सावन का महीना भगवान् शिव जी का महीना माना जाता है। इस सावन के महीने में भगवान शिव मन्दिर में भक्त जनों की भीड़ प्रायः देखने को मिलती रहती है।
सावन के महीने में शिव जी के जय कारें लगाते हुए भक्त कांवड़ यात्रा शुरू करते हैं। कुंवारी लड़कियां सुयोग्य वर पाने की इच्छा रखकर भगवान शिवजी का व्रत रखती हैं तो कुंवारे लड़के भी शिव जी पर जल अर्पण करते हैं। इस तरह सावन के महीने में हर भक्त अपनी इच्छा लेकर शिव जी के दर्शन को जाते हैं।
इसी प्रकार सावन महीना सुहागन स्त्रियों के लिए भी विशेष बताया गया है ।सावन महीने में अगर कोई सुहागन स्त्री अपने पति की लंबी उम्र और पति के अच्छे सौभाग्य के लिए विधि विधान से माता पर्वती और भगवान शिव की आराधना सच्चे मन से करती है तो उसके भक्तिभाव से प्रसन्न होकर माता पार्वती उस स्त्री को सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद देती हैं।
सावन मास में सुहागन स्त्रियों के कार्य
सावन महीने में जिस तरह बारिश की वजह से धरती पर हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है ठीक वैसे ही सावन महीने में सुहागन स्त्रियों द्वारा किए गए कार्यों से स्त्री के वैवाहिक जीवन में खुशियां ही खुशियां नजर आने लगती हैं ।
यदि सावन महीने में कोई सुहागन स्त्री माता पार्वती के मंदिर में जाकर भक्ति-भाव से पूजा अर्चना करती है और माता पार्वती के सिंदूर से अपनी मांग को भरे तो उसके पति की आयु भी बढती है ऐसा कहा जाता है।
इसके आलावा सावन महीने के दौरान सुहागन स्त्रियों को हरे रंग का वस्त्र धारण करना हाथों में हरे कांच की चूड़ियों का पहनना और मेहंदी लगाना शुभ और महत्वपूर्ण बताया गया है।
सावन का महीना हर सुहागन स्त्री के लिए खास होता है क्योंकि सावन के महीने में भगवान शिव और माता पार्वती जी अपने भक्तों की विनती को सुनते हैं और स्वीकार भी करते हैं और कोई भी सुहागन स्त्री जब सच्चे मन से अपने पति के सौभाग्य की कामना करती है तो माता पार्वती जी उस स्त्री को धन-धान्य के साथ और सौभाग्य के साथ सुहागन होने का वरदान देती हैं।
सावन का महीना हर भक्त के लिए विशेष माना जाता है क्योंकि सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती को भी प्रिय है। पूरे सावन के महीने में सोमवार के दिन को वृत रखा जाता है और जगह-जगह पर भगवान शिव मंदिर के पास मेले भी लगते हैं।
भगवान शिव माता पार्वती के साथ सावन के पूरे महीने धरती पर निवास करने आते हैं, शिव पुराण कथा में कहा जाता है।
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