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  • छात्रों का आंदोलन जंतर मंतर पर

    सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से पुलिस द्वारा ले जाने के बाद से ही जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों का आंदोलन तेज होने लगा जिसे काबू में करने के लिए दिल्ली पुलिस और फोर्स को प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज पथराव के साथ आंसू गैस के गोले भी दागने पड़े ।

    संसद में भी पेपर लीक और चढ़ावा चोरी और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष ने सरकार को घेर लिया और जोरदार हंगामा भी किया जिस कारण लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा ।

    लगभग पूरे देश में जंतर मंतर पर हो रहे प्रदर्शन को लेकर चर्चाएं हैं ऐसे में सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने सरकार को खरी खोटी सुनाई ।

    संसद भवन के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुए टकराव में कई मासूम छात्र घायल भी हुए। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर आंसूगैस के गोले भी छोड़े गए।

    इस हंगामे के बीच अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने कहा की अभी उनका अनशन जारी रहेगा । सोनम वांगचुक ने अभिजीत दिपके से अनशन खत्म करने का आग्रह भी किया ।

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के हंगामे से न संसद चल सकी और संसद भवन में स्थित अमित शाह के कार्यालय में गृहमंत्री अमित शाह के साथ-मंत्रियों की बैठक भी चली । हालांकि बैठक में हुई बातचीत का कुछ पता न चल सका।

    जंतर-मंतर पर हजारों छात्र ,सामाजिक कार्यकर्ता, विपक्ष दल से नेताओं ने इस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों का साथ भी दिया ।

    आखिर सरकार को प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चहिए ना कि संवाद को तकरार में बदलना चाहिए । जब जनता की सुनवाई नहीं होती तो आक्रोश बढ़ता ही जाता है ।जैसे कि एक अनशन का कितना बड़ा बवाल हो गया आखिर इसमें गलती किसकी है शायद सरकार की तरफ से शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत न करना और बिना बताए सोनम वांगचुक जी को सुबह-सुबह उठा कर ले जाना कि प्रदर्शनकारियों को भड़काना आग में घी डालने जैसा काम कर गया ।

  • आखिर कहां ले गई पुलिस सोनम वांगचुक को।

    आखिर सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को पुलिस सुबह-सुबह उठाकर कहां ले गई और जंतर मंतर पर उठाते वक्त सफेद चादर से पर्दा लगाने की क्या जरूरत पड़ी क्या सोनम वांगचुक की कोई फोटो उठाते वक्त न ली जा सके इसलिए क्या सोनम वांगचुक को उठाने के बाद जंतर मंतर पर जारी हड़ताल को रोकने के लिए यह सब किया गया क्या वाकई अब अनशन खत्म हो गया ।

    सोनम वांगचुक को जबरन पुलिस द्वारा ले जाने के बाद अभिजीत दिपिके ने हड़ताल को जारी रखने विचार बना लिया है और भूख हड़ताल पर बैठ भी गए हैं।

    आखिर हमारा लोकतंत्र इतना कमजोर क्यों होते जा रहा है ।कभी जंतर मंतर पर विरोध करने के लिए, अनशन के लिए ,हड़ताल के लिए जो बैठते तो उस वक्त की सरकार उनकी परेशानियां सुनती समाधान ढूंढती और अनशन को खत्म कराने की कोशिश की जाती थीं। पर अब ऐसा नहीं होता।

    जंतर मंतर से पुलिस द्वारा जबरन सोनम वांगचुक को ले जाने के बाद वांगचुक की पत्नी गीतांजलि का कहना है कि बिना उनकी सहमति के वांगचुक जी का इलाज ना किया जाए ।

    दूसरी तरफ पुलिस उपायुक्त (नई दिल्ली)का कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर और बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    सफदरजंग अस्पताल से भी सोनम वांगचुक की तबीयत का हवाला देते हुए बताया गया है उपवास की वजह से शरीर में कमजोरी आने के कारण उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है ।

