भारत देश में लोगों की सुबह अपने भगवान के नाम को लेकर होती है क्योंकि भारत देश में अधिकतर व्यक्ति देवी देवताओं में अपनी गहरी आस्था रखते हैं।
भगवान सूर्यदेव
रविवार के दिन भगवान सूर्य देव का दिन माना जाता है। और भगवान सूर्य को जल अर्पण करके अपने जीवन के दुखों को खत्म करने और जीवन मे आए अंधियारे को मिटाने की विनती करते हैं।
भगवान सूर्य देव से संतान पाने की कामना और संतान की दीर्घायु के लिए भी प्रार्थना की जाती है।
जो पति-पत्नी अपने जीवन में संतान सुख से वंचित हैं या पुत्र रूप की कामना रखते हैं वे पति पत्नी भी रविवार के दिन भगवान सूर्य देव की उपासना करते हैं और व्रत भी रखते हैं।
सूर्य देव को प्रिय
सूर्यदेव को गुड, खिचड़ी और तिल अत्यंत प्रिय हैं अतः भक्तलोग सूर्यदेव को भोग में गुड खिचड़ी और तिल देते हैं।
सूर्यदेव का प्रिय रंग नारंगी और लाल है। सूर्य देव को गुलाब और गुड़हल के पुष्प अत्यधिक प्रिय हैं।
भगवान सूर्य देव की कथा
प्राचीन काल की बात है एक गरीब बुढ़िया सूर्य देव भगवान की भक्त थीं। बुढ़िया अपने घर की साफ सफाई करती और अपने घर के आंगन को गोबर से लीपकर शुद्ध करती ।
बुढ़िया को बहुत शांति से जीवन यापन करते देख उसकी पड़ोसन उससे हमेशा जलती रहती।
बुढ़िया उसी पड़ोसन की गाय के गोबर से अपने घर के आंगन को लीपती । एक बार रविवार के दिन पड़ोसन ने अपनी गाय को घर के अंदर बांध दिया जिस वजह से बुढ़िया को गोबर नहीं मिला और वह अपने आंगन को भी नहीं लीप पाई।
उस रविवार के दिन बुढ़िया ने उपवास नहीं रखा और न ही सूर्य देव को भोग लगाया।
रात के वक्त भगवान् सूर्यदेव ने बुढ़िया से सपने में आकर पूछा तुम तो मेरी प्रिय भक्त हो और तुम नियम से मेरे व्रत को रखती हो और मुझे भोग भी लगाती हो परन्तु आज ये नियम कैसे टूटा ।जब सपने में भगवान सूर्य देव ने व्रत ना रखने और भोग न लगाने का कारण पूछा तो इस पर बुढ़िया ने कहा हे प्रभु सूर्य देव मेरी पड़ोसन ने अपनी गाय को घर के अंदर बांध दिया था जिस कारण मुझे गोबर नहीं मिला और मैं अपने घर के आंगन को लीप नहीं पाई इस वजह से मैं आपका व्रत रखने में और आपका भोग लगाने में असमर्थ थी।
भगवान सूर्य देव को जब अपनी भक्त के व्रत ना रख पाने का कारण पता चला तो उन्होंने कहा कि मैं तुम्हें आशीर्वाद से एक गाय देता हूं और यह कहकर भगवान सूर्य देव अंतर्ध्यान हो गए।
सुबह उठकर बुढ़िया को सपने में भगवान सूर्य देव द्वारा बोले गए कथन की याद आई तो उसने अपने घर के आंगन में जाकर देखा। घर के आंगन में वाकई में एक गाय बंधी हुई थी बुढ़िया गाय को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुई।
भगवान सूर्य देव के आशीर्वाद से प्राप्त गाय एक चमत्कारी गाय थी । वह गाय प्रतिदिन सुबह के वक्त सोने का गोबर करती थी बुढ़िया की पड़ोसन ने जब यह देखा तो वह चुपचाप से जाकर सोने के गोबर को उठा लाई और उस जगह अपनी गाय के गोबर को रख आई ।वह पड़ोसन प्रतिदिन ऐसा ही करने लगी और इस तरह पड़ोसन अमीर होती गई।
बुढ़िया को गाय के सोने के गोबर वाली बात नहीं पता थीं। सूर्यदेव ने जब प्रतिदिन पड़ोसन को सोने के गोबर की चोरी करते हुए देखा तो उन्होंने एक दिन बहुत तेज आंधी चलाई जिस कारण बुढ़िया ने अपनी गाय को घर के अंदर बांध दिया और अगली सुबह बुढ़िया ने गाय के सोने के गोबर को देखा तो वह चकित रह गई।
गाय के सोने के गोबर की वजह से बुढ़िया के घर धन-धान्य बढ़ने लगा यह देख पड़ोसन उससे और अधिक जलने लगी। पड़ोसन ने जाकर अपने राज्य के राजा को यह बात बता दी जिससे राजा ने अपने सैनिकों को भेजकर बुढ़िया के यहां से गाय और गाय के बछड़े को लाने को कहा और बुढ़िया को बंदी बनाकर लाने को कह दिया।
जब राजा ने दूसरे दिन अपने महल में सुबह गाय को सोने का गोबर करते हुए देखा तो राजा अचंभित हो गया। राजा के पास उस गाय के गोबर से धन-धान्य बढ़ता गया और बुढ़िया कैद में दुखी होकर रहने लगी ।
भगवान सूर्य देव ने अपनी भक्त बुढ़िया को कैद में देखा और गाय को राजा के पास देखा तो सूर्य देव ने राजा से रात्रि में सपने में आकर कहा कि इस गाय को और बुढ़िया को छोड़ देना अन्यथा तुम्हारा सब कुछ नष्ट हो जाएगा।
सुबह होने पर राजा को सपने में भगवान सूर्य देव द्वारा कही गई बातें याद आई तो राजा ने बुढ़िया को और उसकी गाय को छोड़ दिया । राजा के आदेश से सैनिकों ने बुढ़िया को उसके घर तक छोड़ दिया।
इसके बाद राजा ने बुढ़िया की पड़ोसन को दंड दिया और पड़ोसन से बुढ़िया को फिर कभी ना परेशान करने को भी कहा।
इस तरह बुढ़िया को उसकी गाय प्राप्त हो गई और सूर्य देव जी ने अपनी भक्त बुढ़िया के दुख दूर किये।
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