कल नहीं अपने आज को जीना सीखो

मनुष्य अपना जीवन बीते कल को याद करने और आने वाले कल को संवारने में ही सोच कर गुजार देता है यह स्थिति किसी एक व्यक्ति कि नहीं है बल्कि हम सभी की यही स्थिति है।

वर्तमान को बेहतर तरीके से जीना ही सही मायनों में जीवन कहलाता है पर हम यह बात नहीं समझ सकते क्योंकि मनुष्य की आदत बीते कल और आने वाले कल सोचने में गुजारना ही बन चुका है।

ऐसा कोई मनुष्य नहीं है जिसने अपने जीवन में कोई गलती ना कि हो। मनुष्य द्वारा की गई गलती होने के बाद यह गलती पछतावे के रूप में मनुष्य को कई वर्षों तक महसूस होती रहती है और यह सब हमारे मानसिक क्रियाएं होती हैं परंतु अगर हम चाहे तो इन क्रियाओं को बदल कर उसकी जगह अपने बीते समय में कुछ अच्छा और हंसी के पलों से भरदे तो शायद हमें हमारा पछतावा फिर याद नहीं आयेगा ।

आने वाले कल को बेहतर बनाने के लिए सोचने से अच्छा होगा कि मनुष्य को रोज अपने छोटे-छोटे कार्यों से अपने अंदर अच्छी आदतों का निर्माण करना सीखना होगा हर रोज एक नई अच्छी आदत आपके आने वाले कल को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकती है

जब हम अपनी गलतियों के रूप में याद आने वाली पुरानी यादों को अपने पुराने समय की अच्छी यादों से बदल देते हैं और यह आदत बना लेने से हमारे लिए हमारे बीते कल से निकलने में हमारी मदद कर सकता है और आने वाले भविष्य को संवारने के लिए अपने अंदर रोज एक नई अच्छी आदत का निर्माण करना हमारे अच्छे भविष्य की ओर ले जाता है तो इस तरह हम अपने बीते कल से और आने वाले भविष्य की चिंता से बाहर निकलकर अपने वर्तमान जीवन को आनंद लेकर और बेहतर तरीके से जीना शुरू कर सकते हैं।

यह करने के बाद मनुष्य संपूर्णरूप से अपने वर्तमान को जीने लगता है और जीवन के नए अर्थ को समझता है यह सबकुछ करने के बाद मनुष्य जब जीवन के अर्थ को बेहतरी से समझ चुका होता है तो उसे सृष्टि की सुंदरता भी समझ आने लगती है और जीवन के सुख-दुख से बाहर निकलने का जरिया भी दिखने लगता है।

वर्तमान में जीने से व्यक्ति को अपार सुख की प्राप्ति होती है क्योंकि व्यक्ति अपने अहम् से बाहर निकलने का रास्ता समझ चुका होता है और अपने आसपास के लोगों के साथ गल मिलकर रहना पसंद करने लगता है।

इस तरह देखा जाए तो अपने बीते कल और आने वाले कल को संवारने की सोच की वजह से व्यक्ति को वर्तमान ज़ीने का अनुभव ही नहीं हो पता और जब यह अनुभव हो जाता है व्यक्ति की बहुत सारी चिंताएं उसे बेवजह की लगने लगते हैं इसलिए अपने वर्तमान को जीना बहुत महत्वपूर्ण हैं।

वर्तमान को जीने वाला व्यक्ति अपने सामने आने बाली समस्याओं से घबराता नहीं है बल्कि शांत मन से समस्याओं का समाधान ढूंढने लगता है और कुछ ही समय में वह व्यक्ति‌ अपनी समस्याओं के समाधान को ढूंढ लेता है।

वर्तमान को जीने वाला व्यक्ति अपने जीवन के हर कार्य को भाग्य के भरोसे छोड़कर नहीं बैठता बल्कि अपनी नई छोटी-छोटी आदतों से स्वयं अपने भाग्य का निर्माण करता है इससे हमें यह भी समझना होगा की भाग्य भरोसे बैठने से व्यक्ति अपने आनेवाले समय को तो खराब करता है साथ में वर्तमान में भी चिंतित रहने लगता है इसलिए किसी भी कार्य को भाग्य भरोसे छोड़कर बैठने से आप अपना वर्तमान भी खराब कर लेंगे और उसकी वजह से आने वाला कल भी खराब हो जाएगा।

वर्तमान को आनंद और शांति से जीने में जरूरी नहीं है कि आपके पास महंगे महंगे संसाधन हों या फिर आप एक प्रतिष्ठित व्यक्ति हों। शांतिपूर्ण वर्तमान जीने के लिए असाधारण होना जरूरी नहीं होता एक साधारण सा व्यक्ति भी इन छोटे-छोटे उपाय को करके शांत और खुशहाल वर्तमान को जी सकता है।

याद रखिए जीवन सबका कठोर है जीवन एक कोरे पन्ने की तरह होता है जिस पर आप जो भी लिखेंगे वही आपका जीवन बन जाएगा ऐसे ही वर्तमान रूपी कागज पर आप अपने बीते कल के पछतावे को लिखते हैं या फिर अपने बीते कल मैं से कुछ अच्छे पलों को लिखते हैं ऐसे ही वर्तमान रूपी कोरे पन्ने पर अपने भविष्य की चिंता को लिखते हैं या फिर अपने अंदर रोज एक नई आदत का निर्माण करके अपनी भविष्य की सुंदर और उज्जवल परिभाषा लिखते हैं कल बीत चुका है और आने वाला कल आने में अभी वक्त है इसलिए अपने वर्तमान को जीना सीखें वर्तमान में जीने से व्यक्ति को जीवन के अर्थ से संबंधित अनभिज्ञ ज्ञान भी प्राप्त होने लगते हैं।

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