

    जैसे-जैसे हम स्वयं से सवाल जवाब करते जाते हैं तो हमें खुद से ही ब्रह्मांड की रहस्यमई शक्तियों का ज्ञान होता जाता है। क्योंकि मानव मस्तिष्क के पास ढेरों शक्तियां हैं।

    इसी प्रकार मनुष्य अपने अंदर मन की यात्रा में भी बहुत सारे सवालों का जबाब आप प्राप्त कर लेता है और उसे ज्ञात हो जाता है जीवन मरण और अच्छे बुरे कर्म क्या है और इन कर्मों से प्राप्त फल क्या है।

    जितना हम अपने अंदर खोज करते हैं यह खोज उतनी ही और बढ़ती जाती है ।हैरत तो तब होती है कि यह खोज मनुष्य की कभी खत्म नहीं होती है।

    देखा जाए तो यह खोज अगर मनुष्य के मस्तिष्क में न आती तो शायद आज भी मनुष्य चांद पर अपने कदम न रख पाता और अंतरिक्ष के,ब्रह्मांड के असीमित ज्ञान से भी वंचित रह जाता ।

  • कितना पोषण है हमारे खाने में

    हमारे शरीर को कार्य करने में ऊर्जा चाहिए होती है और वह ऊर्जा हमें हमारे खाने से ही मिलती है ।इस बात को हम अच्छे तरीके से जानते हैं ,पर क्या कभी सोचा है पेट भरने के नाम पर हम जो भी खा रहे हैं क्या वह हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है।

    जीवन की बदलती शैली के साथ-साथ हमारा खान पान भी पहले से बहुत बदल चुका है खाने के नाम पर हम हर उस खाने को खाते हैं जिसमें स्वाद तो हो पर शायद पोषण ना के बराबर होता हो।

    आज के वक्त में जंक फूड का काफी चलन है। खाने में जंक फूड लगभग हर बच्चे की पहली पसंद बनता जा रहा है जैसे चिप्स ,बर्गर, पिज्जा, पेस्ट्री। जंक फूड हेल्थ के लिए फायदेमंद नहीं है बल्कि बीमारी की वजह बनती हैं क्योंकि जंकफूड में पोषण कम और कैलोरी ज्यादा होती है और इसे नियमित खाने से शरीर में बीमारी होने का खतरा भी रहता है।

    हमारे भोजन में सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट ,बसा ,प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का नियमित संतुलन ही हमारे भोजन को संतुलित बनाता है जिससे हमारा शरीर दिन भर के कार्य के लिए ऊर्जा अवशोषित करता है।

    वक्त है आज कि भाग-दौड़ वाली ज़िंदगी में अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने की और अपनी खाने की थाली में ध्यान देने की ।स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए खाने की थाली में पोषित खाने को ही जगह दें। अगर समय रहते हमने पोशित और स्वस्थ भोजन को अपने खानपान में शामिल नहीं किया तो शायद परिणाम हमारे अनुकूल न हो।

    खाद एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार आज के वक्त में दुनिया के लगभग 2.69 अरब व्यक्ति पौष्टिक आहार नहीं ले पा रहे । इसका मतलब कि पूरी दुनिया में हर तीन व्यक्ति में से एक व्यक्ति पौष्टिक आहार की पहुंच से दूर है। आने-वाले समय में अगर यही स्थिति रही तो दुनिया में 51 से 52 करोड़ व्यक्ति लंबे वक्त तक कुपोषण का शिकार हो सकते हैं ।

    निचले स्तर के लोगों को पेट भरने के लिए सस्ते अनाज आसानी से मिल जाते हैं जिस खाने में कोई पोषक तत्व नहीं होता है।पौष्टिक खाना जो कि शरीर के विकास में सहायक होता है महंगा होता है और गरीब लोगों की पहुंच से दूर होता है

    इस महंगाई की वजह कृषि से लेकर उपभोक्ता तक फैली लंबी और असंतुलित खाद आपूर्ति श्रृंखला है। जो कि अपने फायदे को देखते है

