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  • बचपन छीनता सोशल मीडिया

    आज का वक्त सोशल मीडिया का वक्त है। यह हम सब अच्छे तरीके से जानते हैं । आज हमारे चारों तरफ सोशल मीडिया की झलक दिखती है। क्या फैशन में चल रहा है। क्या चीज ट्रेंड में चल रही है इस सब का सोशल मीडिया से पता चल जाता है।

    सोशल मीडिया पर हर वर्ग का व हर उम्र का व्यक्ति दिख जाएगा। सोशल मीडिया से आज के वक्त में कोई भी अछूता नहीं रहा है सीधे और साफ शब्दों में कहा जाए तो सोशल मीडिया हमारे जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा बन गया है।

    पर क्या कभी सोचा है सोशल मीडिया का बच्चों पर क्या असर पड़ेगा और शोशल मीडिया बच्चों के लिए कितना फायदेमंद है और कितना नुक़सान दायक है।बच्चे जो अभी 8 से 14 साल की उम्र के हैं जिनको अभी अच्छे बुरे को ठीक तरह से समझने की समझ नहीं है। इस उम्र के बच्चों का अभी शारीरिक-मानसिक ‌विकास हो रहा है उस उम्र पर बच्चों को सोशल मीडिया पर समय बिताने की आदत पड़ जाए तो क्या होगा उनका भविष्य क्या उनका भविष्य खतरे में है यह सोचना होगा।

    आज के समय में सोशल मीडिया की लत किसी नशे से कम नहीं है। सोशल मीडिया की पड़ती लत से बच्चों का भविष्य खतरे में है और सोशल मीडिया से बच्चों को मानसिक खतरा भी है क्योंकी सोशल मीडिया की वजह से हमारे दिमाग को खुशी मिलती है और इससे डोपामाइन बनता है। और बार-बार उस अनुभव को पाने का मन करता है और इसी वजह से सोशल मीडिया की लत पड़ जाती है ठीक ऐसे ही बच्चों के साथ होता है।

    स्थिति बहुत खतरनाक होती जा रही है क्योंकि आज के बच्चों का बचपन सोशल मीडिया ने छीन सा लिया है। अब बच्चों का बाहर घूमने और खेलने का मन ना के बराबर करता है। हर वक्त किसी न किसी बहाने बच्चों को स्मार्टफोन चाहिए।

    शोशल मिडिया की लत बढ़ने की वजह से बच्चों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा होना जैसा व्यवहार बढ़ रहा है। बच्चों का हद से ज्यादा शोशल मीडिया पर समय बिताने से आने वाले समय में बच्चों के स्वास्थ्य के लिए और मस्तिष्क के लिए ख़तरनाक हो सकता है।

  • रिश्तों में धोखाधड़ी

    अभी कुछ समय पहले ही महाराष्ट्र के पुणे में चर्चित हत्याकांड की साज़िश का पता चला । हत्याकांड में 20 साल की सिया नाम की आरोपी जिसने अपने प्रेमी के सथ मिलकर अपने मंगेतर को 400 फीट गहरी खाई में धक्का देकर मार दिया।

    केतन अग्रवाल

    केतन अग्रवाल जो की आरोपी सिया के मंगेतर थे। केतन अग्रवाल जो कि 26 साल के थे । कुछ समय पहले ही विदेश से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई करके भारत लौटे थे । अपने परिवार के बिजनेस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। केतन अग्रवाल की मौत की चर्चा पूरे देश में हो रही है।

    धोखेबाज सिया गोयल

    20 साल की सिया गोयल जो की चेतन चौधरी से प्रेम करती थी और चेतन से प्रेम संबंध के चलते केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। चेतन और सिया के प्रेम संबंध में केतन बाधा थे। 18 जून को केतन अग्रवाल के साथ सिया गोयल अपने जन्मदिन पर पुणे के लोहागढ़ किले पर ट्रैकिंग के लिए गई थी । और वहीं पर 400 फीट गहरी खाई में धक्का देकर मार दिया।

    चेतन चौधरी

    चेतन चौधरी से सिया गोयल के प्रेम संबंध थे और सिया और चेतन के प्रेम के बीच में केतन अग्रवाल बाधा था। इसलिए सिया और चेतन ने केतन को मारने की साजिश बनाई । चेतन चौधरी और सिया गोयल ने केतन को मारने की साजिश नाकाम होने पर केतन को मारने की दूसरी साजिश भी बना रखी थी।

