आस्था से और विश्वास से भरा हुआ व्यक्ति अपने चारों भगवान की बनाई हुई इस दुनिया के हर कण में प्रभु को पाता है और ऐसे व्यक्ति का विश्वास कहता है की संसार के हर कण मे भगवान हैं।
ऐसी कई कथाएं प्रचलित हैं जब भक्त को भगवान के हर कण मे दर्शन हुए हैं।
प्राचीन काल में एक समय की बात है धर्मकेतु नाम के राजा थे राजा को अपने राजा होने का उनके वैभव और शक्ति का बहुत ही अभिमान था इस कारण राजा धर्मकेतु गरीबों को हेय दृष्टि से देखते थे और गरीबों की दुर्दशा का मज़ाक़ बनाते।
एक बार की बात है राजा धर्मकेतु के महल में एक तपस्वी साधु आए। साधु को देखकर राजा धर्मकेतु ने पहले तो क्रोध में देखा और फिर क्रोधित स्वर में साधु महाराज से कहा कि हे साधु तुम्हारे पास मुझे देने के लिए ऐसा क्या खास है जो तुम मेरे महल में आ गए।
तपस्वी साधु राजा द्वारा उड़ाए गए उपहास को सहन करके और चुपचाप राजा के महल से वापस लौट गए।
रात्रि के वक्त राजा ने स्वप्न देखा स्वप्न में राजा ने अपने महल को खाक होते देखा। महल के धूल में बदलने के बाद तपस्वी साधु को भी देखा तपस्वी साधु के पीछे भगवान विष्णु भी खड़े दिखाई दिए ।साधु मौन रूप में खड़े खड़े भगवान के चरणों की तरफ संकेत कर रहे थे की तभी राजा की आंख खुल गई। अजीब सा सपना देखने के कारण राजा धर्मकेतु भयभीत होकर कांप रहा था ।
राजा को पिछले दिन की बात याद आ गई जब उसने तपस्वी साधु को बेइज्जत किया और साधु का उपहास उड़ाया था। राजा धर्मकेतु समझ गया कि वह तपस्वी साधु कोई साधारण साधु नहीं था बल्कि उस साधु के अंदर स्वयं भगवान विष्णु जी का निवास है । यह सोच समझ कर और अपने किए हुए व्यवहार पर अफसोस करते हुए राजा धर्म केतु नंगे पैर उस तपस्वी साधु की कुटिया की तरफ भागने लगा और कुटिया पहुंचकर तपस्वी साधु के चरणों में सर रख दिया ।
राजा धर्मकेतु तपस्वी साधु से अपने किए गए बुरे व्यवहार के लिए माफी मांगने लगा और तपस्वी साधु से कहने लगा साधु महाराज मैं आपके दिव्य रूप को देख चुका हूं और मुझे आपके अंदर श्री विष्णु जी के दर्शन हुए।
इस पर तपस्वी साधु ने कहा हे राजा तुम जिस दिन हर जीव जंतु में हर प्राणी में और संसार के हर कण में प्रभु के दर्शन देखना सीख जाओगे उस दिन तुम एक सच्चे इंसान बन जाओगे और मानव कल्याण के,जीव कल्याण के हित के बारे में भी भला सोचने लगोगे और इस तरह तुम्हारा भी कल्याण होगा।
तपस्वी साधु से यह वचन सुनकर राजा धर्मकेतु का उस दिन के बाद से जीवन बदल गया और जीवन के प्रति नजरिया भी बदल गया ।
अब धर्मकेतू राजा गरीबों के कल्याण की सोचने लगे ,अपने राज्य के विकास के बारे में भी अच्छा सोचने लगा।
इस कहानी से हमें यह समझ आता है कि मनुष्य को हमेशा अपने स्वार्थ के बारे में ही नहीं सोचना चाहिए बल्कि अपने अलावा सभी जीव जंतुओं के प्रति इंसानों के प्रति श्रद्धा रखनी चाहिए।
हर कण में भगवान है यह सोचकर हमें इस प्रकृति का भी धन्यवाद कहना चाहिए जो हमारे जीवन को सरलता और सुगमता से जीने में सहायक है ।
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