हमारे शरीर को कार्य करने में ऊर्जा चाहिए होती है और वह ऊर्जा हमें हमारे खाने से ही मिलती है ।इस बात को हम अच्छे तरीके से जानते हैं ,पर क्या कभी सोचा है पेट भरने के नाम पर हम जो भी खा रहे हैं क्या वह हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है।
जीवन की बदलती शैली के साथ-साथ हमारा खान पान भी पहले से बहुत बदल चुका है खाने के नाम पर हम हर उस खाने को खाते हैं जिसमें स्वाद तो हो पर शायद पोषण ना के बराबर होता हो।
आज के वक्त में जंक फूड का काफी चलन है। खाने में जंक फूड लगभग हर बच्चे की पहली पसंद बनता जा रहा है जैसे चिप्स ,बर्गर, पिज्जा, पेस्ट्री। जंक फूड हेल्थ के लिए फायदेमंद नहीं है बल्कि बीमारी की वजह बनती हैं क्योंकि जंकफूड में पोषण कम और कैलोरी ज्यादा होती है और इसे नियमित खाने से शरीर में बीमारी होने का खतरा भी रहता है।
हमारे भोजन में सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट ,बसा ,प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का नियमित संतुलन ही हमारे भोजन को संतुलित बनाता है जिससे हमारा शरीर दिन भर के कार्य के लिए ऊर्जा अवशोषित करता है।
वक्त है आज कि भाग-दौड़ वाली ज़िंदगी में अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने की और अपनी खाने की थाली में ध्यान देने की ।स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए खाने की थाली में पोषित खाने को ही जगह दें। अगर समय रहते हमने पोशित और स्वस्थ भोजन को अपने खानपान में शामिल नहीं किया तो शायद परिणाम हमारे अनुकूल न हो।
खाद एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार आज के वक्त में दुनिया के लगभग 2.69 अरब व्यक्ति पौष्टिक आहार नहीं ले पा रहे । इसका मतलब कि पूरी दुनिया में हर तीन व्यक्ति में से एक व्यक्ति पौष्टिक आहार की पहुंच से दूर है। आने-वाले समय में अगर यही स्थिति रही तो दुनिया में 51 से 52 करोड़ व्यक्ति लंबे वक्त तक कुपोषण का शिकार हो सकते हैं ।
निचले स्तर के लोगों को पेट भरने के लिए सस्ते अनाज आसानी से मिल जाते हैं जिस खाने में कोई पोषक तत्व नहीं होता है।पौष्टिक खाना जो कि शरीर के विकास में सहायक होता है महंगा होता है और गरीब लोगों की पहुंच से दूर होता है
इस महंगाई की वजह कृषि से लेकर उपभोक्ता तक फैली लंबी और असंतुलित खाद आपूर्ति श्रृंखला है। जो कि अपने फायदे को देखते है
सोचो जब कुपोषण हो जाएगा तो हमारे देश का भविष्य भी क्या होगा। इसलिए वक्त रहते पोषित खाने के लिए कोई ठोस कदम उठाने होंगे जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी भी पोषित हो और देश का भविष्य भी उज्जवल हो ।
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