    सोचो जब कुपोषण हो जाएगा तो हमारे देश का भविष्य भी क्या होगा। इसलिए वक्त रहते पोषित खाने के लिए कोई ठोस कदम उठाने होंगे जिससे हमारी आने‌ वाली पीढ़ी भी पोषित हो और देश का भविष्य भी उज्जवल हो ।

  • सवाल कहां से आया नमक।

    नमक खाने के स्वाद को बढ़ाता है । मसालों में नमक के बिना अधूरापन है। चटपटे खाने की पहचान भी नमक से ही होती हैं हमारे खाने से लेकर चटपटी चाट तक नमक की पहुंच है । किचन से लेकर खाने की मेज तक नमक अपनी जगह बनाए हुए है एक चुटकी नमक खाने में स्वाद ले आता है और बिना नमक खाने का स्वाद अधूरा रहता है ।पर क्या कभी सोचा है यह नमक हमारी थाली तक कहां से आया ।

    कितना पुराना है नमक और सबसे पहले नमक की पहचान किसने की‌ ऐसे कई अनगिनत सवाल है नमक को लेकर जो हमारे मन में आते रहते हैं।

    नमक के प्रकार

    वैसे तो नमक कई प्रकार का है। जिसमें से तीन प्रकार के नमक महत्वपूर्ण हैं । समुद्र से प्राप्त सादा नमक , सेंधा नमक, काला नमक।

    आयोडीन युक्त नमक (सादा नमक)

    समुद्री नमक (सी साल्ट ) समुद्र से निकला नमक जो की हमारे रोज के खाने में डाला जाता है। समुद्र से निकलने के बाद यह नमक सुखाया जाता है नमक से पानी सूखने के बाद यह नमक कंकड़ जैसा हो जाता है उसके बाद इस इस नमक को पीसा जाता है और रिफाइन करके खाने योग्य तैयार किया जाता है । नमक में आयोडीन भी मिला होता है जो कि हमारे शरीर के अच्छे विकास के लिए जरूरी होता है।

    सेंधा नमक (लौहौरी नमक पहाड़ी नमक)

    सेंधा नमक इस नमक को हम उपवास के वक्त प्रयोग में लेते हैं यह नमक देखने में हल्का गुलाबी होता है । हालांकि इस नमक में आयोडीन नहीं होता है। लेकिन सेंधा नमक में काफी मिनरल्स पाए जाते हैं जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है। यह नमक पहाड़ से प्राप्त होने की वजह से पहाड़ी नमक भी कहलाया जाता है।

    काला नमक

    काला नमक कहां से आता है ऐसा अक्सर हम सोचते हैं काला नमक प्राकृतिक तरीके से नहीं पाया जाता बल्कि उसको तैयार किया जाता है ‌। काला नमक तैयार करने के लिए एक खास प्रकार की भट्टी तैयार की जाती है भट्टी में आग लगाई जाती है और उसमें कई सारे खाली मटके रखे जाते हैं इन खाली मटको में समुद्र का खड़ा नमक डाला जाता है और उसके साथ छोटी हरण, बड़ी हरण ,सूखा आंवला और बबुल की छाल इत्यादि पदार्थ डाले जाते हैं ।

    काला नमक खाना पचाने में फायदेमंद है। काला नमक ब्लड प्रेशर में भी फायदेमंद बताया गया है। काला नमक खाने से पाचन क्रिया ठीक रहती है ।

    नमक हमारे खाने का स्वाद बढ़ाता है यह तो हम सभी जानते हैं परंतु नमक ज्यादा खाना भी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है इसलिए हमें अपनी सेहत का भी ख्याल रखना होगा इसलिए स्वास्थ्य के अनुसार ही नमक का प्रयोग किया जाए तो बेहतर होगा ।

  • सवाल पीओके के जनांदोलन का

    पीओके में पिछले कुछ सप्ताह से जन आंदोलन बढ़ता जा रहा है । पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू -कश्मीर(पीओके) इलाके में जारी जन आंदोलन अब सिर्फ स्थानीय असंतोष का मामला नहीं रहा बल्कि पाकिस्तान के उस नेरेटिव को चुनौती देने लगा है जिसे इस्लामाबाद दशकों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पेश करते रहा है ।

