कोई भी मनुष्य तब तक हारा हुआ नहीं कहलाता जब तक कि वह प्रयास करना ना छोड़े परंतु जब मनुष्य किसी कार्य के प्रति मन में ही कार्य के असफल होने की सोचता है तो उसकी हार भी निश्चित है ।इसलिए किसी भी कार्य की शुरुआत में ही आपका मन आपका मस्तिष्क कार्य के प्रति जैसी भावना रखेगा कार्य को उस प्रकार की ही गति मिलती है।
मनुष्य की सबसे बड़ी असफलता उसके मन से ही मिलना शुरू होती है कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो कि अपने जीवन काल में कभी भी असफल ना हुआ हो परंतु किसी भी व्यक्ति के मन में असफल होने का विचार उसके असल जीवन की सफलता में असफलता का बीज बोने का कार्य करता है।
हम में से कई लोग असफल होने के बाद यह मान बैठते हैं कि सारे रास्ते बंद हो चुके हैं और अब कुछ नहीं हो सकता और यही सोच कर प्रयास करना भी छोड़ देते हैं तो ऐसे व्यक्ति स्वयं अपने बेहतर भविष्य को बनाने के सारे रास्ते बंद कर चुके होते हैं।
आपने देखा होगा हमारे आसपास में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कि हार जाने के बाद भी हार को स्वीकार नहीं करते और आगे बढ़ने का निरन्तर प्रयास करते रहते हैं और अपने बेहतर भविष्य को बनाने उसके लिए हर प्रयास को करते हैं ।
वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इस सोच के होते हैं जो कि कर्म करते ही फल मिलने की चाहत रखते हैं वे चाहते हैं कि बीज होते ही फल मिल जाए ऐसे व्यक्ति वक्त का इंतजार नहीं करते ऐसे व्यक्तियों में सवर और संयम की कमी होती है ।
हर मनुष्य सफल होना चाहता है लेकिन आपके सामने जब लक्ष्य है तो लक्ष्य के प्रति अपने मन में भी सफलता का विश्वास बनाए रखना जरूरी है आपको यह भी समझना होगा सफलता कभी भी एक दिन में नहीं मिलती और एक प्रयास में अगर आप असफल हो जाते हैं तो आपको हार स्वीकार करके आगे बढ़ना होगा क्योंकि जब तक आपके अंदर जीतने और सीखने की इच्छा है तब तक आपके सफल होने की संभावनाएं भी जीवित है।
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