भक्ति रस में – संतोषी व्रत कथा

शुक्रवार के दिन मां संतोषी की पूजा अर्चना की जाती है।मां संतोषी की पूजा अर्चना करने से भक्त लोगों के जीवन में सुख शांति की कृपा बनी रहती है और मंगल कार्य भी समय-समय पर होते रहते हैं।

मां संतोषी की कृपा से व्यक्ति के जीवन में आने वाली विपदाओं को भी मां संतोषी हर लेतीं हैं।

इस दुनिया में सबके जीवन में भांति-भांति के दुख-सुख हैं हर व्यक्ति की अभिलाषा होती है कि उसका जीवन सुख शांति से बीते और इस अभिलाष को लेकर ही भक्ति लोग माता संतोषी से जीवन में सुख शांति की कामना करते हैं।

संतोषी माता की कहानी

बहुत पहले की बात है एक नामी और प्रसिद्ध राजा थे ।राजा के बारे में कहा जाता था की जो भी व्यक्ति किसी भी तरह की मदद के लिए राजा के महल में जाता तो राजा उसकी मदद करने के लिए सदा तत्पर रहते।

इसी प्रकार उस राजा की रानी भी बहुत ही दयालु प्रकृति की थी । राजा और रानी गरीबों के सुख दुख का ख्याल रखते और अपने राज्य की हर समस्या का समाधान ढूंढते।

राजा और रानी अपने इस कार्य की वजह से बहुत प्रसिद्ध थे। राजा पराक्रमी और साहसी था जिस कारण किसी भी शत्रु का राजा के पराक्रम का सामना करने का साहस नहीं होता था।

राजा और रानी अपने महल में पूरी सुख-सुविधा से रहते थे परंतु राजा रानी के जीवन में एक बहुत बड़ा दुख भी था वह दुख था संतान सुख शादी के काफी वक्त गुजर जाने के बाद भी राजा और रानी इस सुख से वंचित थे।

राजा और रानी मां संतोषी में गहरी आस्था रखते थे और पूरा दिन मां संतोषी की पूजा करते।

एक बार की बात है राज्य में अकाल पड़ गया जिस कारण पूरे राज्य की फसल भी नष्ट हो चुकी थी ।राजा को अकाल से आई समस्या के बारे में और फसल नष्ट हो जाने के बारे में पता चला तो राजा बहुत ही दुखी हुए।

प्रजा के दुख को देखकर राजा ने अपने महल के तहखाने में रखा अनाज गरीबों में बंटवाया लेकिन अपने लिए एक अन्न का दाना नहीं रखा जिससे कि प्रजा भूखी न रहे राजा के इस निर्णय से प्रजा बहुत खुश हुई और दुखी भी हुई की राजा रानी इतने दयालु होने के बाद संतान-सुख से वंचित हैं।

राजा और रानी के इस त्याग और व्यवहार से संतोषी माता अति प्रसन्न हुईं।

संतोषी माता ने राजा और रानी को सपने में आकर कहां कि जिस तरह राज्य में आई भुखमरी को खत्म करने के लिए तुमने अपने तहखाने के सारे अनाज को प्रज्ञा में बंटवा दिया यह देखकर मैं बहुत प्रसन्न हुई और इसके साथ ही मैं तुम दोनों की भक्ति से भी प्रसन्न हूं में वरदान देती हूं की कुछ समय में ही तुम्हें संतान सुख प्राप्त होगा और यह कहकर संतोषी मां आलोप हो गईं।

इसके बाद कुछ समय बीत जाने पर राजा और रानी के जीवन में संतान सुख आ गया।

अब राजा और रानी का मां संतोषी की भक्ति भाव में श्रद्धा बढ़ गई और इसके साथ ही राजा और रानी अपने प्रजा के सुख-दुख में साथ देने लगे और प्रजा के बच्चों को अपनी संतान समान मानने लगे।

राजा और रानी के जीवन में संतान सुख मां संतोषी के आशीर्वाद से प्राप्त हुआ और मां संतोषी का आशीर्वाद राजा और रानी के भक्ति भाव से प्रसन्न होकर मिला।

मां संतोषी ने जैसे राजा और रानी के जीवन में संतान सुख दिया ऐसे ही मां संतोषी अपने भक्तों के जीवन में हर दुख को हर लेती हैं और उसकी जगह सुख को देती हैं। जय संतोषी माता की।

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