हनुमानजी की कथा

आज के वक्त में भी हम चाहे कितने ही आगे क्यों ना निकल जाएं पर हम भारतीयों में श्रद्धा और आस्था कूट-कूट कर भरी है और इसका कारण है हमारे पूर्वजों से चली आ रही भगवान में उनकी आस्था का होना ।

आज हम यहां बात कर रहे हैं भगवान हनुमान जी की शक्ति और साहस की । भगवान हनुमान भक्त हनुमान के नाम से ज्यादा पहचाने जाते हैं और हम सब ये भली-भांति जानते भी हैं।

जब जब भक्तों को दुखों का सामना करना पड़ता है या किसी गंभीर असहाय रोग से पीड़ित होते हैं या किसी तरह की विपदा में फंसते हैं तब ऐसे में कोई साथ नहीं देता और सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तब सिर्फ एक ही रास्ता नजर आता है ।

और वे हैं हनुमानजी । हनुमानजी अपने भक्तों कों दुखों से बाहर निकालते हैं ,रोगों का नाश करते हैं और अपने भक्त की हर पीड़ा को समझते हैं ऐसे हनुमानजी को शत-शत प्रणाम।

हनुमान कथा

बहुत पहले की बात है एक छोटे से गांव में एक पंडित अपनी पत्नी के साथ रहता था । पंडित अपनी छोटी सी कूटिया में रहता था और भिक्षा मांग कर जीवन यापन करता था और भिक्षा रूप में जो कुछ भी मिल जाता उसी में दोनों संतुष्ट होकर रह रहे थे और अपने जीवन से लगभग खुश थे।

पर फिर भी उनके जीवन में एक कमी थी और वह कमी थी संतान का सुख जो कि उन्हें शादी के काफी वक्त बाद भी नहीं प्राप्त हुआ था ।पंडित और पंडिताइन इस दुख की वजह से बहुत निराश रहते थे और किसी के भी बच्चे को देखकर खुश हो जाया करते थे।

पंडित पंडिताइन किसी के भी बच्चे को खेलते हुए देखते तब उन्हें संतान का न होना और दुख देता क्योंकि गांव के काफी लोग उन दोनों को समय-समय पर ताना मारते थे । गांव वाले उन्हें देखकर कहते कि इनका चेहरा देखना भी अपशगुन होता है और पूरा दिन भी खराब निकलता है ऐसी कड़वी बातों को सुनकर पंडित पंडिताइन बहुत दुखी हो जाते थे।

दोनों पति-पत्नी एक दूसरे को सांत्वना देते और और समझाते थे पर अकेले में दोनों ही अपने कर्मों को कोसते थे।

पंडित पंडिताइन हालांकि निर्धन थे कभी-कभी खाने को भी पेट भरकर नहीं मिलता था और फटे हुए कपड़े पहनते थे पर फिर वे अपनी इस हालात पर दुखी नहीं होते थे और नाही निर्धनता को लेकर रोते थे।पर संतान न होने के दुख से ज्यादा दुखी रहते थे ।

एक बार मंगलवार के दिन पंडित भिक्षा मांगने के लिए गांव में गए पर किसी भी घर से भिक्षा नहीं मिली उल्टा उन्हें आलोचना ही सुनने को मिली जिससे उनका मन भर आया और दुखी होकर घर की तरफ लौट आए। पंडिताइन ने जब पंडित जी को खाली हाथ और पंडित जी की आंखों में आसूं देखिए तो वह सब समझ गई।

पंडिताइन ने कहा आज मंगलवार का दिन है और आज के दिन हनुमानजी की पूजा की जाती है और मैंने सुना है भगवान हनुमान अपने भक्तों के हर संकट को हर लेते हैं तो क्यों ना हम भी भगवान हनुमान जी की पूजा अर्चना पूरे विधि विधान से करके हनुमान जी को प्रसन्न करने की कोशिश करें।

जब अगला मंगलवार आया तो पति-पत्नी ने सुबह जल्दी उठकर सारे काम करके नहा धोकर तैयार होकर पूरे विधि विधान से हनुमानजी का उपवास रखा और मंदिर जाकर हनुमान जी के दर्शन भी किए ।

पंडित पंडिताइन अब हर मंगलवार को पूरी श्रद्धा के साथ और पूरे नियम से हनुमान जी का व्रत पालन करने लगे।

कुछ समय बीत जाने पर हनुमान जी ने उनकी भक्ति-भाव और पूजा-अर्चना से प्रसन्न होकर दर्शन दिए ।और पंडिताइन को संतान सुख का आशीर्वाद भी दिया ।

कुछ समय बाद पंडित पंडिताइन के घर एक बालक ने जन्म लिया जिससे पंडित पंडिताइन के जीवन में खुशियां ही खुशियां फैल गईं।

पंडित और पंडिताइन ने अपने घर संतान होने की खुशी को हनुमान जी से मिले आशीर्वाद को माना और उसके बाद से पंडित और पंडिताइन का विश्वास हनुमान जी की भक्ति में और बढ़ गया । पंडित और पंडिताइन हमेशा के लिए हनुमान जी के ही भक्ति बन कर गये।

हनुमानजी अपने भक्तों के हर दुख का निवारण करते हैं और सदा भक्तों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं।

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