अभी हाल ही में दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में भड़की अग्निकांड में अब तक का सबसे खौफनाक सब सामने आया है 21 लोगों की मृत्यु हुई जिसमें 12 विदेशी नागरिक थे।
होटल घनी आबादी वाले इलाके में था। होटल बिना फायर एन ओ सी के चल रहा था 5 मंजिला होटल से बाहर निकलने का एक ही रास्ता था ।और बताया गया कि उस वक्त गेट पर ताला लगा हुआ था।
एक ही सीढ़ी होने की वजह से गर्मी तुरंत ऊपर मंजिल तक पहुंच गई और आग की लपट और धुआं भी फैल गया। ऐसे में अंदर लोग आग और धुआं से तड़प रहे थे। जान बचाने के लिए कई लोग ऊपर की मंजिल से ही कूदने लगे स्थानीय लोगों ने सड़क पर गद्दे विछा दिए जिस से कई लोग गददौ के ऊपर गिर कर अपनी जान बचा सके। परन्तु काफी लोगों ने जान गंवा दी
इसी अग्निकांड की आग में फंसी एक महिला अपने बच्चे को सीने से लगाकर नीचे कूद गई और सड़क पर विछे गददे पर जा गिरी जिस मां और बेटे दोनों की जान बच गई ।
इस अग्निकांड में कई लोग घायल भी हुए कइ मरे लेकिन सवाल यह है ये हादसा या लापरवाही हुई कैसे ।
लापरवाही
दिल्ली के मालवीय नगर में स्थित होटल में आग लगी वह किसकी लापरवाही मानी जाए होटल मालिक की या फिर होटल में ठहरे लोगों की ।
होटल के मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया गया है । क्योंकि इस अग्निकांड में उन्हीं की लापरवाही सबसे ज्यादा है ।प्रवेश द्वार और निकास द्वार एक होने की वजह से आग के वक्त लोग होटल में फंसे गए और वहां से निकल कर जान नहीं बचा सके।
होटल में 6 कमरे बनाने कीअनुमति मिली थीं वहां 25 कमरे थे और फायर सेफ्टी भी नहीं थी। यह भी एक बहुत बड़ा कारण है इस हालत का।
दिल्ली अग्निशमन सेवा के आंकड़ों के अनुसार राजधानी में तक आग लगने से करीब 65 लोग जल कर मर चुके हैं इस स्थिति के लिए भवन मालिकों को कोई ही दोषी ठहराकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता जांच समिति अगर प्रभावित ढंग से निरीक्षण करता है घटना के लिए नियमों की उल्लंघन पर करवाई हो तो ऐसी घटनाओं को होने से रोका जा सकता है।
ये पहला हादसा नहीं है बल्कि समय समय पर ऐसे हादसे होते आए हैं ।पर हर बार कि तरह इस हादसे से भी कोई समझ नहीं लेगा और ना ही समझदार वनेगा आखिर क्यों नहीं हम समझने कि कोशिश करते ।
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