जब कभी हम अपनी गलतियों के कारण किसी कार्य के असफल हो जाने पर पछतावा करते हैं और काफी समय तक इस पछतावे में ही रहते हैं और सोचते हैं कि काश हमने गलती ना की होती।
कार्य के बिगड़ जाने पर पछतावा करना ही रह जाता है मनुष्य के पास । लेकिन देखा जाए तो गलतियां करना भी मनुष्य की आदत में है और फिर अपनी गलतियों से सीखना भी मनुष्य के व्यवहार में है।
पछतावा अक्सर काम के बिगड़ जाने के बाद ही होता है तो यहां यह कहने से तात्पर्य यह है कि अतीत में हुई गलतियों का वर्तमान में उनके बारे में सोचना ही पछतावा कहलाता है।
पछतावा एक दरवाजे के जैसे है जो की कार्य खत्म होने के बाद प्राप्त निष्कर्ष से मिलता है यदि मनुष्य पछतावे रूपी दरवाजे को खोलकर और हो चुके कार्य से मनुष्य द्वारा की गई गलतियों से सीखे तो होगा यह कि आने वाले समय में किन गलतियों को नहीं दोहराना चाहिए इसलिए व्यक्ति को पछतावे को दुख के रूप में ना लेकर उसको सीख के रूप में लेना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य के लिए आने वाले समय में फायदे का सौदा साबित हो सकता है।
कभी-कभी कुछ व्यक्ति पछतावे में ऐसा डूब जाते हैं कभी-भी उभर नहीं पाते और हमेशा पछतावे में ही रह जाते हैं।यदि ऐसे व्यक्तियों को कोई मार्गदर्शन करनेवाला व्यक्ति मिल जाता है और मार्गदर्शन करता है तो ऐसे व्यक्तियों को पछतावे से बाहर निकलने में मदद मिल सकती है।
हम मनुष्य जाति में पछतावे के नुकसान को एक बहुत बड़ी गलती के रूप में याद करते हैं और कभी न भूलने वाली घटना बना लेते हैं पर हम मनुष्य जाति को कभी यह नहीं भूलना चाहिए कि हमने हमेशा अपने पछतावे से ही सीखा है।
अतीत में हुई गलतियों को हम बदल तो नहीं सकते परंतु हम उन गलतियों से सीख ले सकते हैं इस तरह हम पछतावे को एक बोझ ना बनाकर बल्कि एक सीखने का जरिया बनाकर आगे बढ़ सकते हैं।
पछतावे को दो रूप होते है पहला किसी इंसान से मेरे धोखे को भी पछतावा ही कहा जाता है ऐसा पछतावा मिलने के बाद मनुष्य को काफी गहरा आघात लगता है पर किसी के द्वारा धोखा दिए जाने पर मनुष्य आगे के लिए समझदार हो जाता है तो कहने का मतलब यह है इस तरह के पछतावे से मनुष्य दुखी ना होकर समझदार हो जोता है और आगे किसी और इंसान से विश्वास करते समय समझदारी दिखता है और पहले की हुई गलतियों को दोहराता नहीं है।
इसी तरह पछतावे का दूसरा रूप किसी काम में गलतियों की वजह से नफा-नुकसान हो जाने पर इंसान को जो पछतावा होता है ऐसे पछतावे में अक्सर इंसान का दीवाला भी निकल जाता है और इनका स्वयं पर नियंत्रण नहीं रहता स्थिति खराब हो जाती है ऐसे में कोई अपना ही हमें पछतावे को सीख के तौर पर लेना सीख सकता है।
पछतावे से बचने के लिए हमें अच्छे व्यक्तियों के साथ रहना सीखना होगा और इसके अलावा जब भी हम कोई कार्य करें तो उसे कार्य के लिए पहले से योजना बनाकर चलना ही हमें पछतावे से दूर रख सकता है।
इसी तरह हमें किसी भी व्यक्ति पर विश्वास करने से पहले कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए अन्यथा पछतावा मिलना तय होता है ।
पछतावा कभी ना भूलने वाला एक सबक लेकर भी आता है और हमें बहुत कुछ सीखा कर जाता है।
अधिकतर व्यक्ति पछतावे को एक ऐसी समस्या समझते हैं जिससे बचना ही एक मात्र विकल्प है यह सोचकर आगे कभी-भी किसी भी प्रकार का जोखिम लेने से डरते हैं और जोखिम न लेने में ही अपनी भलाई भी समझते हैं।
हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए इस धरती पर जितने भी बड़े से बड़े कार्य या फिर खोज हुईं उस समय में कभी ना कभी कोई गलती भी हुई होगी लेकिन गलतियों की वजह से क्या वे व्यक्ति उस कार्य करने से रूके अगर वह व्यक्ति अपने कार्य को गलतियों की वजह से पछतावे में आकर बीच में ही छोड़ देते तो क्या वह कार्य संभव हो सकते।
इसलिए गलतियां और पछ्तावा कार्य के दौरान होने वालीं क्रियाएं हैं पछतावे में आकर हम अपने कार्यों को बीच में छोड़ देने से डरपोक प्रवृत्ति के भी बन जाते हैं।
पछतावा इस बात का प्रमाण नहीं नहीं होता कि आपने जो कुछ किया वह गलत किया बल्कि पछतावा इस बात का प्रमाण होता है कि आपके अंदर कुछ करने की हिम्मत है इसलिए पछतावे में फंसकर खुद को सजा न दें।
अतीत में हुई गलतियों को बदला नहीं जा सकता पर उन गलतियों की वजह से मिले पछतावे से आने वाले भविष्य को सुधारा जा सकता है।
बीते समय में जो जा चुका है उसके लिए पछतावा करने से अच्छा है कि आप अपने बीते हुए समय के पछतावे से गलतियां स्वीकार करके आगे बढ़े और स्वयं को फिर से आगे बढ़ने का मौका दें और पछतावे को सबक के रूप में खुद को समझदार होना सिखाएं।
समय निकल जाने के बाद अक्सर हम उस समय को पछतावे के रूप में याद करते हैं क्योंकि वह समय हमारे लिए एक सुनहरा अवसर बनकर आया था इसलिए यह पछतावा होना स्भाविक है परंतु अगर हम इस पछतावे को इस सीख में बदल लें की आने वाले समय में मैं किसी भी अवसर को छोडूंगा नहीं तो यह सीख आपके लिए आने वाले वक्त में फायदेमंद साबित हो सकती है।
पछतावे के प्रति अपना नजरिया बदलकर हम स्वयं को आगे बढ़ा
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