    आखिर आज की नई पीढ़ी किस ओर बढ़ रही है यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी प्रेम संबंध में आए तीसरे व्यक्ति को मार डाला गया ऐसे कई मामले हैं क्या कानून का डर किसी को नहीं है किसी को जान से मरना क्या मजाक बन चुका है किसी की जान लेते समय इंसान के अंदर जरा भी इंसानियत नहीं रहती। आखिर यह कैसे संस्कार है।

  • खिड़की से सफर का नजारा

    हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी पास तो कभी दूर के सफर पर जरूर निकला होगा है ।सफर का आनंद ही अलग होता है । सफर करना भी चाहिए क्योंकि इससे मानसिक शांति और जानकारी भी मिलती है। सफर पर निकलने के एक-दो दिन पहले से ही मन आनंदित होता है।

    सफर कई तरीके के होते हैं किसी की शादी मैं जाने के लिए ,रिश्तेदारी में जाने के लिए ,दोस्तों के पास घूमने के लिए या फिर छुट्टियों पर घूमने निकालना।

    सफर जब थोड़ा बड़ा हो जैसे कि एक शहर से दूसरे शहर का सफर करना ऐसे सफर में आनंद कुछ और ज्यादा आता है।

    सफर करते वक्त हर व्यक्ति की सोच होती है की खिड़की वाली सीट मिल जाए तो अच्छा होगा क्योंकि खिड़की वाली सीट पर बैठकर सफर में दोगुना आनंद आता है ।

    जब कभी सफर के दौरान खिड़की वाली सीट नहीं मिलती तो सफर का आनंद कुछ अधूरा सा लगता है। खिड़की के पास बैठकर सफर मजे से कटता है खिड़की से रास्ते के नजारे को देखना हवा के झोंकों का चेहरे को छूना ऐसे बहुत सारे नजारे होते हैं जिसका आनंद खिड़की पर बैठकर ही मिल सकता है।

    पर कुछ लोग जैसे की ट्रेन से सफर करते हैं स्टेशन पर भीड़ मैं खुली खिड़की से ही सामान वगैरा अंदर घुसाने की कोशिश करते हैं जो उचित नहीं लगता , कुछ चोर उचक्के चलती ट्रेन से खिड़की में हाथ डालकर खिड़की पर बैठे यात्री के हाथों से उनका मोबाइल ,पर्स जैसी चीज छीन ले जाते हैं । जिससे दुर्घटना होने का खतरा भी रहता है।

  • कोचिंग संस्थान में अग्निकांड

    लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग से 15 छात्रों मौत की खबर दिल दहलाने वाली है।

    लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित तीन मंजिला इमारत में दोपहर में हुई आग हादसे में युवाओं की मौत की जो तस्वीर सामने आई है वह बहुत दुखदाई है।

    तीन मंजिला इमारत में आग लगने के वक्त इमारत में आग की लपटें और चारों तरफ धुआं भर गया। और धुआं बढ़ने से एनीमेशन सेंटर के छात्रों में भगदड़ मच गई स्थिति काफी भयभीत हो गई।

    इससे पहले भी आग लगने की कई मामले आए हैं और हर बार सुरक्षा व्यवस्था की कमी ही इस सब का कारण बनती है और इस बार भी कुछ ऐसा ही होगा।

    अलीगंज तीन मंजिला इमारत में आग लगने से 15 छात्रों की मौत हो चुकी है। तीन मंजिला इमारत का आवासीय मानचित्र की स्वीकृति पर व्यवसायिक इस्तेमाल हो रहा था मामले में दोषी पाए गए पांच जोनल अफसर सहित 18 इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हालांकि आग लगने की वजह नहीं पता चल सकी ।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड प्रदेश के लिए बड़ा सबक है और इस पीड़ा दायक घटना से सीख लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए समुचित इंतजाम किए जाएं। और कहा किसी भी हाल में कोचिंग सेंटर और नर्सिंग होम बेसमेंट में नहीं चलेंगे।

    इस वक्त अलीगंज क्षेत्र में हुए अग्निकांड से सबक लेते हुए जांच बैठाने की स्वीकृति दे और आगे बढ़े ।बेगुनाहों को बचाने के लिए ठोस एवं न्याय पूर्ण कार्यवाही करें। और ऐसी न्याय व्यवस्था बनाई जाए जहां सुरक्षा के नियम कागज पर ही ना लिखे जाएं बल्कि जमीन पर भी दिखाई दें।

  • उज्ज्वला योजना

    प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई उज्ज्वला योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों के लिए विशेष कर महिलाओं को धुएं में भोजन बनाने से मुक्ति दिलाना और स्वस्थ ईधन उपलब्ध कराना है ।