    सोनम वांगचुक को उठाने कि वजह चाहे कुछ भी हो पर इस तरह सुबह 7:30 बजे बिना किसी को सूचित किए और पुलिस द्वारा जबरन उठाते वक्त सफेद चादरों की दीवार खड़ी करने का आखिर क्या मतलब था क्यों नहीं किसी को उस वक्त तस्वीर लेने दी गई आखिर इस सब के पीछे क्या वजह है ।

  • सवाल संघर्ष से निकलने का रास्ता ढूंढना

    इस पृथ्वी पर जब से मनुष्य जाति में जन्म लिया है तब से हर व्यक्ति ने अपने जीवन में कभी ना कभी तो संघर्ष देखा होगा।

    मानव जीवन में संघर्ष आना स्वाभाविक है पर मनुष्य इन संघर्षों को देखकर भागता है क्योंकि मनुष्य जन्म से ही सरल जीविका जीता रहा है और सरल जीविका ही जीना चाहता है । इसीलिए संघर्ष को देखकर मनुष्य मन घबरा जाता है।

    मैंने भी अपनी जिंदगी में थोड़े बहुत संघर्ष देखे है। यह संघर्ष हमें जीवन भर याद रहते हैं और साथ ही साथ आने वाले जीवन में हमें संघर्ष से बाहर निकलने का तजुर्बा भी देते हैं।

    संघर्ष में रहते हुए व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है और उसे कई ज्ञान के पाठ भी पड़ाता है । संघर्ष के साथ रहते हुए मनुष्य प्रतिभाशाली भी बनता है।

    हर महान व्यक्ति ने अपने जीवन में संघर्ष देखा है पर इन महान व्यक्तियों ने संघर्ष के दिनों में भी धैर्य का साथ नहीं छोड़ा बल्कि समझदारी के साथ अपने जीवन में आए संघर्ष से खुद को निकाला है। लेकिन संघर्ष की वजह से अपने सपनों की मंजिल को नहीं छोड़ा।

    संघर्ष जीवन में एक शिक्षक बनकर आता है और आपको सबक और समझदारी के कई पाठ भी पढ़ाता है इसके साथ संघर्ष मनुष्य का चरित्र बनाता है जीवन को नई दिशा और नई पहचान देता है ।

    जिस तरह कुम्हार अपने चाक पर मिट्टी को नए-नए आकर देता है और उनमें सजीवता के रंग भरता है। ठीक वैसे ही हमें भी संघर्षों के साथ रहकर नई सोच और उमंग से जीवन को जीना चाहिए।

  • किस्सा सुख और दुख का

    मनुष्य जीवन भी अजीब है जिसमें मनुष्य दूसरों के जीवन में सुख को तलाशता है और अपने जीवन में दुखों को देखता है ।

    देखा जाए तो दुख भी मनुष्य को तराशने के लिए आता है जब मनुष्य अपने चारों तरफ दुख पाता है तब वही मनुष्य दुःख से बाहर निकलने का रास्ता भी ढूंढ निकालता है। जब मनुष्य के अंदर इतनी शक्ति है कि वह बड़े से बड़े कष्ट से भी बाहर निकल सकता है तो फिर क्यों वह दुख देखकर घबराता है।

    हर मनुष्य के अंदर एक छिपी हुई शक्ति होती है परंतु हर मनुष्य अपने अदर की शक्तियों को पहचानने की क्षमता नहीं रखता इसका कारण मनुष्य का अपने खुद पर विश्वास न होना हर कार्य में असफलता को देखना और इसी कारण मनुष्य दुखों के जाल में फंसा रहता है।

    आलसी यानी दुखी व्यक्ति हाथ पर हाथ रखे बैठे रहकर अपनी बर्बादी का तमाशा देखते हैं और नसीब का रोना रोते हैं। दूसरी सबसे बड़ी वजह आलसी यानी दुख व्यक्तियों की एक बुरी आदत होती है सही समय पर कदम ना उठाना और इसी वजह से आगे चलकर यही बरी आदत दुख कारण बनती है। समय पर सही कार्य ना करना और कल पर छोड़ देना भी दुख का कारण हो सकता है।

