धरती पर सभी जीव-जंतु और प्राणियों में मनुष्य का जीवन संसार में एक ऐसा जीवन है जो जीवन ही नहीं जीता बल्कि अपने आस्तित्व के होने और न होने पर भी सवाल जवाब करता है और इस पर चर्चाएं भी करता है ।मनुष्य मन कभी-कभी अपने दिमाग में भी अपने जीवन से जुड़े कई सवालों का जवाब ढूंढने की तलाश में रहता है।
इस धरती पर लाखों करोड़ों किस्म के जीव-जंतु है जिनमें से मनुष्य ही अपने जीवन के जन्म और मरण के बारे में जानता है इसलिए शायद मनुष्य जीवन जीव जंतुओं के जीवन से अलग जीवन है।
मनुष्य और जीव-जंतुओं की तरह सिर्फ खाने को ही अपना जीवन नहीं समझता बल्कि अपने जीवन को बेहतर तरीके से जी सके इसके लिए योजना बनाता है व्यवस्थाएं करता है।
और शायद जीवन मरण को जानने के तत्पश्चात् ही मनुष्य ने आगे के भविष्य को बेहतर करने के लिए नई-नई खोज करना सीखा। इन खोजों में मनुष्यों ने स्वयं के जीवन में अचानक आई आपदाओं से लड़ना भी सीखा और इसके साथ जीवन की हर घटना से सबक भी लिया।
मनुष्य के पास सब कुछ होने के बावजूद मनुष्य खुश रहना नहीं सीख पाया हर वक्त भागते रहना ही जीवन बन चुका है।
जीवन क्षणभंगुर है यह जानने के बाद भी मनुष्य अपने जीवन को नहीं जीता बल्कि दूसरे के जीवन में हो रही घटनाओं में शामिल होकर अपने समय को बर्बाद करता रहता है ।
मनुष्य हर वक्त भविष्य की बेहतर योजनाओं में ही फंसा रहता है तो कभी बीते कल में हुई घटनाओं में खो जाता है इस तरह मनुष्य वर्तमान को जीना समझ नहीं पता।
कुछ पल के लिए अगर मनुष्य यह सोचे कि वाकई में वह वही जीवन जी रहा है जो कि उसे जीना चाहिए तो शायद उसके अंतर मन से जवाब असंतुष्टि का मिलेगा क्योंकि हम अपने जीवन को दूसरों को खुश करने के लिए या दिखावे के लिए जी रहे होते हैं जबकि इस सत्य से मनुष्य भली भांति परिचित है कि हर व्यक्ति के पास जीवन की सीमा तय है तो क्यों न व्यक्ति को अपना जीवन जीने में ही आनंद लेना सीखना होगा।
जिस तरह से हर सुबह सूरज निकलता है और शाम होने पर अस्त भी हो जाता है ठीक उसी प्रकार इंसान का जीवन भी जन्म लेकर धीरे-धीरे मरण की और बढ़ता है इस जीवन मरण की सीमा को समझकर व्यक्ति अपने जीवन को मूल्यवान बन सकता है ।
मृत्यु सत्य को स्वीकार कर लेने से मनुष्य का जीवन के प्रति नजरिया बदलने में भी आसानी होगी और यहीं से मनुष्य को आत्मज्ञान की प्राप्ति भी मिलने लगती है।
आत्मज्ञान प्राप्त करने का एक और साधारण सा तरीका है रोज सुबह यदि व्यक्ति कुछ क्षणों के लिए आंख बंद करके और मौन होकर ध्यान करता है तो भी उसे धीरे-धीरे आत्मज्ञान मिलने लगता है
मनुष्य को जब आत्मज्ञान धीरे-धीरे प्राप्त होता है तो वह मनुष्य जाति और जीव जंतुओं के प्रति निस्वार्थ सेवाभाव रखने लगता है और सच्ची शांति महसूस करने लगता है।
आत्मज्ञान का मतलब मनुष्य के स्वयं के जीवन को लेकर नहीं है बल्कि सम्पूर्ण मनुष्य जाति और जीव जंतुओं को प्रति है। आत्मज्ञानी व्यक्ति मनुष्य के बीच ऊंच नीच, उच्चजाति निम्न जाति जैसे भेदभाव को नहीं रखता मैं मनुष्य को सिर्फ मनुष्य ही समझता है ना कि किसी विशेष धर्म का।
आजकल के वक्त में मनुष्य स्वार्थ से भरा जीवन जीने लगा है जिसमें वह सिर्फ अपने ही भलाई का अवसर ढूंढता रहता है और साथ में अपने सगे संबंधियों का बुरा सोचता रहता है।
मनुष्य के पास महंगे से महंगे संसाधन होने के बाद भी मनुष्य अपने अंतर मन से शांति महसूस नहीं कर पाता हर वक्त कोई न कोई चिंता उसे सताती ही रहती है।
खुद को खोज लेना भी मनुष्य के लिए आत्मज्ञान कहलाता है खुद को खोज लेने वाला व्यक्ति कभी भी किसी जीत के प्रति प्यास महसूस नहीं करता और अगर उसके पास कुछ ना हो तो भी वह व्यक्ति परेशानी या चिंता महसूस नहीं करता ऐसा व्यक्ति अपने जीवन के हर पल में आनंद ही आनंद लेता है।
सही मायने में सच्चा आत्मज्ञानी व्यक्ति या स्वयं को खोज लेने वाला व्यक्ति ही अपने जीवन को बेहतर तरीके से समझकर कृत्रिम दुनिया के सुख और सच्चे सुख में अंतर को समझ लेते हैं।
यदि मनुष्य के अंदर कोई जीत प्राप्त करने की चाहत होती है और उस जीत को हासिल करने के बाद मनुष्य एक दूसरी मंजिल को हासिल करने की दौड़ में लग जाता है एक प्रकार से मनुष्य इस दौड़ से कभी संतुष्ट नहीं होता और इस वजह से वह जीवन की सच्ची शांति महसूस नहीं कर पाता।
मनुष्य अपनी मेहनत और लगन से सब कुछ हासिल कर लेता है परंतु इस सब के बाद भी अंदर से खालीपन महसूस होता रहता है जो की साधारण मनुष्य इस खालीपन की वजह को नहीं समझ पाते।
जीवन के अर्थ को समझने वाले व्यक्ति अपनी हर स्थिति में संतुष्ट रहना जानते हैं ऐसे लोगों को फर्क नहीं पड़ता कि वे कितने लोगों से पीछे है या उनके पास कोई भी बड़ी उपलब्धि नहीं है।
जिस दिन मनुष्य यह समझ जाएगा की मन की शांति के लिए महंगे संसाधन की जरूरत नहीं होती बल्कि सच्चा सुख दूसरों की मदद करने में व जीव-जंतुओं की रक्षा करने में है तो वह व्यक्ति व्यर्थ की परेशानियों से बाहर निकल आयेगा ।