    क्या है उज्ज्वला योजना

    भारत देश के गरीब परिवारों के लिए प्रधानमंत्री द्वारा उज्ज्वला योजना 1 मई 2016 को शुरू की गई। इस योजना का उद्देश्य है महिलाओं को धुएं से आजादी और स्वस्थ ईंधन प्रदान करना था । पहले इस योजना के अंतर्गत साल में 9 एलपीजी सिलेंडर मिलते थे परंतु अब 4 कर दिए गए है।

    गरीब लोगों के लिए

    उज्ज्वला योजना शुरू करने का मकसद गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार के लिए है ।जिन परिवारों के पास बीपीएल कार्ड है उन परिवार को फायदा दिलाने के लिए उज्ज्वला योजना शुरू की गई।

    धुएं से आजादी

    उज्ज्वला योजना के बाद से हर घर में स्वस्थ ईंधन दिखने लगा। और उज्ज्वला योजना का सबसे अधिक फायदा महिलाओं को हुआ क्योंकि अब भोजन धुएं में बैठकर नहीं पकाना पड़ता और इससे महिलाओं को धुएं से होने वाली समस्याओं से भी आजादी मिली ।

    एलपीजी सिलेंडर की संख्या

    अभी तक एलपीजी सिलेंडरों के साल में मिलने की संख्या 9 थी। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह द्वारा सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी गई है। एलपीजी सिलेंडर की संख्या घटाने की वजह के पीछे एक समस्या यह भी बताई जा रही है कुछ लाभार्थी सब्सिडी वाले सिलेंडरों का व्यवसायिक उपयोग कर रहे थे।

    पारदर्शिता

    उज्ज्वला योजना में पारदर्शिता होना बहुत जरूरी है क्योंकि कुछ लाभार्थी इसका दुरुप्रयोग कर रहे हैं जिस कारण सरकार को सब्सिडी सिलेंडर की संख्या घटानी पड़ी। परंतु कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनकी ईंधन की खपत अधिक है और उन्हें सरकार के इस फैसले से परेशानी हो सकती है। इसलिए सरकार को उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की जांच करना जरूरी है। जिससे उचित न्याय मिले।

  • राम मंदिर और चढ़ावे की चोरी

    अयोध्या में स्थित राम मंदिर मैं चढ़ावे चोरी की घटना की बातें जोरों पर है आखिर क्या है यह मामला और क्या सच है क्या झूठ है। आज के वक्त में इंसान के अंदर की इंसानियत खत्म हो चुकी है । क्या इंसान इतना गिर चुका है कि चढ़ावे तक को भी न छोड़े।

    विश्वहिंदू परिषद् (विहिप) ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे चोरी की जांच हो इसके लिए मांग की है। और साथ ही कहा है जो कोई इस चोरी में शामिल हैं और मिले हुए हैं उन्हें कानून द्वारा सजा मिलनी चाहिए।

    राम मंदिर पर आए चढ़ावे की चोरी करना उन भक्तों के सथ धोखा और उनकी भक्ति के साथ छल है जिन्होंने पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ अपने आराध्य को श्री राम मंदिर में सेवा रूप में चढ़ावा भेंट किया था।

    ऐसे में भक्तों की भावनाओं को ठोस लगी है । राम भक्तों की आस्था से खिलवाड़ भी हुआ है तो भक्तजन भी चाहेंगे कि जल्द से जल्द कानून द्वारा अपराधियों को पकड़ा जाए और सजा भी दी जाए।

    पर क्या सरकार चोरी करनेवालों को बचा रही है। क्योंकि प्रदेश सरकार ने एफ आई आर तक नहीं दर्ज कराई हो सकता है कि कानून जब चढ़ावा चोरी मामले की छानवीन करेगा तो शायद और भी कई बड़े नाम सामने आने की आशंका ‌‌हो।

    राम मंदिर से चढ़ावा चोरी की घटना ने सुरक्षा-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं क्योंकि मंदिर के आसपास का इलाका और मंदिर परिसर सीसीटीवी कैमरे की नजर में रहते हैं और कंट्रोल रूम में निगरानी की व्यवस्था भी रखी गई है इस सब के बावजूद भी चढ़ावा चोरी होता रहा और और इस चढ़ावे चोरी की किसी को भनक तक नहीं लगी।

    कुछ भी हो सकता है परंतु राम भक्त चाहेंगे कि राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी करने वालों को कानून द्वारा सजा सुनाई जानी चाहिए बगैर किसी सहानुभूति के फिर चाहे वह कोई भी व्यक्ति क्यों ना हो ।