    वहीं दूसरी तरफ एक संघर्षशील व्यक्ति जो कि पूरे संघर्ष के साथ और पूरे जोश के साथ अपने कार्य को करता है बिना सफल और असफल होने की परवाह किए वह मनुष्य सिर्फ अपने कार्य से मतलब रखता है । ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में कभी ना कभी सफल होकर दिखाते हैं । और समाज को प्रेरणा भी देते है।

    जिस तरह एक किसान अपनी खेती में बीज बोता है और समय-समय पर अच्छी फसल के लिए खाद और पानी डालता है और फसल अनुसार कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराता है जिससे की अच्छी फसल प्राप्त कर सके उसके लिए भरसक प्रयास करता हैं । समय आने पर वही किसान अच्छी फसल भी प्राप्त करता है ।

    इसी तरह हमें भी अपने अच्छे जीवन के लिए भरसक प्रयत्न करना होगा।

    मनुष्य को समय रहते समझना होगा की सुख दुख सिर्फ मानसिक सोच और बेमतलब की दिमागी उपज है ऐसा कुछ नहीं होता बल्कि जो व्यक्ति समय पर कार्य करता है वह सुखी कहलाता है और जो व्यक्ति काम को टालने के बहाने बनाता रहता है किस कारण वह दुखों में गिरा रहता है और खुद को दुखी कहता है

    वैसे भी कहां गया है जैसा बोलोगे वैसा ही फल काटोगे।

  • सवाल बच्चे कितने सुरक्षित हैं डे केयर में

    सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि आखिर डे केयर होता क्या है और डे केयर का क्या फायदा है तो बता दें की डे केयर जहां छोटे बच्चों को घर जैसा माहौल महसूस कराया जाता है और वहां आया टीचर्स बच्चों के साथ मां के जैसे व्यवहार रखती है।

    शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब मध्यम वर्गीय परिवार में मता-पिता दोनों ही घर से बाहर काम पर निकलते हैं तो बच्चों को भी सुरक्षित व्यवस्था देना चाहते हैं जहां कोई उनके बच्चों को मां जैसा दुलार और प्यार का व्यवहार दे। तो ऐसे में मां-बाप को क्रेच( छोटे बच्चों की देखभाल का केंद्र )स्कूल सबसे बेहतर विकल्प लगता है।

    समय के साथ-साथ बच्चों की अच्छी परवरिश भी हो सके। ऐसा डे-केयर जहां बच्चों को सुचारू सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी यह सोचकर मध्यवर्गीय मां-बाप अपने बच्चों को डे केयर में डालते हैं पर सवाल क्या वहां पर आपके बच्चे सुरक्षित हैं।

    अभी कुछ समय पहले बेंगलुरु जो भारत की टेक्नोलॉजी राजधानी कहलाई जाती है का मामला है वहां के एक डे केयर (जहां बच्चों की देखभाल की जाती है) में से एक वीडियो देखने मिल रहा है जिसमें 2 साल तक के बच्चों के साथ बुरा व्यवहार जैसे बाथरूम में बंद करना, वाशिंग मशीन में डालना, टॉयलेट जेट से बच्चों के ऊपर पानी की बौछार करना जैसी हरकतें दिखाई दीं हैं।

    बच्चों को डे केयर क्रेंच केंद्र जैसे स्कूलों में डालने से पहले मां-बाप को स्कूलों का ब्योरा लेना भी बच्चों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवशक है ।

    बच्चों में बचपन का शुरुआती समय मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बहुत ही जरूरी होता है ऐसे में बच्चों के हुए व्यवहार से बच्चों की मानसिकता पर क्या असर पड़ेगा क्या कभी सोचा है।

    बदलते समय में शहरी जीवन भी बदलने लगा है ऊपर से महंगाई के देखते हुए अब घर गृहस्थी को चलाने का भार मां बाप के कंधों पर है । लगभग हर घर में दोहरी आय वाला मॉडल सबने अपना लिया है। पर इसके साथ-साथ मां-बाप बच्चों को परवरिश नहीं दे पा रहे है उसकी वजह है समय जो की उनके पास नहीं है बच्चों को समय न मिलना ही सबसे बड़ी समस्या मां बाप के लिए बन रही है।

