सवाल सड़कों के खड्डों का।

उमस वाली गर्मी से निजात दिलाने के लिए मानसून आ चुका है। मानसून में चारों तरफ ही हरियाली ही हरियाली नजर आती है और मन बड़ा ही खुश होता है।

पर मानसून के साथ-साथ कुछ समस्याएं भी आती है इसमें से एक समस्या है सड़कों के खड्डे जो कि जरा सी बारिश से ही लवालव भर जाते है और ऐसे में किसी दुर्घटना के होने का खतरा भी रहता है।

सड़कों पर खड्डों की हालत पूरे भारत में आपको देखने कहीं भी मिल सकती हैं। कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे कि हमारी सरकार सड़कों पर वाहन निकलने की व्यवस्था के सथ-साथ बारिश के दिनों में स्विमिंग पूल का भी एहसास भी कर देती है।

हर साल मानसून के समय में सड़कों पर यही स्थिति देखने मिलती है लेकिन प्रशासन पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता ।

बारिश का पानी सड़क पर जमा होने की एक सबसे बड़ी वजह पानी की निकासी की सही व्यवस्था ना होना भी है और जो बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था है वो समय के साथ जर्जर हालत की हैं।

इसके अलावा नई सड़कों का भी पहली बार की बारिश में ही बुरा हाल हो जाता है। बारिश के वक्त में सीबर जाम होने की समस्या भी बढ जाती है।

सड़कें शहरों को जोड़ने का काम करती हैं और छोटे-छोटे नगर और गांव भी सड़कों से जुड़े होते हैं ऐसे में बारिश के समय में सड़कों पर हुए खड्डों की वजह से कोई भी दुर्घटना होने का कारण बन सकता है ।

ऐसे में हमारे प्रशासन को सड़कों की व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह से निभानी चाहिए। जिससे कि जनजीवन बारिश की वजह से प्रभावित ना हो सड़कों पर बने खड्डों की वजह से रोड जाम होने की समस्या भी बनी रहती है ।

आखिर कब हमारा प्रशासन जागेगा और आम जनता की समस्या को समझने की कोशिश करेगा।

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