सवाल आपकी खुशी का

आज के वक्त में सब भाग दौड़ भरी जिंदगी जी रहे हैं ऐसा लगता है जैसे हम सब इंसान ना होकर किसी मशीन में तब्दील हो गए हैं और हर वक्त सिर्फ चलना और काम करना ही जिंदगी रह गया है ।आखिर ऐसा क्यों है क्यों हम हर वक्त भाग दौड़ में लगे रहते हैं। लेकिन इस सबके बावजूद भी इंसान खुश नहीं है अपने जीवन में ।इंसान के खुश ना रहने के कुछ कारण है जो कि इस प्रकार हैं

व्यस्तता

आज किसी को भी देखो हर व्यक्ति व्यस्त ही मिलेगा ।किसी के पास दो पल की भी फुर्सत नहीं है व्यस्त रहने के बावजूद भी इंसान के कामकाज पूरे नहीं होते वक्त पर ।इसकी वजह है वे फिजूल के काम में अटके रहना और जरूरी काम को टालते रहना ।

इस तरह जब काम वक्त पर पूरा नहीं होता तो हमें गुस्सा आता है और इस वजह से हम अपने आप को अशांत पाते हैं। अगर हम अपने जरूरी कामों को समय पर करना सीख जाएं तो हमें इससे भी बहुत बड़ी खुशी मिलती है।

बराबरी करना

इंसान के अपने जीवन में खुश ना रहने का एक बहुत बड़ा कारण उसका दूसरों से अपने जीवन की बराबरी करना होता है।

आज के वक्त में हर इंसान होड़ और बराबरी करने की वजह से भी दुखी है ।व्यक्ति के पास जो कुछ भी होता है वह उसमें खुश ना रह कर दूसरे व्यक्ति के पास मौजूद चीजों को देख कर दुखी रहता है और अपनी इन आदतों की वजह से दुखी रहता है।

इंसान को समझना होगा की हर चीज हर इंसान के पास नहीं हो सकती इसलिए जो कुछ भी है आपके पास उसमें खुश रहना आपको सीखना होगा अन्यथा आप अपने जीवन में दुख ही पाओगे।

निम्न मानसिकता

हमारे समाज में कुछ इंसानों की मानसिकता इतनी खराब होती है कि वह हर वक्त दूसरों के बारे में बुरा ही सोचते रहते हैं और अपने समय को बुरा सोचने में ही व्यर्थ करते रहते हैं। यहां तक की ऐसे व्यक्ति बातचीत में भी अच्छे शब्दों का प्रयोग नहीं करते हैं। जिस कारण ऐसे लोगों के अच्छे संबंध नहीं रह पाते और इस कारण भी यह दुखी रहते हैं।

गलत सोच रखने वाले व्यक्ति अपनी इन आदतों की वजह से दूसरों को भी दुख देते हैं और स्वयं भी दुखी रहते हैं।

अच्छी मानसिकता वाला व्यक्ति हमेशा अपने बारे में और दूसरों के बारे में भी अच्छा सोचता है जिस वजह से ऐसे व्यक्ति खुद को भी खुश रखना जानते हैं। ऐसी व्यक्तियों के लोगों से अच्छे व्यवहार होने के कारण यह हर वक्त खुशी को महसूस करते हैं।

खुश रहना कोई बड़ी बात नहीं है बल्कि संतुष्टि का कमाल होता है हम अपने जीवन में जितना संतुष्ट रहेंगे उतना ही हम अपने जीवन में खुश रहने की वजह ढूंढ सकेंगे। हमें अपने जीवन के अलावा दूसरों के काम आना भी सीखना होगा।

क्या आप खुश हो आप अपने काम से खुश हो अपने जीवन से अपने परिवार से खुश हो यह सवाल कीजिए अपने आपसे कभी और देखिए आपके अंदर से क्या जवाब मिलते हैं।

आपका जीवन में खुश होने का मतलब रूपए पैसे से नहीं होता और ना ही परिवार के व्यक्तियों का ऊंचे तबके की नौकरी करने से होता है जीवन में खुशी का मतलब किसी विशेष चीज के मिल जाने के मतलब से भी नहीं है।

धरती पर हर मनुष्य के जीवन में सुख और दुख रहता है और जो व्यक्ति अपने जीवन में सुख दुख से तालमेल कर लेता है और संतुष्टि के साथ समझदारी के साथ जीवन के हर पहलू को सीखता है वही व्यक्ति सभ्य व्यक्ति कहलाता है और समाज की नजर में खुश भी दिखता है।

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