आखिर सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को पुलिस सुबह-सुबह उठाकर कहां ले गई और जंतर मंतर पर उठाते वक्त सफेद चादर से पर्दा लगाने की क्या जरूरत पड़ी क्या सोनम वांगचुक की कोई फोटो उठाते वक्त न ली जा सके इसलिए क्या सोनम वांगचुक को उठाने के बाद जंतर मंतर पर जारी हड़ताल को रोकने के लिए यह सब किया गया क्या वाकई अब अनशन खत्म हो गया ।
सोनम वांगचुक को जबरन पुलिस द्वारा ले जाने के बाद अभिजीत दिपिके ने हड़ताल को जारी रखने विचार बना लिया है और भूख हड़ताल पर बैठ भी गए हैं।
आखिर हमारा लोकतंत्र इतना कमजोर क्यों होते जा रहा है ।कभी जंतर मंतर पर विरोध करने के लिए, अनशन के लिए ,हड़ताल के लिए जो बैठते तो उस वक्त की सरकार उनकी परेशानियां सुनती समाधान ढूंढती और अनशन को खत्म कराने की कोशिश की जाती थीं। पर अब ऐसा नहीं होता।
जंतर मंतर से पुलिस द्वारा जबरन सोनम वांगचुक को ले जाने के बाद वांगचुक की पत्नी गीतांजलि का कहना है कि बिना उनकी सहमति के वांगचुक जी का इलाज ना किया जाए ।
दूसरी तरफ पुलिस उपायुक्त (नई दिल्ली)का कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर और बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सफदरजंग अस्पताल से भी सोनम वांगचुक की तबीयत का हवाला देते हुए बताया गया है उपवास की वजह से शरीर में कमजोरी आने के कारण उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है ।
सोनम वांगचुक को उठाने कि वजह चाहे कुछ भी हो पर इस तरह सुबह 7:30 बजे बिना किसी को सूचित किए और पुलिस द्वारा जबरन उठाते वक्त सफेद चादरों की दीवार खड़ी करने का आखिर क्या मतलब था क्यों नहीं किसी को उस वक्त तस्वीर लेने दी गई आखिर इस सब के पीछे क्या वजह है ।
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