  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

    आज की व्यस्त जिंदगी और भाग दौड़ भरी जिंदगी में इंसान खुद के लिए वक्त नहीं निकल पा रहा और अपनी जिम्मेदारी अपनों की जिम्मेदारी आज की सोच कल की सोच अच्छे भविष्य को बनाने की सोच में फुरसत वाली जिंदगी कहीं खो गई है।

    तनाव ,अशांति फिक्र इन सब की वजह से स्वास्थ्य पर असर पड़ता दिखता है। और बेचैनी भरी जिंदगी जीने को बेबस है । लेकिन हम दिन के कुछ पल योग करते हैं तो इससे हम अपने मन को और शरीर को स्वस्थ रखने की कोशिश कर सकते हैं ।

    योग की सबसे महत्वपूर्ण और बहुत अच्छी बात यह है कि योग करने से शरीर ही स्वस्थ नहीं होता बल्कि योग करने से मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

    आज के वक्त मे हम एआई युग में जी रहे हैं । हमारी लाइफ में सोशल मीडिया ने भी जगह बना ली है जो कि हमें कहीं न कहीं मानसिक समस्याएं भी दे रही है।

    अगर हम प्रतिदिन योग करने की आदत बना लें और दिन के कुछ वक्त खुली हवा में शांति के साथ और खुश मन से गहरी सांस लेते हुए ध्यान करते हुए योग करते हैं तो हम देखेंगे की योग हमें मानसिक समस्याओं से छुटकारा दिलाने में मदद करता है।

    नियमित योगाभ्यास से मन को शांति और स्थिरता मिलती है।योग हमें सही सोचने में भी मदद करता है और हमारे कई रोगों में योग करने से फायदा भी होता है।

    21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया है। आज के वक्त में योग की विशेषताओं को सिर्फ भारत देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर के देश मानते हैं और समझते भी हैं।

  • सवाल आर्थिक व्यवस्था का

    हाल ही में कुछ दिनों पहले खबर आई कि भारत की जीडीपी में 7..7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हई। और फिर तभी रिजर्व बैंक ने आने वाले साल के लिए ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% कर दिया।

    लगभग एक साल से देश की अर्थ व्यवस्था की हालत कुछ ठीक नहीं है रुपया दिन-प्रतिदिन कमजोर पड़ता गया डॉलर के मुकाबले ऐसे में उपभोग की मांग कमजोर बनी हुई है घरेलू निजी निवेश कुछ ठीक नहीं है और विदेशी निवेश लौट रहा है।

    इस वक्त भारत देश को गिरती अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए आर्थिक सुधारो की जरूरत‌ करनी होगी। विनिर्माण क्षेत्र में गिरती अर्थव्यवस्था के कारण संतुलन बिगड़ गया है अमीर और सामान्य वर्ग के बीच में आर्थिक असमानता स्पष्ट दिख रही है और और शेयर मार्केट भी समस्याओं का सामना कर रही है।

    भारत ने जीडीपी में 7.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई। भारत कभी पांचवी अर्थव्यवस्था पर था फिर चौथे स्थान पर पहुंच गया और 1 साल से रुपए की कमजोर स्थिति के कारण छठवे स्थान पर आ पहुंचा है।

    ये वक्त है रुपए की कमजोर होती स्थिति को सुधारने के लिए अर्थशास्त्रियों द्धारा सुझाए गए सुझावों को अमल में लाना। अर्थशास्त्रियों द्वारा सुझाए गए सुझावों से अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के कुछ न कुछ रास्ते जरूर मिलेंगे।

    अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। महंगाई बढ़ रही है तेल ,गैस, उर्वरक तथा अन्य वस्तुओं पर महंगाई बड़ी है ।जिससे भारत का व्यापारिक संतुलन भी प्रभावित हुआ है अमेरिका ईरान के युद्ध का असर विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ा है।

    अर्थव्यवस्था की गिरती हालात से वह समस्याएं भी दिखने लगी हैं जिन पर सरकार का कभी ध्यान नहीं गया भारत का प्राइवेट सेक्टर जो कि निवेश नहीं कर पा रहा रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी देश में हालत बहुत खराब है ।

    फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था कोई किनारा होते नहीं दिख रही है भारत की राजनीति इन सवालों से घिरी हुई है।

  • हनुमान कथा ( राम भक्त हनुमान)

    जब रावण सीता माता को चालाकी से हरण करके ले गया तो श्री राम सीता माता की खोज में निकल गए। श्री राम सीता माता को खोजते खोजते सुग्रीव के पास पहुंच गए । सुग्रीव ने भी श्री राम को सीता माता का पता ढूंढने में और मदद करने की इच्छा जताई क्योंकि श्री राम ने बाली को मार कर राज पाट और सुग्रीव की पत्नी वापस दिलाने में मदद की थी।

