जीवन का आत्मज्ञान

यह जीवन हमारे लिए एक यात्रा के समान है और हम मनुष्य जीवन यात्रा के यात्री हैं। हम सब यह तो अच्छे तरीक़े से जानते हैं की जो ‌ मनुष्य इस यात्रा पर आया है एक न एक दिन अपनी यात्रा खत्म करके जाएगा तो फिर क्यों ना हम इस यात्रा को आनंद के साथ पूरी करें और जीवन में आत्मज्ञान भी लेना सीखें।

हर मनुष्य में किसी भी कार्य व वस्तु के प्रति जानने की इच्छा होती है। कभी-कभी किसी चीज को जानने के प्रति उत्सुकता ही व्यक्ति को उसके अंदर की अपने अंदर की क्षमता और सामर्थ्य की पहचान कराती है और फिर व्यक्ति सामर्थ्य के अनुसार अपनी प्रतिभा को पहचानने की कोशिश करके अपनी उपलब्धियां को बढ़ाना भी चाहता है।

मनुष्य के अंदर आत्मज्ञान की शुरुआत यही से होती है जब मनुष्य की प्रतिभाओं की प्रशंसा होने लगती है तो ऐसे में वह व्यक्ति‌ घमंड और जोश में ना पड़कर स्वयं को आगे बढ़ा कर सर्वप्रथम स्वयं की प्रतिभाओं का निरीक्षण करने लगता है और अपनी कमियों पर भी ध्यान देता है व्यक्ति समझ चुका होता है खुद को बेहतर बनाने का अर्थ । इसके बाद व्यक्ति खुद को और भी विशेष बनाते हुए आगे बढ़ता है और आत्मज्ञान की नई परिभाषाओं को गढ़ता है। मनुष्य का अपने गुणों को पहचानना अच्छी बात है पर इससे अच्छा मनुष्य को अपनी कमियों को पहचानने की क्षमता रखनी चाहिए और अपनी कमियों को सुधारने की निरंतर कोशिश भी करते रहना चाहिए।

मनुष्य अपनी क्षमताओं को पहचानकर और अपनी कमियों को सुधार कर एक नया और बेहतर इंसान बनते जाता है ।कभी-कभी कुछ व्यक्ति अपने गुणों का बखान स्वयं से करने लगते हैं और अपनी कमियों को समाज से छुपा कर रखते हैं ऐसे व्यक्ति समाज के साथ धोखा कर रहे होते हैं।

यदि मनुष्य अपनी कमियों को लगातार छुपाए रखेगा और अपनी कमियों को सुधारने की कोशिश नहीं करेगा तो ऐसे व्यक्तियों का आत्मज्ञान का अर्थ समझना अत्यंत कठिन होगा।

हम जिस समाज में रहते हैं या फिर कहे कि हम जिन लोगों के साथ रहते हैं यह व्यक्ति हमारी उन कमियों को देखने में बेहतर होते हैं जिन कमियों को कभी हम देख और समझ नहीं पाते आमतौर पर आलोचक इन्हीं बातों के लिए जाने जाते हैं यदि व्यक्ति दूसरों के द्वारा बताई गलतियों को स्वीकार करते हुए और अपनी कमियों को सुधारता है तो यह उस व्यक्ति के लिए फायदे का सौदा हो जाता है।

कभी-कभी मनुष्य अपने जिद्दी स्वभाव की वजह से न तो किसी की सुनता है और नाही अपनी कमियों को सुधारने की कोशिश करता है पर जब कभी जिद्दी स्वभाव वाले व्यक्ति असफलता को देखते हैं तब उन्हें अपनी हार और असफलता के साथ अपने अंदर का यह गलत और जिद्दी रूप देखने को मिलता है और यह असफलता उनके जीवन में उन्हें सुधारने की वजह बन जाती है।

यदि मनुष्य अपने द्वारा किए गए कार्यों का निरीक्षण बेहतर तरीके से करे और किये गए कार्यों के निरीक्षण के दौरान व्यक्ति अपने कार्य की कमियों को सुधारने की कोशिश करता है और अगली बार अपने कार्यों में यह गलती ना हो इसकी भी कोशिश करता है तो वह व्यक्ति बेहतर होते चले जाता है और उसके अंदर की प्रतिभाएं बढ़ती जाती हैं।

जीवन को जीने का आनंद बढ़ाने के लिए व्यक्ति जितना स्वयं के कार्यों पर ध्यान देगा और दूसरों की जीवन में क्या हो रहा है इससे मतलब नहीं रखेगा तो शत प्रतिशत अपने जीवन में आगे बढ़ता ही जाएगा।

यदि व्यक्ति आलोचकों से अपनी दोस्ती कर ले और आलोचकों की बात को गंभीरता से लेकर अपनी बुराइयों को खत्म करने लगता है तो उसका एक नया रूप बनता है यह रूप भी आत्मज्ञान की जरूरत है ।

जीवन का मतलब सफल होना ही नही होता बल्कि जीवन तो एक यात्रा है और हमको इस जीवन के हर पल का आनंद लेना सीखना होगा

जब हम यह समझ जाएंगे की जीवन में सफल होने से भी अलग और भी बहुत कुछ होता है जैसे की गरीब और असहाय लोगों के काम आना जरूरतमंदों की मदद करना समाज के सभी व्यक्तियों को एक नजर से देखना यह सभी मनुष्य के अंदर व्यवहार होना चहिए तभी मनुष्य जीवन की अर्थ को समझ सकता है और आत्मज्ञान के प्राप्त करने के मार्ग को समझेगा।

जब व्यक्ति अपने अंदर की कमियों पर ध्यान देने लगता है तो वह अपने हर पल को बेहतर बनाते जाता है और इस तरह व्यक्ति अपने जीवन को भी बेहतर बना लेता है।

बेहतर जीवन बेहतर व्यक्ति की प्रतिभाएं देख कर समाज के व्यक्ति भी उनसे जुड़ने लगते हैं । बेहतर व्यक्ति से जुड़े व्यक्तियों में भी अपनी प्रतिभाओं को पहचान की अपनी कमियों पर ध्यान देने की आदत बन जाती है और यह आत्मज्ञान की पहली सीढ़ी होती है।

आत्मज्ञान जीवन के अर्थ को समझने के बाद ही ही शुरू होता है इसका मतलब यह नहीं है की हर मनुष्य प्रतिभाशाली हो, खूबियों से भरा हो या सफल हो। एक साधारण व्यक्ति भी अगर अपने अंदर से स्वार्थ अधीरता और अपनी कमियों को खत्म करने लगता है तो वह व्यक्ति भी जीवन के आत्मज्ञान को प्राप्त कर सकता है।

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