प्रेम मनुष्य की ताकत

यश, धन ,सत्ता ,ज्ञान जैसी आकांक्षाएं आखिरकार हृदय की एक मोन भूख के आगे छोटी पड़ जाती है और यह इस बात को जानने की भूख की कोई हमें चाहता है।

कोई हमारे प्रेम में हमारे अस्तित्व को महत्वपूर्ण समझता है तो कोई किसी के प्रेम में अपने प्रेमी की मौजूदगी हो महत्वपूर्ण मानता है।

मनुष्य को जीवित रहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण चीजों की आवश्यकता होती है परंतु इसके अलावा मनुष्य को जीवित रहने के लिए प्रेम की भी जरूरत होती है।

प्रेम मनुष्य के लिए जरूरत से ज्यादा जीवन के अर्थ को समझाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि प्रेम में ही मनुष्य अपनापन समझ पाता है और प्रेम ही मनुष्य को संवारता सुधारता है प्रेम ही मनुष्य को जीवन की गहराइयों को जानने में सहायक होता है। इसके अलावा मनुष्य के जन्म को भी एक वजह मिलती है।

प्रेम मनुष्य के लिए सूर्य की तरह है जैसे सूर्य निकलता है तो उसके साथ धरती पर भी असंख्य जीव-जंतु मनुष्य और पेड़पौधे भी जीवन की अभिलाषा को आगे बढ़ाते हैं ठीक उसी प्रकार प्रेम मनुष्य के अंदर कई अभिलाषाओं को पूर्ण करने में सहायक होता है।

एक व्यक्ति के अंदर की अच्छाई और बुराई भी प्रेम ही तय करता है समाज के विरूद्ध हो जाने पर प्रेम ही व्यक्ति को अकेलेपन से लड़ने की ताकत देता है और स्वयं को समाज के सामने खड़े होने का व सामना करने का विश्वास भी देता है।

परंतु जब कभी प्रेम के विछड़ जाने से स्थिति भयानक भी हो जाती है तो ऐसे में व्यक्ति प्रेम की यादों में रहकर वही की वही रुक रह जाता है समय निकलता जाता है परन्तु वह मनुष्य अपनी पुरानी यादों से नहीं निकल पाता एक तरह से उसके लिए विनाश का वक्त होता है।

प्रेम में पुनर्जीवित करने की शक्ति होती है सबसे दुखद जीवन वह नहीं जिसमें गरीबी हो बल्कि वह है जिसमें कोई अपना नाम हो जो आपकी लौटने की प्रतीक्षा करें । मनुष्य अक्सर प्रेम को अधिकार समझ लेता है मनुष्य समझता है कि प्रेम में बांध लेना होता है जबकि प्रेम में तो सिर्फ मुक्ति होती है किसी भी प्रकार का बंधन नहीं होता

सच्चा प्रेम मनुष्य को स्वतंत्रता देता हैं क्योंकि प्रेम में व्यक्ति स्वतंत्रता को ही प्रेम की असली सुन्दरता मानता है प्रेम का रूप एक एक युवक और युवती के बीच में ही नहीं होता बल्कि एक मां का अपने बच्चों से, एक मित्र का अपने सच्चे मित्र से, बूढ़े मां बाप का अपने बच्चों के प्रति चिंता रखना यह सब प्रेम का ही तो रूप होता है कहीं ना कहीं हम सब मनुष्य इन्हीं प्रेम के धागों से बंधे हुए हैं।

जिनका कोई नहीं होता उन्हें भी इस दुनिया में किसी न किसी के द्वारा प्रेम मिल जाता है जैसे किसी बूढ़े मां-बाप को संतान का प्यार किसी और की संतान से मिलता है तो जैसे अनाथालयों में रहने वाले आपस में प्रेम की वजह से एक दूसरे से जुड़ जाते हैं और फिर एक दूसरे के भले की चिंता भी करने लगते हैं तो यह प्रेम भी विचित्र और जीवन को एक नई परिभाषा देने वाला होता है।

किसी अनजान व्यक्ति का विदेश में जाने पर वहां की संस्कृति और समाज से जुड़ाव हो जाना भी प्रेम की ही परिभाषा मानी जाती है।

पर कभी-कभी कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो खुद पीड़ा सहकर दूसरों को प्रेम देकर भी अकेले रह जाते हैं पर महान व्यक्तियों की यही पहचान होती है जो निस्वार्थ होकर मनुष्य जाति को प्रेम देते हैं और बदले में कुछ मिलने की भी उम्मीद नहीं रखते हैं।

मनुष्य जब स्वार्थ से ऊपर उठकर प्रेम में विरक्त हो जाता है तो वह सही मायनों में मानवता से जुड़ जाता है। ऐसे व्यक्ति अपनी वृद्धावस्था में स्वयं को अकेला नहीं देखते बल्कि वह बहुत सारे अनुभव और यादों के साथ खुद को घिरा हुआ देखते हैं।

एक घमंडी व्यक्ति को भी प्रेम बदलने की क्षमता रखता है एक आवारा व्यक्ति को भी गलत रास्ते से सही रास्ते पर लाने की हिम्मत प्रेम में ही होती है फिर वह प्रेम चाहें व्यक्ति को दोस्त के रूप में मिलता हो या फिर अपने सगे-संबंधियों संबंधियों द्वारा प्रेम का मिलना मनुष्य के जीवन में चमत्कार से कम नहीं होता।

मनुष्य की सबसे बड़ी उत्पत्ति धन ,यश या किसी प्रकार की सत्ता नहीं होती बल्कि प्रेम ही उसकी सबसे बड़ी संपत्ति मानी जाती है ।इस पूरी दुनिया में आपके पास किसी के होने से वह खुशी मिलती है जो आपको जीवन जीने प्रेरणा देता है उस शक्ति को प्रेम कहा जाता है जो एक अकेले व्यक्ति को अकेलेपन की कमी से दूर रखकर एक नए प्रकाश को दिखलाता है।

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