    दोहरी कमाई आज हर परिवार की जरूरत बन चुकी है ऐसे में सवाल उठता है बच्चों की देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए । ऐसे में क्रेंच केंद्र में जाकर पहले वहां की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा देना चाहिए । पूरी जानकारी लेने और संतुष्ट होने के बाद ही अपने बच्चों को डे केयर और क्रेंच केंद्र में छोड़ना चाहिए।

    बच्चे आने वाली भविष्य की नींव होते हैं। इसलिए बच्चों के बचपन का विकास स्वस्थ और सुरक्षित तरीके से किया जाना चाहिए । दोहरी कमाई के प्रलोभन में अपने बच्चों पर ध्यान देना ना भूलें बच्चों पर ध्यान मां-बाप का पहला कर्तव्य है।

    व्यस्तता भरी जिंदगी में हमें बच्चों के साथ हो रहे व्यवहार पर कड़ी नजर रखनी होगी ।

  • सवाल कौन जिम्मेदार है इस मृत्यु का

    मानसून का समय है ऐसे में बारिश होने का इंतजार किया जाता है । और आखिर बारिश का इंतजार हो भी क्यों ना हमारे किसान भाई भी बारिश का इंतजार करते हैं अपनी लहलहाती फसलों को देखने के लिए ।

    इसके अलावा बढ़ती हुई गर्मी और उमस से निजात पाने के लिए शहर वासी भी बारिश की अगुवाई के लिए तैयार रहते हैं।

    लेकिन जरा सी बारिश हो जाने पर समस्याएं भी देखना को मिलती हैं जैसे कि अभी कुछ दिनों पहले बारिश की वजह से आगरा के सुभाष बाजार में एक हादसा हो गया है।

    आगरा के जामा मस्जिद के पास सुभाष बाजार में एक जर्जर नाले का लेंटर ढह जाने की वजह से नगर निगम द्वारा नाले पर बनी दुकान भी नाले में समा गई।

    क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि नाले के जर्जर होने की वजह से दुकान में भी दरार आ रही थी और वह इस संबंध में नगर निगम में नाले की मरम्मत के लिए कई बार कह चुके थे। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

    नाले पर बनी दुकान पर खरीदारी करने आई वृद्धा गंगा देवी हादसे के वक्त वही थीं दुकान नाले में समा गई उसके बाद से ही उनका पता नहीं लगा।

    हालांकि दुकान के नाले में समाने से कुछ और लोग भी नाले में गिर गए थे जिन्हें तुरंत ही सुरक्षित निकाल लिया परंतु गंगा देवी का पता नहीं चल सका वृद्धा गंगा देवी का उनके परिवारजन इंतजार कर रहे थे।

    कुछ दिन हो जाने के बाद भी जब गंगा देवी का कोई सुराग नहीं मिला तो गुस्साए लोगों ने ईंट पत्थरफेक कर अपना आक्रोश जाहिर किया।

    नगर निगम द्वारा वृद्धा गंगा देवी की तलाश के लिए ड्रोन का भी सहारा लिया लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी।

    कहां गई वृद्धा गंगा देवी की तलाश घटना के कुछ दिनों बाद खत्म भी हुई परंतु वृद्धा गंगा देवी जीवित नहीं लौटीं बल्कि गंगा देवी का मृत शब घटनास्थल से 1 किलोमीटर दूर नाले में मिला ।

    यह घटना बेहद शर्मनाक है आखिर इस घटना की गलती किसके सर रखी जाए यह अलग बात है पर इस घटना में एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया ।

    यदि समय रहते नगर निगम नाले की जर्जर स्थिति को पहले ही ठीक कर देते तो शायद यह हादसा नहीं होता ।

  • राम मंदिर संघ

    हिंदू धर्म से जुड़े भगवान राम के मंदिर में हुई चंदा चोरी का विरोध पूरे भारत में जोर शोर से हो रहा है आखिर यह विरोध क्यों ना हो राम भक्तों को गहरा आघात लगा है।

