आज के वक्त में कोई मनुष्य ऐसा नहीं है जिसके अंदर अहंकार ना हो ।मनुष्य छोटा हो बड़ा हो गरीब हो फिर चाहे अमीर ही क्यों ना हो अहंकार इस धरती के हर प्राणी के स्वभाव में देखने को अक्सर मिलता है।
मनुष्य स्वभाव कई चीजों से मिलकर बनता है दया, करुणा , मोह, ममता, आपसी प्रेम यह स्वभाव जिस व्यक्ति के अंदर होते हैं जिसकी वजह से समाज में उसकी अच्छे इंसान के रूप में पहचान होती है।
पर इसके विपरीत किसी व्यक्ति के स्वभाव में इर्ष्या, जलन ,घमंड और अहंकार होता है ऐसे व्यक्ति का स्वभाव घमंडी और अहंकारी माना जाता है।
इसके लावा अहंकारी होना किसी भी व्यक्ति के लिए उसके दुखों की जड़ माना गया है।
समाज में अक्सर देखने को मिला है जब कभी व्यक्ति कोई बड़ी जीत को हासिल कर लेता है या फिर किसी व्यक्ति के जीवन में संसाधनों की भरमार होने लगती है तो ऐसे में अहंकारी स्वभाव होना स्वाभाविक हो जाता है पर क्या यह जरूरी है स्वभाव में अहंकार का आना ।
हम सबने समय-समय पर कई महापुरुष ऐसे भी देखे है जिनके पास संसाधन के रूप में कुछ भी नहीं होता। ऐसे लोगों के पास दो वक्त की रोटी खाने की व्यवस्था भी ठीक से नहीं होती है पर इसके बावजूद भी ऐसे व्यक्ति बहुत खुश और आनंदित रहते हैं और उसकी वजह है उनके स्वभाव में अहंकार का ना होना।
देखा जाए तो अहंकार मनुष्य को दुख देता है और अहंकार किसी व्यक्ति को जीवन भर दुखों में रहने को बेबस कर देता है। हम समझ सकते हैं कि अहंकार ही हमारे सभी दुखों की जड़ होता है।
व्यक्ति का स्वयं में यह समझना मैं बड़ा हूं मैं अमीर हूं मैं सुंदर हूं इसके अलावा और भी भाव जिसमें व्यक्ति में करने लगता है तो यही उसका मैं बोलना अहंकार होता है । व्यक्ति को इस “मै” से बाहर निकलना होगा और जीवन के सच्चे अर्थ को समझना होगा।
हमें अपनी मैं से बाहर निकाल कर गरीब और असहाय लोगों के काम आना चाहिए और ऐसे लोगों के लिए मदद करनी चाहिए जब हम असहाय और गरीब लोगों को मदद देते हैं तब हमें सच्चे सुख की अनुभूति होती है और यह कार्य हमें अहंकार से बाहर निकलने मे मदद भी करता है।
अहंकार से लड़ाई व्यक्ति के अंदर की लड़ाई होती है हमें अपने अहम को खत्म करने के निरंतर कार्य करने होंगे जब तक हम अपने अंदर के अहंकार को पूर्ण रूप से नष्ट नहीं कर देते तब तक हमें सच्चे सुखी अनुभूति भी नहीं हो सकती।
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