जब हनुमान जी छोटे बाल रूप में थे ।हनुमान जी बालक रूप में बड़े ही चंचलस्वभाव के थे ऐसा माना जाता है। अंजनी पुत्र तो कभी पवन पुत्र कहलाए ।हनुमानजी केसरी नंदन भी कहलाए ।
हनुमान जी जब बाल रूप में थे उन्हीं दिनों की बात है ।हनुमान जी अपने बाल सखाओं के साथ खेल रहे थे। खेलते खेलते अचानक हनुमान जी को भूख का एहसास हुआ और उन्हें तत्काल कुछ खाने की इच्छा हुई।
हनुमानजी आसपास के वृक्षों पर फल ढूंढने लगे यद्यपि काफी फल थे वृक्षों पर पर उन्हें अपनी भूख को मिटाने के लिए उचित फल नहीं मिल रहा था।
इधर-उधर काफी समय तक देखने के बाद अचानक हनुमानजी की दृष्टि आसमान की तरफ गई उस वक्त आसमान में सूर्य भगवान निकल रहे थे इस कारण उनका रंग लाल था हनुमान जी को लगा यह कोई फल है।
सूर्य को फल समझकर हनुमान जी के मुंह में पानी आ गया और सूर्य रूपी फल को खाने की इच्छा लेकर हनुमान जी बिना किसी को बताएं आसमान की तरफ उड़ने लगे।

कहते हैं जब हनुमान जी सूर्य के निकट पहुंचे और उन्होंने सूर्य को खाने की इच्छा जताई तो उन्हें देवताओं ने समझाया की सूर्य खाने की कोई वस्तु नहीं बल्कि सूर्य भगवान है परंतु भूखे बालक हनुमान को अपनी जिद के आगे किसी की बात समझ नहीं आई। और उन्हें खाने के लिए अपना मुंह खोल दिया।
जब सबके समझाने पर भी हनुमान जी अपनी जिद से पीछे नहीं हटे तो सूर्य देव को बचाने के लिए इंद्र देव ने अपने अस्त्र वज्र से बाल हनुमान पर प्रहार किया जिस कारण हनुमान धरती पर आ गिरे और उनकी हनु में चोट आ गई जिस कारण उनका नाम हनुमान पड़ा ।
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