    सूत्रों के अनुसार राम मंदिर से करोड़ों की रकम चुराई गई जोकि चढ़ावे के रूप में राम भक्तों द्वारा दान में चढ़ाई गई। करोड़ों की चोरी आरोपियों द्वारा कबुली भी गई है और आरोपियों के बेंक खातों से करोड़ों का ट्रांजैक्शन भी सबूत के तौर पर मिला है।

    मंदिर के संघ पर चढ़ावा चोरी आरोप में वित्तीय गड़बड़ियों को देखते हुए राम मंदिर के निर्माण कार्यो से लेकर संघ के प्रत्येक वित्तीय लेनदेन की जांच और 5 साल के ऑडिट का फिर से ऑडिट होगा।

    राम मंदिर के ऑडिट सिलसिले में चंपत राय अनिल मिश्रा व गोपालराव से सवाल जवाब भी हुए। जिसमें कुछ प्रश्नों के जवाब सही प्रकार से नहीं मिले ।

    भगवान राम मंदिर के वीआईपी दर्शन के लिए रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसका गैंग हर महीने लाखों की वसूली भी करते थे । भगवान राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही वीआईपी दर्शन नाम पर कमाई पाने का काम शुरू कर दिया था ।

    ऐसे कई शर्मनाक कार्यो की भगवान राम मंदिर की चोरी प्रकरण घटना के बाद से पोल खुली है।

    ऐसे में भारत देश के विभिन्न शहरों से संतों का विरोध बढ़ता जा रहा है और कहा जा रहा है यह घटना शर्मनाक घटना है।

    राम मंदिर में हुई चोरी के विरोध में खड़े हुए लोगों को अभी तक सरकार की तरफ से शांतिपूर्ण जवाब नहीं मिल सका है ।

    भगवान राम मंदिर के चढ़ावा चोरी की घटना एक दुखद घटना और शर्मनाक घटना और एक बहुत बड़ी घटना है। इस घटना से पूरे देश भर में जगह-जगह राम भक्त अपना आक्रोश जाहिर कर रहे हैं । और एक शांतिपूर्ण फैसले की उम्मीद के साथ इंतजार कर रहे हैं।

  • सवाल सोनम वांगचुक के अनशन का

    दिल्ली के जंतर मंतर पर समय समय पर अनशन और धरने होते रहे हैं । अक्सर जब सरकार पर अपनी बात ना पहुंचती दिखे तब आम इंसान परेशान होकर अनशन पर ही बैठकर अपनी मांग रखता है और इसके अलावा कई लोग सरकार का या फिर किसी व्यवस्था के प्रति विरोध भी जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन के जरिए अपनी बात रखते हैं।

    सोनम वांगचुक भी अपनी बात और शर्तो के साथ दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं ।

    सोनम वांगचुक जो की दिल्ली के जंतर मंतर 28 जून से धरने पर है । इनका परिचय काफी लंबा है और यह किसी परिचय के मोहताज भी नहीं है ।

    सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर मंतर पर शिक्षा के लिए पेपर लीक मामले पर कैबिनेट मंत्री शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के लिए धरने पर बैठे हुए हैं।

    आखिर कब सरकार जागेगी और सोनम बांगचुक के धरने को खत्म करने की कोशिश करेगी क्या सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता आम जनता द्वारा किए गए सवालों का जवाब मांगने पर।

    सोनम वांगचुक जो की 59 साल के हैं धरने पर बैठे हैं उनकी हालत भी खराब होती जा रही है आखिर कब तक वह धरने पर बैठेंगे और कब तक इस अनशन को जारी रख सकेंगे। सोनम वांगचुक धरने की वजह से कुछ वजन भी कम हुआ है और ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी समस्याएं भी बढ़ रही है।

    सोनम बांगचुक जो की आर्मी से रिटायर्ड है। छात्रों की शिक्षा के प्रति सुधार करना चाहते हैं । इन्हें समय-समय पर पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है ।

