कठिनाइयों का सामना

मैदान में उतरना उस वक्त कोई बड़ी बात नहीं होती जब खेल आसान होता है। असली खेल तो तब होता है जब व्यक्ति पूरी तरह से थका हुआ हो और खेल का सारा झुकाव दूसरी टीम की तरफ हो ऐसे में आपके साथ कोई खड़ा ना हो दर्शकों की आवाज मध्यम हो जाए इसी समय पर ही ऐसा होता है जब व्यक्ति सबको अपने अदर के होंसले को दिखा सके।

दशकों से भरे हुए स्टेडियम में ही एक खिलाड़ी अपने हुनर को दिखा सकता है और वही कुछ खिलाड़ी जो अपने खेल को पूरे जोश के साथ नहीं खेलते हैं तो उन्हें आलोचनाओं शिकार भी होना पड़ता है इस तरह एक खिलाड़ी के लिए उसका खेल का मैदान ही उसके भविष्य को संवारता और बिगाड़ता है।

व्यक्ति अपने सामान्य दिनों में तो पूरे विश्वास से दिखाई देता है परंतु जब कभी उसके सामने जब कोई समस्या कठिनाई आती है तो कठिनाई के वक्त में ही इंसान को अपने अंदर के साहस और जोश बाहर निकालना होगा जिससे व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है और कठिन समय के दिनों मे ही एक साधारण व्यक्ति असाधारण बनता है।

किसी भी व्यक्ति का अच्छा समय मुश्किल हालातों में बदल जाता है तो उसके सामने उसके अपने और उसका समाज उसके बदलते हालत को देखकर दो हिस्सों में बंट जाते हैं जिसमें से एक हिस्से के व्यक्ति आपकी मदद न करने का कोई ना कोई बहाना बनाकर आपसे छूटना चाहते हैं वहीं दूसरे हिस्से के व्यक्ति आपके बुरे हाल मैं भी आपके साथ खड़े रहते हैं दूसरे हिस्से में व्यक्ति अधिकतर गिने चुने ही होते हैं।

इसी तरह खिलाड़ी के असफल होने पर उसके सामने भी दो हिस्से हो जाते हैं यह दो हिस्से उसके अन्तर्मन में चल रही दुनिया होती है जिसमें एक हिस्से की दुनिया किस्मत के बहाने बनाने के तरीके सीख रही होती है तो दूसरे हिस्से की दुनिया में वह असफलता से निराश होकर और थका हारा हुआ खिलाड़ी खेल के लिए खुद को तैयार करता है यह सोचते हुए कि मैं मैदान में उतरकर पूरे जोश के साथ खेलूंगा और जीत कर दिखाउंगा।

यहां खाने का मतलब यह है कि इंसान के पास हमेशा दो रास्ते होते हैं एक रास्ता जो उसको वापस लौट जाने को कहता है और किस्मत जैसे बहाने बनाने को तैयार कर देता है तो वहीं दूसरी तरफ इंसान के सामने का दूसरा रास्ता जो की कठिनाइयों और अंधेरों से भरा हुआ होता है यदि इस रास्ते पर इंसान मेहनत और साहस क साथ चलता है तो आगे चलकर इसी रास्ते पर उसे अपनी जीत भी मिल जाती है।

जब आपको अपनी स्थिति डगमगाती लगे और आपके सपने धुंधले से पढ़ने लगते हैं तो यह वही स्थिति होती है जब इंसान स्वयं को या तो आगे जीत की ओर कर देता है या फिर वापस उस अंधेरे में लौट जाता है जहां से वह निकला था।

असाधारण प्रतिभा के व्यक्ति भी साधारण लोगों की तरह ही सामान्य होते हैं साधारण और असाधारण व्यक्तियों में फर्क सिर्फ सोच का होता है असाधारण व्यक्ति कभी भी जोखिम भरे कदम उठाने से नहीं डरते इसलिए असाधारण बन जाते हैं और साधारण व्यक्ति डरपोक प्रवृत्ति के होने के कारण कठिन रास्तों पर चलने का हौसला नहीं बना पाते।

जीवन सभी का कठोर होता है इसमें पूरी तैयारी करने वाला भी हार जाता है और आपके लाखों की संख्या में समर्थक होने पर भी आपको आलोचनाओं का शिकार होना पड़ेगा और कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ेगा ऐसे में व्यक्ति का साहस का कदम उठाना ही उसे मजबूत और असाधारण बनाता है।

आदमी को कठिनाई तोड़ती नहीं बल्कि कठिनाई उसके भीतर की असली ताकत को बाहर लाती है अगर व्यक्ति कठिनाई में अपने मन की आवाज को सुनता है और बाहर के शोर को सुनता है तो ऐसे में उसे सिर्फ अपने मन की आवाज को सुनना चाहिए अगर उसकी मन व्यक्ति को लड़ने के लिए तैयार कर रहा है तो उसे हार नहीं माननी चाहिए बल्कि कठिनाइयों को पार करके आगे बढ़कर विजयी होना चाहिए।

लोग तुम्हें तुम्हारे साधारण होने की वजह से याद नहीं रखते बल्कि तुम्हारे असाधारण और कठिनाइयों को पार करने के हौसले को देखकर याद रखते हैं इसलिए कभी भी अपने कठिन समय में हर कर मत बैठना बल्कि मजबूत होकर कठिनाइयों का सामना करना और अपने आप असाधारण बनने के मौके को मत छोड़ना।

जीवन रूपी खेल में जो मनुष्य एक बेहतर खिलाड़ी बनकर अपने जीवन के खेल को खेलता है वही व्यक्ति अपने जीवन के खेल को मनचाही दिशा देना भी जानता है हम सबको अपने इस खेल रुपी जीवन में अच्छा प्रदर्शन करना पड़ता है और जो इस प्रदर्शन से मुंह मोड़ लेता है उसका जीवन भी उसके मनपसंद तरीके से नहीं चलता है।

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