कभी देखा होगा ज्यादातर लोग अपने समय को उन समस्याओं के समाधान ढूंढने में लगा देते है जो बेवजह की समस्याएं होती हैं या फिर व्यक्ति कई ऐसी समस्याओं का विकराल रूप बना लेता है जो कि हकीकत में बहुत-ही छोटी होती हैं।
व्यक्ति अपने बीते कल को बदलना चाहता है लेकिन व्यक्ति यह क्यों भूल जाता है कि बिता कल जा चुका है अगर बदलना है तो हमें आने वाले कल को और आज को बदलना होगा अगर हम यह नजरिया बदल लें कि जो हो चुका है या फिर जिसके बदलने से अब कुछ नहीं हो सकता तो शायद हम एक बहुत बड़ी समस्या से बाहर निकल सकें।
यहां नजरिया बदलने का मतलब यह नहीं है कि हम किसी समस्या को न देखें या फिर समस्या के लिए समाधान न ढूंढें यहां नजरिया बदलने से मतलब बे मतलब की समस्याओं से दूर होकर ज़रूरी समस्याओं पर ध्यान देने से है।
हम अगर अपने समय को बीते कल में हो चुकी गलतियों के बारे में ही सोचते रहेंगे तो इस तरह हम अपने आज के समय को भी बर्बाद करने का बहाना बना लेंगे और इस तरह हम कभी भी अपने इस नजरिए से बाहर नहीं निकल पायेंगे।
मात्र एक नजरिया बदलने से भी मनुष्य अपने जीवन में बहुत कुछ करने की उम्मीद जगा सकता है और अपने अंदर सकारात्मक सोच को बढ़ाने का भी यह एक अच्छा तरीका साबित हो सकता है।
दुनिया का हर व्यक्ति अपने कार्य में अपने नजरिए का भी इस्तेमाल करता है ।उसका नजरिया ही उसको आगे बढ़ाने में मददगार साबित होता है। सकारात्मक और नकारात्मक नजरिया ही व्यक्ति की सोच और उसके कार्यों में दिखाई देती है।
रूढ़िवादी सोच से बाहर निकलने में सकारात्मक नजरिया का भी काफी प्रभाव पड़ता है जब कोई व्यक्ति अपने सामने आई समस्या को देखता है तो उस समस्या के समाधान के लिए उसका नजरिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है यदि सकारात्मक नजरिया रखता है व्यक्ति तो उसे समस्या का समाधान ढूंढने की कोई जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि सकारात्मक नजरिया रखने वाले व्यक्ति समस्या को समस्या ना मानकर आगे बढ़ने का मार्ग बना लेते हैं।
वहीं दूसरी तरफ नकारात्मक नजरिया रखने वाला व्यक्ति समस्याओं को देखते ही रोने लग जाते हैं और थक-हार कर समस्या के नाम पर करने वाले कार्य को छोड़कर बेफिजूल के कार्यों में स्वयं को फंसाकर बहाना बना लेते हैं।
एक व्यक्ति जो अपनी मंजिल की तरफ बढ़ने में लगातार आई समस्याओं को नजरअंदाज करता जाता है और बिना रुके चला जाता है तो ऐसे व्यक्तियों को उनकी सफलता और मंजिल एक दिन अवश्य मिल जाती है और इस सब के पीछे उस व्यक्ति का नजरिया ही महत्वपूर्ण बनता है।
नजरिया मनुष्य को किसी भी कार्य को करने से पहले ही उसे कार्य से प्राप्त निर्णय सकारात्मक और नकारात्मक होगा यह महसूस करा देता है और यह सब नजरिया रखने की वजह से ही होता है क्योंकि व्यक्ति सकारात्मक नजरिया रखकर किसी भी कार्य में मिलने वाली सफलता के प्रति बहुत कुछ जान जाता है।
जिस तरह कोई व्यक्ति किसी बच्चे को उसके पढ़ने के आधार पर उसके होशियार या कम होशियार होने का पता कर लेता है ठीक वैसे ही कुछ व्यक्ति किसी कार्य के सफल होने या असफल होने पहले से ही निर्णय निकाल लेते हैं यह सब एक अनुभवी नजरिये वाले व्यक्ति का ही एक गुण होता है।
इसलिए अपने नजरिया को बदलने से ही व्यक्ति अपने आने वाले समय को बेहतर बना सकता है और बेफिजूल के कार्य से बचने का अनुभव भी प्राप्त कर सकता है।
ऐसे व्यक्ति कभी भी अपने बीते समय में हुई गलतियों का दोष किसी और के सर मढ़ने का काम नहीं करते बल्कि अपने नजरिए से बीते समय की गलतियों से अपने सकारात्मक नजरिया को और प्रभावशाली बनाने में मदद लेते हैं और आगे भविष्य में गलतियों को दोहराने से बच जाते हैं।
ऐसे व्यक्ति किसी से होड़ नहीं रखते और खुद से आगे चलने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहित करते हैं इसकी वजह से इनके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता जाता है और यह छोटी मोटी समस्याओं को स्वयं से ही हल ढूंढ लेते हैं।
सकारात्मक नजरिया रखते से व्यक्ति समाज के दिखावे से बाहर निकल कर रुढ़िवादी समाज की जड़ों पर प्रहार करते हैं सकारात्मक नजरिया रखते वाला व्यक्ति समाज की रूढ़िवादी सोच को खत्म करके अपने आने वाली पीढ़ी को एक नई सोच और सकारात्मक नजरिया प्रदान करता है जिससे आनेवाली पीढ़ी को आगे बढ़ाने के बहुत से मौके मिलते हैं यह सब कुछ सिर्फ हमारे नजरिया बदलने से ही हो सकता है।
जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया रखना मनुष्य के जीवन में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है ऐसे व्यक्ति के लिए अपने जीवन में कहां से शुरू करना समस्या नहीं रहता बल्कि ऐसे व्यक्ति की मानसिक सोच पहले से कहीं बेहतर हो जाती है ऐसी स्थिति में उसके पास संसाधन ना होने के बावजूद भी वह अपने जीवन में बहुत कुछ कर पाता है
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