मनुष्य के भीतर हंसना रोना चिल्लाना गुस्सा करना ऐसी कई क्रियाएं होती हैं । जिन्हें व्यवहार का नाम दिया गया है।
मनुष्य की इन क्रियाओं के द्वारा ही मनुष्य की पहचान होती है। इन क्रियाओं में से कुछ क्रियायें अच्छे व्यवहार को बढावा देती है तो कुछ क्रियाओं से मनुष्य का घमंडी , लालची और क्रोधी स्वभाव का होने का भी पता चलता है।
मनुष्य की निम्न क्रियाओं में से क्रोधित क्रिया में आकर व्यक्ति हमेशा खुद को ही नुकसान पहुंचाने का कार्य करता है ।
क्रोधित स्वभाव का व्यक्ति कभी यह नहीं समझ पाता कि उसके द्वारा दूसरे को परेशान करने से वह स्वयं को भी ज्यादा परेशान कर रहा है।
क्रोधित व्यक्ति हर वक्त क्रोध में रहने की आदत से कभी कभी ऐसा व्यवहार कर जाता है की बाद में उसे पछताना भी पड़ता है ।
क्रोध में मनुष्य छोटी सी बात को बड़ी बात बना लेता है और लड़ाई पर उतर आता है और कुछ भी अच्छा बुरा समझने की शक्ति भी खो बैठता है ।
क्रोध मे हम दूसरों को दंड देना सही समझते हैं जबकि हम खुद को ही दंड दे रहे होते हैं । जिस व्यक्ति का स्वभाव क्रोधित बन जाता है उसे जरासा मजाक भी पसंद नहीं आता ।
वहीं दूसरी तरफ एक दयालु भाव का व्यक्ति जो की क्षमा करना ही उचित समझता है और क्षमा को जीवन का सबसे बड़ा धर्म मानता है
ऐसे व्यक्ति क्रोध में रहना जैसे चिता पर जलाने के समान मानते है इसलिए अपने साथ किसी और के द्वारा रचित अपमान या उपहास व्यवहार को दंड देना उचित नहीं समझते बल्कि औरों को भी क्षमा करने का ज्ञान और महत्व बताते हैं।
इससे संबंधित एक कथा है
एक गांव में सहदेव नाम का व्यक्ति रहता था वह अपने गांव का सबसे अमीर व्यक्ति था । वह गरीबों को दान देता था और हर तरह की मदद भी करता।
सहदेव बहुत ही दयालु प्रवृत्ति का था वह किसी के भी द्वारा उड़ाए गए मजाक को गंभीरता से नहीं लेता था और किसी को भी परेशान करने या दंड देने की नहीं सोचता था।
परंतु सहदेव की पत्नी चिड़चिड़े और क्रोधित स्वभाव की थी वह सभी से बात-बात पर ही लड़ने लग जाती थी झगड़ा करना उसे बहुत पसंद था ।सहदेव की पत्नी को अपने अमीर होने पर अभिमान था। पति सहदेव उसे बहुत समझाता परन्तु पति के लाख समझाने के बाद भी उसकी समझ में कुछ नहीं आता था।
एक बार की बात है गर्मियों की दोपहरी में सहदेव की पत्नी अपने बिस्तर पर लेटी हुई आराम कर रही थी की तभी एक वृद्ध व्यक्ति द्वार पर खड़े होकर तेज आवाज में आवाज देने लगा वह वृद्ध व्यक्ति बहुत ही भूखा और कमजोर था।
वृद्ध व्यक्ति के तेज आवाज़ देने से सहदेव की पत्नी की आंख खुल गई और वह बाहर आ गई उसने गुस्से में वृद्ध व्यक्ति से चिल्लाते हुए पुछा की क्या हो गया क्यों चिल्ला रहे हो क्या तुम्हारे घर में कोई मर गया है क्या इस पर उस वृद्ध व्यक्ति ने कहा की बेटी में बहुत भूखा हूं और कमजोरी की वजह से मुझे चक्कर भी आ रहे हैं तुम्हारे यहां कुछ खाने को हो तो मुझे दे दो।
इस पर सहदेव की पत्नी हंसते हुएं बोली कि हमने क्या भूखों का ठेका ले लिया है और यह कहते हुए वृद्ध व्यक्ति को धक्का दे दिया और कहा अब कभी मेरे यहां नहीं आना।
कुछ समय बीत जाने पर सहदेव की पत्नी बीमार हो गयी पति सहदेव अपनी बीमार पत्नी को लेकर दूसरे गांव के वैध के पास दवा दवा दिलाने ले गया।
दवा देने वाला वैध वही वृद्ध व्यक्ति था जो एक बार सहदेव की पत्नी से खाना मांग रहा था। सहदेव की पत्नी ने वैध को देखकर ही पहचान लिया वैध ने भी सहदेव की पत्नी को पहचान लिया ओर सहदेव की पत्नी से कहा की चिंता मत करो मैं तुम्हें धक्का देकर भगाऊंगा नहीं बल्कि तुम्हारा इलाज करूंगा ।
पति सहदेव ने घर आकर बताया कि जिस दिन तुमने वृद्ध को धक्का दिया था मैं गली से खड़ा सब कुछ देख रहा था तुमने उस वृद्ध व्यक्ति के साथ बहुत गलत व्यवहार किया था। वह वृद्ध व्यक्ति एक वैध था परंतु कुछ समय स्थिति खराब हो जाने पर उसके पास खाने पीने के लिए नहीं रहा था इसलिए मांग मांग कर गुजारा करता था।
मैंने उस वृद्ध वैध व्यक्ति मदद की और दूसरे गांव में दवाखाना खुलवा दिया जिससे वह फिर से लोगों का उपचार करने लगा और कुछ रुपए भी कमाने लगा जिससे उसकी स्थिति सुधर गई । पत्नी यह सुनकर अपने किए गए व्यवहार पर लज्जित हो गई और क्षमा मांगने लगी इस पर पति सहदेव ने कहा कि क्षमा मुझसे नहीं उस वृद्ध व्यक्ति से मांगो इसके बाद सहदेव की पत्नी ने वृद्ध व्यक्ति से क्षमा मांगी।
इस तरह हमें समझ में आता है जीवन में क्षमा करना सीखना चाहिए।
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