    सोनम वांगचुक के साथ अभिजीत दीपके और छात्र भी इस धरने में साथ दे रहे हैं। आखिर देखते हैं धरने को सफलता मिलती है या विफलता क्या इस धरने की सरकार मानेगी या नहीं यह सब समय बतायेगा।

  • सवाल सड़कों के खड्डों का।

    उमस वाली गर्मी से निजात दिलाने के लिए मानसून आ चुका है। मानसून में चारों तरफ ही हरियाली ही हरियाली नजर आती है और मन बड़ा ही खुश होता है।

    पर मानसून के साथ-साथ कुछ समस्याएं भी आती है इसमें से एक समस्या है सड़कों के खड्डे जो कि जरा सी बारिश से ही लवालव भर जाते है और ऐसे में किसी दुर्घटना के होने का खतरा भी रहता है।

    सड़कों पर खड्डों की हालत पूरे भारत में आपको देखने कहीं भी मिल सकती हैं। कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे कि हमारी सरकार सड़कों पर वाहन निकलने की व्यवस्था के सथ-साथ बारिश के दिनों में स्विमिंग पूल का भी एहसास भी कर देती है।

    हर साल मानसून के समय में सड़कों पर यही स्थिति देखने मिलती है लेकिन प्रशासन पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता ।

    बारिश का पानी सड़क पर जमा होने की एक सबसे बड़ी वजह पानी की निकासी की सही व्यवस्था ना होना भी है और जो बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था है वो समय के साथ जर्जर हालत की हैं।

    इसके अलावा नई सड़कों का भी पहली बार की बारिश में ही बुरा हाल हो जाता है। बारिश के वक्त में सीबर जाम होने की समस्या भी बढ जाती है।

    सड़कें शहरों को जोड़ने का काम करती हैं और छोटे-छोटे नगर और गांव भी सड़कों से जुड़े होते हैं ऐसे में बारिश के समय में सड़कों पर हुए खड्डों की वजह से कोई भी दुर्घटना होने का कारण बन सकता है ।

    ऐसे में हमारे प्रशासन को सड़कों की व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह से निभानी चाहिए। जिससे कि जनजीवन बारिश की वजह से प्रभावित ना हो सड़कों पर बने खड्डों की वजह से रोड जाम होने की समस्या भी बनी रहती है ।

    आखिर कब हमारा प्रशासन जागेगा और आम जनता की समस्या को समझने की कोशिश करेगा।

  • सवाल e20 पेट्रोल का

    इस वक्त जहां भी देखो पिछले कुछ समय से E20 पेट्रोल पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है ।

    सबके अपने मत ,अपनी अपनी राय , और अपने सुझाव हैं कुछ लोगों का कहना है E20 पेट्रोल गाड़ियों के इंजन की क्षमता को प्रभावित करेगा जो की नुकसानदायक है ।ऑन्ददं

    वहीं कुछ लोगों ने E20 को स्वीकार किया है और उन्हें नहीं लगता कि E20 का उनकी गाड़ियों पर कुछ फर्क पड़ेगा।

    सबसे पहले बात E20 आखिर है क्या E20 का मतलब है पेट्रोल में 20% इथेनोल मिश्रित होना।

    देश के विभिन्न विभिन्न शहरों से 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण को लेकर उपभोक्ताओं की अलग-अलग शिकायत हैं।

    जिसके लिए सरकार ने उपभोक्ताओं की शिकायत दूर करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस की है आखिर यह जरूरी भी है। जिससे पेट्रोल उपभोक्ताओं को E20 पेट्रोल को लेकर हो रहे संदेह से निकलने में कामयाब मिले।

    अब तो सरकार, कंपनियों और ओटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने भी ये स्वीकार कर लिया है कि इस ईंधन के उपयोग से वाहनों का माइलेज 2 से 6 फीसदी तक कम हो सकता है।

    ऐसे में E20 पैट्रोल में वाकई कोई गंभीर तकनीकी समस्या नहीं है ,तो विरोध में हो रहे प्रचार अभियान का पूरी पारदर्शिता के साथ व्यवस्थित प्रतिकार किया जाए ।