बुधवार का दिन भगवान गणेश की का बार होता है भगवान गणेश जी बुद्धि के देवता माने जाते हैं और अपने भक्त पर जब दयाल होते हैं तो उसके घर में धन दौलत की बरकत होती है।
भगवान गणेश जी की जो कोई व्यक्ति नियम के साथ पूजा अर्चना करता है तो भगवान गणेश जी उसकी बुद्धि को बढ़ाकर सत्कर्म मार्ग पर ले जाते हैं और ऐसे व्यक्ति का भगवान श्री गणेश हमेशा साथ देते हैं।
जिस घर में भगवान् गणेशजी को पूजा जाता है उस घर में माता लक्ष्मी जी स्वयं निवास करती हैं क्योंकि माना जाता है भगवान गणेश जी को जहां पूजा जाता है वहां भगवान गणेश जी के साथ लक्ष्मी जी भी जाती है।
गणेश कथा
बहुत पहले की बात है एक गांव में एक बुढ़िया रहती थी । बूढी अम्मा अपनी छोटी सी कुटिया में अकेली रहती थी परिवार के नाम पर वह अकेली थी।
वह बूढी अम्मा भगवान श्री गणेश में गहरी आस्था रखती थी। प्रतिदिन भगवान श्री गणेश जी की आराधना करती। भगवान गणेश जी की आराधना करने के लिए सर्वप्रथम अपने हाथों से मिट्टी की भगवान गणेश जी की मूर्ति बनाती और उसके बाद गणेश जी की विधि-विधान से पूजन करती ।
प्रतिदिन गणेश जी की पूजा करने के बाद दोपहर में मिट्टी से बनी भगवान गणेश जी की मूर्ति टूट जाती जिस कारण है बूढी अम्मा दुखी रहती। वह हर बार अच्छी मूर्ति बनाने की कोशिश करती और हर बार उसके द्वारा बनाई हुई मिट्टी की मूर्ति टूट जाती ।यह देखकर वह भगवान गणेश जी से मूर्ति टूट जाने का कारण पूछती और विनती करती कि अगली बार भगवान गणेश जी की मूर्ति ना टूटे।
एक बार की बात है उसी गांव के साहूकार का घर बन रहा था घर बनाने के लिए मजदूर आए हुए थे ।बूढी अम्मा मजदूरों को काम करते देखकर उनके पास आकर बोली की क्या तुम मेरे लिए भगवान गणेश जी की पक्की मूर्ति बना दोगे ।यह सुनकर मजदूर हंसने लगे और बोले की अम्मा हमारे पास बहुत काम है ऐसे फालतू के काम करने के लिए हमारे पास समय नहीं है मजदूरों से यह बात सुनकर बूढी अम्मा वहां से चुपचाप चली गई।
मजदूर अपने काम में लग गए। मजदूर दीवार को बना रहे थे पर दीवार बार-बार टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती जिस वजह से मजदूर परेशान हो गए दो-तीन दिन यही चलता रहा साहूकार ने आकर मजदूर को देखा और पूछा कि दीवार अभी तक क्यों नहीं बनी तो मजदूरों ने कहा पता नहीं क्यों साहूकार जी हम दीवार को बार-बार तोड़ कर सही बनाने की कोशिश कर रहे हैं परंतु बार-बार दीवार टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है।
मजदूरों में से एक मजदूर ने साहूकार से कहा की कुछ दिन पहले एक बूढ़ी अम्मा आईं थीं और हमसे भगवान गणेश जी की पक्की मूर्ति बनाने की कह रही थी ।पर हमने मना कर दिया शायद इस वजह से हमारी दीवार सीधी नहीं बन रही साहूकार यह सुनकर बूढी अम्मा की कुटिया में गया और कहने लगा की अम्मा मैं आपके लिए संगमरमर के पत्थर की भगवान गणेश जी की मूर्ति बनवा दूंगा यह सुनकर बुद्धि अम्मा प्रसन्न हो गई।
कुछ दिन पश्चात साहूकार भगवान गणेश जी की संगमरमर के पत्थर की मूर्ति बनवा कर ले आया और बूढी अम्मा को दे दी । अब बूढी अम्मा उस संगमरमर की मूर्ति की पूजा करती और प्रसन्न रहने लगी।
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