    यह जन आंदोलन स्थानीय मामला नहीं रहा बल्कि पाकिस्तान के शासनतंत्र ,आर्थिक नीतियों और लोकतांत्रिक भरोसे पर भी आवाज उठा रहा है।

    पीओके जन आंदोलन होने की वजह है जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) जिसमें विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की चर्चा जो की 1947 में पाकिस्तान गए जम्मू कश्मीर शरणार्थियों के लिए सुरक्षित है।

    परन्तु पाकिस्तान सरकार ने इस आंदोलन में शामिल आंदोलनकारियों से शांतिपूर्ण संवाद करने की जगह दमन का रास्ता अपनाया है । यहां तक कि जनांदोलन में नेता और समर्थकों की र्गिरफ्तारियां हुई है। इंटरनेट मोबाइल सुविधाओं पर पाबंदी लगा दी गई है । पीओके में जारी जन आंदोलन क्षेत्रों में खानेपीने के पदार्थों व दवाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया है इसके अलावा पुलिस फोर्स व अर्ध सैनिक बल को तैनात कर दिया गया है।

    पाकिस्तान जीएएसी के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करना चाह रहा है ताकि आंदोलन को जड़ से खत्म किया जा सके। आंदोलनकारी के आरोप लगाने से इस्लामाबाद का असली चेहरा स्पष्ट हो चुका है।

    आंदोलनकारी भारत से मानवीय मदद मांग रहे हैं दशकों से वैश्विक मंचों पर कश्मीर के लोगों के मानवाधिकार का पैरोकार बनने का दावा करने वाला पाकिस्तान अपनेअधीन के क्षेत्र के लोगों के अधिकारों को कुचल रहा है।

    भारत में भी कहा है की रेडियो पीओके में जारी जन आंदोलन पाकिस्तान द्वारा दशकों से किये जा रहे राजनीतिक शोषण मौलिक अधिकारों के दमन और प्रशासनिक अत्याचार का परिणाम है।

    इतिहास बताता है की जन आकांक्षाओं वह कुछ समय के लिए अनसुना किया जा सकता है दबाया जा सकता है पर जन आकांक्षाओं को पूरी तरह स्थाई रूप से खत्म नहीं किया जा सकता।

    किसी भी शासन का स्थिर रहना जनता के विश्वास और लोकतांत्रिक भागीदारी होने से ही होता है।

  • बारिश से मन खुशहाल पर सड़क बेहाल

    सावन महीना लग चुका हैं और श्रद्धालु कांवड़ यात्रा भी शुरू करने की तैयारी में है ।मौसम भी बारिश का है जिसमें उमस से छुटकारा मिलता है और चारों तरफ हरियाली ही हरियाली देखने को मिलती है मन खुश हो जाता है पर बारिश के साथ कुछ समस्याएं भी आती हैं।

    उत्तरप्रदेश मैं आगरा हाईवे पर एमजी रोड पर अभी कुछ दिन पहले आई बारिश की वजह से जगह-जगह पानी भर गया जिसकी वजह से जाम लग गया और 100 व200 मीटर दूरी तय करने में ही घंटों लगे।

    इधर आईएसबीटी से सिकंदरा तक मेट्रो का निर्माण कार्य चल रहा है जिसकी वजह से सर्विस रोज और हाईवे के डिवाइडर पर बैरीकेडिंग लगाई है ।हाईवे पर नाले चौक होने की वजह से बारिश के पानी को निकासी नहीं मिलती और जलभराव की स्थिति हो जाती है जिससे यातायात बाधित होने लगता है। एएक

    बारिश के वक्त में यह स्थिति लगभग पूरे आगरा शहर में देखने को मिलती है । जिस वजह से जाम लग जाता है यातायात व्यवस्था विगड़ती है ,शहरवासियों को इस समस्या से जूझना पड़ता है।

    हर बार वही बारिश और वही परेशानी ये हाल आगरा का ही नहीं बल्कि बारिश में देश के हर शहर में यह स्थिति देखी जा सकती है। मानसून के समय में वही दृश्य आंखों के आगे आ जाते हैं जिसमें सड़कें जलमग्न, और फिर सड़कों पर वाहन का फंसना पैदल चलने वाले राहगीरों की परेशानी व यातायात बाधित होना। हर बार मानसून में अमूमन यही समस्याएं देखने को मिलती हैं। इस सब की वजह से जान -माल का भी नुकसान हो जाता है।