    इसी बीच श्री रामजी और हनुमानजी का मिलन हुआ और हनुमान जी श्री राम जी के सेवक रूप में उनके साथ रहने लगे ।हनुमान जी राम जी के सारे कार्यों को भक्ति और पूरी निष्ठा के साथ किया करते थे।

    हनुमानजी श्री राम की सेवा में इतने तल्लीन रहते की उन्हें दिन और रात का कुछ पता नहीं रहता जब राम जी हनुमान को किसी कार्य आदेश देते हनुमानजी तुरंत उस कार्य को करने चल पड़ते।

    एक बार की बात है समुद्र पर राम सेतु का निर्माण कार्य चल रहा था तो रावण की सेवा में से एक राक्षस वानर का भेष रखकर भगवान श्री राम जी की वानर सेना में शामिल हो गया और वानर सेना से धोखे से सारे भेद लेने लगा।

    हनुमानजी को जब यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने वानर के भेष में छुपे राक्षस को मार गिराया।

    हनुमानजी ने रामसेतु के निर्माण में अपना पूरा सहयोग दिया । हनुमानजी चाहते थे जल्दसे जल्द राम सेतु पुल का निर्माण हो और श्री राम जी युद्ध की शुरुआत करें। रावण को हराकर माता सीता को पुनः वापस लेकर आए ।

    हनुमानजी मन ही मन यह सब सोच कर बहुत मुस्कुराते और खुश रहते और भगवान राम जी उनके मन की बातों को समझ जाते।

    इस तरह सेवक हनुमान ने अपने अराध्य प्रभु भगवान के लिए निष्ठा और शक्ति भाव से सेवा प्रदान की।

  • लिंग निर्धारण रोधी कानून

    सुप्रीम कोर्ट ने प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) अधिनियम यानी पीपीपीएनडीटी कानून को सख्ती से लागू करने की जरूरत है यह कहा है ।जन्म के पूर्व लिंग की जांच कराने की और बेटे की चाहत रखना और पितृसत्तात्मक सोच और लिंग चयन की जारी प्रथाओं की कड़ी आलोचना भी की है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा जब तक समाज में स्त्रियों के प्रति जन्मजात कमजोर वाली सोच होना । स्त्रियां पुरूष के बराबरी नहीं ले लेती और यह एहसास नहीं होता । ऐसे प्रयासों की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए।

    लिंग निर्धारण परीक्षण

    सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि लिंग निर्धारण क्या है यह जैविक प्रक्रिया है जो की जन्म से पूर्व होती है जीव जो कि नर है या मादा है तय करती है और विकसित करती है।

    हमारे भारत देश में बेटों की चाहत सदियों पुरानी है ऐसा माना जाता रहा है की बेटे ही वंश चलाते हैं इसलिए जिस घर में बेटे नहीं होते उस घर का वंश खत्म हो जाता है यह माना गया है इसलिए हिंदू परिवारों में बेटे का होना आवश्यक होता है।

    बेटियों को शुरू से ही पराया धन और घर का बोझ माना जाता रहा है इसलिए बहुत से मां-बाप जन्म पूर्व लिंग का परिक्षण करा लेते हैं और पता कर लेते हैं की होने वाला बच्चा लड़की है या लड़का जो की एक कानूनन अपराध है।

    समय-समय पर सरकार द्वारा कानून बनते रहे हैं ।

    पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम 1994 यह कानून भारत की संसद द्वारा एक संघीय कानून है इसके तहत कन्या भ्रूणहत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए अधिनियम पारित हुआ। इस अधिनियम से प्रशव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध लगा।

    प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक (पीएनडीटी) 1996 के तहत इस कानून में जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है अगर अल्ट्रासाउंड अल्ट्रा सोनोग्राफी द्वारा कोई दंपति जन्म से पूर्व लिंग की जांच कराते हैं तो उस दंपति को, जांच करने वाले डॉक्टर को, और लैब कर्मी को 3 से 5 साल की सजा मिल सकती है और इसके अलावा 5 से ₹10 हजार का जुर्माना भी लगने का प्रावधान है।

    कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए सरकार द्वारा कानून बनाया गया घटते लिंगानुपात को लेकर।

    इस कानून का उद्देश्य गर्भाधान से पहले और जन्म से पूर्व लिंग चयन करने और जांच करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना था।

    भारत देश में लिंग जांच कराना गैर कानूनी है।