बड़े-बड़े नेता वह चाहे कोई भी हो पश्चिम बंगाल की ममता दीदी, उत्तरप्रदेश के अखिलेश यादव या नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी यह सब मिलकर भी सरकार की मनमानी को नहीं रोक सके जो की साधारण से छात्रों और जेन जी और सीजेपी ने कर डाला ।
आखिर जंतर मंतर पर नीट पेपर लीक मामले में गुस्साए छात्रों द्वारा मांगे गए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आखिरकार हो ही गया ।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा दे दिया है जिससे पूरे देश में छात्रों द्वारा जश्न मनाया जा रहा है ।
समझा जाए तो जेन जी की पावर के आगे सरकार को घुटने टेकने पड़े यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद से ही एक तरफ यह भी देखा जा सकता है कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने से आपको कोई नहीं रोक सकता बल्कि ये आपका हक है।
जेन जी और छात्रों के साथ-साथ विपक्ष के नेताओं मे भी खुशी की लहर है और सब आपनी अपनी खुशी को सोशल मीडिया के मंच पर जाहिर कर रहे हैं ।
समझने वाली बात है क्या कभी किसी ने सोचा था कि एक -दो महीने पहले बनी सीजेपी सरकार की नाक में दम भी कर देगी और डटकर सामना भी करेगी ।
सोनम वांगचुक जी के अनशन के बाद से सीजेपी और छात्रों द्वारा शुरू किए आंदोलन को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी का भी सहारा मिला जिससे छात्रों में और जोश आ गया ।
जैन जी के इस प्रदर्शन में जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को सरकार की तरफ से रोकने की काफी मशक्कत की गई पर असफलता ही हाथ लगी और निराशा मिली।
क्या मोदी और शाह की जोड़ी जेन जी को पसंद नहीं आ रही और क्या सरकार द्वारा बनाए नियमों को जेन जी नजरअंदाज कर रहा है । मुद्दा कुछ भी हो पर सरकार को छात्रों के मन की बात को समझना होगा।
धर्मेंद्र प्रधान जी का इस्तीफा हो चुका है और जंतर मंतर से सभी छात्रों ने जश्न मना कर अपने-अपने घर की राह को पकड़ लिया है पर उससे पहले जेन जी ने अपनी प्रतिभा और अपने दम खम की सरकार को झलक दिखला दी है और वह रुकेंगे नहीं इसका भी संकेत दिया है।
इसके साथ ही समझना होगा वो चाहे सरकार हो या फिर कोई भी बड़ी हस्ती ।आज के छात्रों में अपने हक को पाने के लिए जोश और ज़िद है।
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