    पहाड़ी क्षेत्रों मे मानसून के वक्त में स्थिति और भी भयाभय हो जाती है और एक बहुत बड़े पैमाने पर जान -माल को नुकसान होने का खतरा भी रहता है। हालांकि सरकार राहत और बचाव कार्य के लिए सेवा को वहाल करती है। बाढ़ संभावित क्षेत्रों मे स्थाई निर्माण पर रोक भी लगाई जाती है । पर मानसून के खत्म होने के बाद स्थाई लोग बाढ़ संभावित क्षेत्रों मे फिर से बसने लगते हैं और फिर से मानसून में समस्या का चक्र दोहराया जाता है।

    बारिश के मौसम में अधिकतर ऐसी समस्या देखने और सुनने मिलती हैं तो ऐसे में इन समस्याओं से सरकार कोई भी सबक लेना चाहिए । और समस्या निवारण हल ढूंढ़ने चाहिए इसके साथ ही शहरवासियों को भी मानसून के वक्त में समझदारी दिखानी चाहिए ।

  • सबक नीट पेपर लीक मामले से

    अभी हाल ही में जंतर मंतर पर छात्रों और सीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा हुए आंदोलन में हमें बहुत कुछ देखने को और सीखने को मिला और काफी अनुभव भी मिला साथी ही एक बहुत बड़ा सबक भी मिला है।

    संसद भवन के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव और जिसकी वजह से मानसून सत्र का पहला दिन हंगामे की वजह से संसद का स्थगित होना राजधानी में लोकतंत्र के दो दृश्य और दोनों ही चिंताजनक स्थिति में दर्शाते हुए दिखाई दिए ।

    यह समझने में समस्या है कि नीट पेपर लीक मामले में धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफे को लेकर छात्रों की व्यापक आक्रोश और उस पर सवार विपक्ष राजनीतिक दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देना राजनीतिक मजबूरी का परिणाम है या राजनीति का एक नया अध्याय शुरू हो गया है।

    आवश्यकता है परीक्षा सुरक्षा को लेकर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए और नीट पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन किया उसमें पारदर्शिता भी जरूरी क्योंकि प्रश्नप्रत्र की रक्षा करोड़ों युवा छात्रों के विश्वास की रक्षा है।

    नीट प्रश्न पत्र लीक मामले को लेकर छात्र और युवाओं में बढ़ता आक्रोश और विरोध-प्रदर्शन सरकार द्वारा तनाव कम करने की दिशा में पहल करना और सरकार की कोशिश नाकाम होना भी स्वयं में एक बड़ा प्रश्न है क्या जेन जी और छात्रों की बीजेपी सरकार से उम्मीद खत्म हो चुकी है।

    संसद के अंदर भी स्थिति निराशाजनक ही है जब सदन में सार्थक बहसों के स्थान पर नारेबाजी होने लगे और हंगामे की वजह से सदन का स्थगन की भेंट चढ़ना ऐसे में लोकतंत्र कमजोर सा दिखाई दे रहा है ।

    बीते समय में यह सब कुछ हमने देखा और साथ में हमने देखा कि जब सरकार अपनी मनमानी करें तो विपक्ष, छात्र और गुस्साए लोगों द्वारा साथ मिलकर आंदोलन करना, संसद को न चलने देना इस प्रकार के अनैतिक कार्यों की वजह से संतुलन बिगड़ा है।

    ऐसे में सरकार को संसद में विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर देना चाहिए और विपक्ष को भी विरोध करने की भूमिका में न रहकर सरकार के साथ सदन के सफल संचालन की जिम्मेदारी में दायित्व निभाना चाहिए।

    दूसरी तरफ ऐसी परीक्षा व्यवस्था का निर्माण करना चाहिए जहां परीक्षा से जुड़े किसी भी अव्यवहारिक तत्व का पकड़ा जाना निश्चित हो जिस देश की परीक्षा प्रणाली पर युवा छात्रों को भरोसा मिले।