जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन पर सबकी नजर है ।जिस तरह छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन में सरकार को घेरा है इसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है।
इस आंदोलन को सब अपने-अपने नजरिए और अपने-अपने फायदे से देख रहे हैं। यह तो हम सब भली भांति जानते हैं कि यह आंदोलन शुरू हुआ था सोनम वांगचुक जी के अनशन से और धीरे-धीरे एक बड़े आंदोलन में तब्दील हो गया ।
अब इस आंदोलन में नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी छात्रों का साथ देने के लिए आगे बड़े हैं और उनके साथ खड़े होकर सरकार पर छात्रों की शर्तों को मंजूर करने का दबाव बना रहे हैं।
धरना व प्रदर्शन के दौरान युवा वर्ग बेहद आहत है और ऐसे में राहुल गांधी के आगे बढ़ने से छात्रों को भी बहुत बड़ा सपोर्ट मिला है। देखा जाए तो यह सपोर्ट राहुल गांधी जी को भी सरकार के खिलाफ खुद को खड़ा करने और देश को अपनी ढृढ छवि दिखाने का अवसर भी लेकर आया है।
इस आंदोलन में राहुल गांधी जी पूरे विश्वास और धैर्य के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
ऐसे में राहुल गांधी जी उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव जी के साथ अपनी राजनीतिक छवि को और मजबूत कर सकते हैं ।अखिलेश यादव और राहुल गांधी जी के बीच सियासी तालमेल का फ़ायदा अगले साल उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों में मिलने के आसार हो सकते हैं।
हालांकि की राहुल गांधी जी को अपनी चुनावी चाल बेहद ही सावधानी के साथ चलनी होगी। बहुत ही समझदारी के साथ राजनीति के नेतृत्व को सफलता में बदलना होगा और देश पर अपनी अमिट छाप बनाने का अवसर नहीं चुकना चाहिए
प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी जी के धरने-प्रदर्शन के बाद से सरकार ने कांग्रेस पर छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है कांग्रेस को ऐसे आरोपों से विचलित होने की जरूरत नहीं है बल्कि लोकतंत्र अपने उद्देश्यों को हासिल करने का मान्यता प्राप्त वेध जरिया है जिसका इस्तेमाल करने का अधिकार सभी को है और नेता प्रतिपक्ष को भी है
ये समय राहुल गांधी जी के लिए खुद की छवि और राजनीतिक दृष्टि से सुधरने का अवसर लाया है ऐसे में राहुल गांधी जी को आंदोलन के साथ साथ राजनीति में भी अपने पैर प्रभावी रूप से गाड़ने होंगे और स्वयं को सरकार के खिलाफ ढृढ छवि के साथ खड़ा करना चाहिए।
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