ऋषि पंचमी का व्रत हिंदू धर्म में मुख्य माना गया है इस उपवास को रखने के नियम और आचरण है जो की अति आवश्यक हैं।
व्रत के नियम
संकल्प और समय अवधि
ऋषि पंचमी का व्रत सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त तक रहता है इस व्रत में सुबह स्नान करते समय संकल्प लेकर व्रत को शुरू करना चाहिए।
व्रत का खान पान
ऋषि पंचमी व्रत में फलाहार करके या फिर सिर्फ पानी पीकर रखा जाता है इस व्रत में नमक और प्याज अनाज प्रयोग नहीं करना चहिए ।
मन और शरीर को साफ रखें
इस व्रत में अपने मन मे अच्छा ही सोचें कोई भी बुरा विचार सोचने से बचें इसके अलावा अपने शरीर को भी साफ रखना इस व्रत का नियम है।
सप्त ऋषि पूजन
इस व्रत में चौकी पर कपड़ा बिछाकर और सातों ऋषियों की तस्वीर रखकर पूजन करना चाहिए और ऋषि पंचमी की कथा को सुनना चाहिए।
ऋषि पंचमी हिंदी के महीने भादो महीने के अनुसार शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सप्तऋषियों जो की कश्यप, अति, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम ने जमदग्नि और वशिष्ठ तथा माता अरुंधति की पूजा अर्चना करने का व्रत रखने की परंपरा है।
ऋषि पंचमी का व्रत रखने से भूल चूक या फिर अनजाने में हुए पाप और दोष से प्रायश्चित करने के लिए किया जाता है।
ऋषि पंचमी व्रत कथा
ऋषि पंचमी की पुराणों में एक कथा है। प्राचीन काल में उंत्तक नामक एक ब्राह्मण अपनी पत्नी सुशीला के साथ व अपनी दो संतानों के साथ रहते थे। ब्राह्मण की पुत्री का विवाह एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था पर विवाह के कुछ समय बाद पुत्री के पति की मृत्यु हो गई तो वह पुत्री अपने माता-पिता के पास रहने के लिए लौट आई।
एक रात की बात है ब्राह्मण की पत्नी सुशीला ने देखा कि उनकी पुत्री के शरीर पर बहुत सारे कीड़े रेंग रहे थे यह देखकर पत्नी सुशीला ने अपने पति उंत्तक से इसका कारण पूछा तो ब्राह्मण उंत्तक ने बताया कि उनकी पुत्री ने पूर्व जन्म में अशुद्ध अवस्था में पूजा के बर्तनों खाद्य-सामग्री व देवस्थान को स्पर्श किया था।
इतने सारे दोष होने के बाद भी हमारी पुत्री ने अपने पूर्व जन्म में दोष निवारण के लिए ऋषि पंचमी का व्रत तक नहीं रखा इस कारण हमारी पुत्री को यह कष्ट भोगना पड़ रहा है।
इसके पश्चात् पत्नी सुशीला के कहने पर उंत्तक ने अपनी पुत्री को उसके पुनर्जन्म के दोष से मुक्ति दिलाने के लिए ऋषि पंचमी का विधिपूर्वक व्रत रखने को कहा।
पुत्री ने भी अपने पिता द्वारा बताए गए नियम से ऋषि पंचमी का विधिपूर्वक व्रत रखा पूजा अर्चना की और अपने पुनर्जन्म किए गए दोष को दूर करने के लिए क्षमा मांगी और इस प्रकार उंत्तक और सुशीला की पुत्री के दोष दूर हो गए।
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