सवाल बच्चे कितने सुरक्षित हैं डे केयर में

सबसे पहले हमें यह समझना होगा कि आखिर डे केयर होता क्या है और डे केयर का क्या फायदा है तो बता दें की डे केयर जहां छोटे बच्चों को घर जैसा माहौल महसूस कराया जाता है और वहां आया टीचर्स बच्चों के साथ मां के जैसे व्यवहार रखती है।

शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब मध्यम वर्गीय परिवार में मता-पिता दोनों ही घर से बाहर काम पर निकलते हैं तो बच्चों को भी सुरक्षित व्यवस्था देना चाहते हैं जहां कोई उनके बच्चों को मां जैसा दुलार और प्यार का व्यवहार दे। तो ऐसे में मां-बाप को क्रेच( छोटे बच्चों की देखभाल का केंद्र )स्कूल सबसे बेहतर विकल्प लगता है।

समय के साथ-साथ बच्चों की अच्छी परवरिश भी हो सके। ऐसा डे-केयर जहां बच्चों को सुचारू सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी यह सोचकर मध्यवर्गीय मां-बाप अपने बच्चों को डे केयर में डालते हैं पर सवाल क्या वहां पर आपके बच्चे सुरक्षित हैं।

अभी कुछ समय पहले बेंगलुरु जो भारत की टेक्नोलॉजी राजधानी कहलाई जाती है का मामला है वहां के एक डे केयर (जहां बच्चों की देखभाल की जाती है) में से एक वीडियो देखने मिल रहा है जिसमें 2 साल तक के बच्चों के साथ बुरा व्यवहार जैसे बाथरूम में बंद करना, वाशिंग मशीन में डालना, टॉयलेट जेट से बच्चों के ऊपर पानी की बौछार करना जैसी हरकतें दिखाई दीं हैं।

बच्चों को डे केयर क्रेंच केंद्र जैसे स्कूलों में डालने से पहले मां-बाप को स्कूलों का ब्योरा लेना भी बच्चों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवशक है ।

बच्चों में बचपन का शुरुआती समय मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बहुत ही जरूरी होता है ऐसे में बच्चों के हुए व्यवहार से बच्चों की मानसिकता पर क्या असर पड़ेगा क्या कभी सोचा है।

बदलते समय में शहरी जीवन भी बदलने लगा है ऊपर से महंगाई के देखते हुए अब घर गृहस्थी को चलाने का भार मां बाप के कंधों पर है । लगभग हर घर में दोहरी आय वाला मॉडल सबने अपना लिया है। पर इसके साथ-साथ मां-बाप बच्चों को परवरिश नहीं दे पा रहे है उसकी वजह है समय जो की उनके पास नहीं है बच्चों को समय न मिलना ही सबसे बड़ी समस्या मां बाप के लिए बन रही है।

दोहरी कमाई आज हर परिवार की जरूरत बन चुकी है ऐसे में सवाल उठता है बच्चों की देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए । ऐसे में क्रेंच केंद्र में जाकर पहले वहां की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा देना चाहिए । पूरी जानकारी लेने और संतुष्ट होने के बाद ही अपने बच्चों को डे केयर और क्रेंच केंद्र में छोड़ना चाहिए।

बच्चे आने वाली भविष्य की नींव होते हैं। इसलिए बच्चों के बचपन का विकास स्वस्थ और सुरक्षित तरीके से किया जाना चाहिए । दोहरी कमाई के प्रलोभन में अपने बच्चों पर ध्यान देना ना भूलें बच्चों पर ध्यान मां-बाप का पहला कर्तव्य है।

व्यस्तता भरी जिंदगी में हमें बच्चों के साथ हो रहे व्यवहार पर कड़ी नजर रखनी होगी ।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *