हमारे भारत देश में हो रही विकास की लहर हमें चारों तरफ दिखाई देती है और इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हम भी उन्नति की दिशा में कदम आगे बढ़ा रहे हैं और चाहते हैं कि दुनिया के मानचित्र मे विकसित देशों में भारत भी अनूठा स्थान बनाने में सफल रहे ।
पर जब देश के विकास में धांधली शामिल होती है तो स्थिति बेहतर बनने के बजाय बिगड़ती ही नजर आती है ।इसी का एक नया उदाहरण है लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस-वे जिसका निर्माण होने में हजारों-करोड़ों रुपए लगे जिसका उद्घाटन होने के कुछ समय बाद ही कई जगह से धंसने के कारण चर्चा में आ गया है । जिसको लेकर सोशल मीडिया पर भी सरकार के कार्य की खोचड़ी हो रही है।
पिछले कुछ सालों से देश में हाईवे ,एक्सप्रेसवे, मेट्रो ,रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और पुल के निर्माण ने गति पकड़ रखी है लेकिन सवाल यह है यह सब निर्माण मानव जाति के हित में जीवन की सुगमता के लिए हो रहे हैं पर क्या इन निर्माणों में गुणवत्ता का भी ख्याल रखा गया है ।
क्या यह निर्माण देश की जनता के विश्वास पर खरे उतरेंगे इसलिए हमें समझना होगा यह समस्या केवल एक एक्सप्रेसवे की नहीं है बल्कि यह निर्माण मनुष्य जाति को कोई जोखिम न दें इसका भी है।
मानसून का समय है तो ऐसे में देश के कई राज्यों और कई शहरों से सड़कों की टूटने पुलों के क्षतिग्रस्त होने की खबरें आती हैं पर सोचने वाली बात ये है कि कुछ समय पहले ही हुए लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस के उद्घाटन के बाद का पहले ही मानसून में क्षतिग्रस्त होना बेहद शर्मनाक है।
हमारे भारत देश में कई शहरों में कोई 100 साल पहले बनी इमारत ,पुल ,सड़क जो आज भी खड़ी हुई है और रोजाना लाखों लोगों का जिन पर आवागमन भी होता रहता है। इनका निर्माण उस वक्त हुआ जब संसाधन और तकनीक आज के मुकाबले बहुत कम था ।ऐसे में दोष किसका है मैं पता करना भी जरूरी है।
डिजिटल डिजाइन है डिजिटल युग है संसाधन भी भरपूर हैं उसके बाद भी कानपुर लखनऊ एक्सप्रेस के निर्माण में हुई लापरवाही जिसकी वजह से कानपुर लखनऊ एक्सप्रेसवे पर आवागमन कर रहे मुसाफिरों के लिए समस्या का विषय बनी हुई है।
कानपुर से लखनऊ तक 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस की हर एक किलोमीटर सड़क बनने पर 66 करोड रुपए खर्च हुए हैं ।इस प्रकार कुल लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस 4200 करोड रुपए की लागत से बना है । जिसके लगातार धंसने की वजह से गुणवत्ता और तकनीक पर उठते सवालों को लेकर चर्चा से घिरा हुआ है।
कानपुर लखनऊ एक्सप्रेसवे जिसका अभी कुछ दिन पहले ही लोकार्पण हुआ था और लेकिन कुछ समय बाद से ही लगातार जगह-जगह सड़क की धंसने की आती खबरे निर्माण में हुई लापरवाही एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और तकनीक पर भी संदेह होने लगा है। आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा और कहां त्रुटि हुई है यह कैसे पता चलेगा इस तरह के कई सवालों से घिरा हुआ कानपुर लखनऊ एक्सप्रेसवे।
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