बृहस्पतिवार के दिन श्री विष्णु जी की पूजा की जाती है। श्री विष्णु जी अपने भक्त की इच्छा को पूर्ण करते है। श्री विष्णु जी प्रसन्न होकर अपने भक्तों को घर धन-धान्य से संतान-सुख से निरोगी काया से और इसके अलावा सारे सुखों से खुश रखते हैं।
बृहस्पति व्रत के नियम
बृहस्पतिवार के दिन बहुत से भक्त श्री विष्णु जी का व्रत रखते हैं और पूजा अर्चना करते हैं।
बृहस्पतिवार व्रत के नियम बहुत ही सरल और कम खर्च वाले हैं जिस कारण भक्त इन नियमों को सरलता से पूर्ण कर लेते हैं।
बृहस्पति व्रत में सुबह अपने जरूरी कार्य से निवृत होकर और नहा कर पीला वस्त्र धारण करते हैं और केले के पेड़ के नीचे बैठकर हाथों में चने की दाल लेकर श्री विष्णु जी की कथा सुनते हैं।
बृहस्पतिवार के दिन स्त्रियों को बाल धोने की मना होती है। इस व्रत में आटे में हल्दी और चने की दाल डालकर लोई बनाकर गाय को दी जाती है।
इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति एक वक्त का खाना खा सकता है पर पीला भोजन जरूरी माना गया है जैसे की केला ,आम इसके अलावा खाने के आटे में जरा सी हल्दी डालकर खाने के लिए परांठा बनाया जा सकता है।
श्री विष्णु कथा
एक बार की बात है एक गांव में एक गरीब स्त्री अपने पति के साथ और अपने एक पुत्र के साथ टूटी सी झोपड़ी में रहा करती थी।
दोनों पति-पत्नी दिन भर मेहनत करके कुछ रुपए कमाते और फिर अपने खाने के लिए सामान लाकर भोजन पकाते वे अपने जीवन से काफ़ी खुश रहते।
स्त्री हर बृहस्पतिवार को श्री विष्णु जी की आराधना करती और सच्चे मन से व्रत रखती परंतु स्त्री के पति को अपनी पत्नी का श्री विष्णु जी का व्रत रखना और आराधना करना ठीक नहीं लगता था वह अपनी पत्नी को पूजा पाठ करने से सदा रोकना रहता।
पर पत्नी प्रेम से अपने पति को समझाती और कहती श्री विष्णु जी की दया से ही हमारे जीवन में सुख-शांति है इस पर पति कहता अगर हमारे जीवन में सुख शांति श्री विष्णु जी की कृपा से है तो हम अभी तक गरीब क्यों हैं। यह कहकर वह अपनी पत्नी से रुष्ट हो जाता।
एक बार पति की तबीयत खराब हो गई और वह काम पर भी नहीं जा सकता था पत्नी अकेले ही काम पर जाती और घर के सारे काम करती कुछ दिन निकल जाने के बाद भी पति की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ यह देखकर पत्नी भी परेशान रहने लगी क्योंकि पति को क्या हुआ यह समझ नहीं आ रहा था।
पति की तबीयत खराब हो जाने की वजह से अब उनके दिन और खराब होने लगे और यहां तक की खाने के लिए भी तरसना पड़ता तब एक दिन पति ने कहा कि तुम तो कहती थी श्री विष्णु जी की कृपा से हम सुख शांति से रहते हैं तो अब हमारे जीवन से सुख शांति कहां गया । इस पर पत्नी के पास कोई जवाब नहीं था और वह चुपचाप सुनती रही ।
कुछ दिन बाद की बात है पत्नी पड़ोसियों से मांग कर कुछ खाना लेकर आई और अपने पति और बालक के साथ खाने बैठी ही थी की तभी झोपड़ी के दरवाजे पर किसी ने आवाज़ दी ।पत्नि ने बाहर जाकर देखा तो एक बूढ़ा व्यक्ति कुछ खाने के लिए मांग रहा था तो पत्नी ने बिना सोचे समझे अपने हिस्से का खाना उसे बूढ़े को खाने के लिए दे दिया ।इस पर उस बूढ़े ने कहा कि पुत्री तुमने मुझे अपने हिस्से का खाना दे दिया है अब तुम क्या खाओगी इस पर उस स्त्री ने कहा बाबा आज तो बृहस्पतिवार का दिन है और मेरा आज व्रत है।
बूढ़े व्यक्ति के रूप में श्री विष्णु जी उस औरत की परीक्षा लेने आए थे और श्री विष्णु जी की परीक्षा में गरीब स्त्री पास हो गई यह देखकर श्री विष्णु जी प्रसन्न हुए और बृहस्पति देव ने अपने रूप में आकर ग़रीब स्त्री को दर्शन दिए।
श्री विष्णु जी के दर्शन देख पति भी अपनी झोपड़ी से बाहर निकल आया और बोला हे भगवान मुझे माफ करना मै अपनी पत्नी को आपकी पूजा करने से रोकता था और शायद इसी वजह से मेरी तबीयत खराब रहने लगी मैं समझ चुका हूं भगवान मेरी तबीयत खराब होना मेरे ही कर्मों का फल है ।श्री विष्णु जी दोनों पति-पत्नी और बालक को जीवन के सातों सुख मिलने का आशीर्वाद दिया और उनके जीवन से सारी कष्ट खत्म हो जाए ऐसा आशीर्वाद भी दिया। बृहस्पति देवता श्री विष्णु जी आशीर्वाद देकर अंतर्ध्यान हो गए।
भक्त जब अपने भगवान जी की पूजा अर्चना करने में ध्यान लगाता है तो भगवान भी प्रसन्न होकर अपने भक्त को खुशियों का आशीर्वाद देते हैं।
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