हमारे सामने देखने में एक इंसान होता है पर असल में उस इंसान की दो चेहरे होते हैं और हर व्यक्ति दो चेहरे रखता है।
हम देखते हैं कुछ इंसान हर वक्त खुशमिजाज रहते हैं ।उन्हें देखकर ऐसा लगता है मानो जैसे की उनके जीवन में कोई समस्या नहीं है।
पर सच तो यह होता है कि व्यक्ति अपने चेहरे को हंसमुख बनाए रखता है जिस कारण हम उसके चेहरे के पीछे छुपी हुई सच्चाई को समझ नहीं पाते।
कुछ मनुष्य के कर्मों से हम उनके बारे में कई प्रतिक्रिया बना लेते हैं और इसी आधार पर हम उसके बारे में अपने दिमाग में उसके रूप को भी समझने लगते हैं पर जब कभी भी वह इंसान अपने कर्मों से कुछ अलग करने लगता हैं तो दूसरे व्यक्तियों के मन मे उस व्यक्ति की बनाईं हुई शख्सियत को देखकर हम उस व्यक्ति से नफ़रत करने लगते हैं ।
हम यह भूल जाते हैं कि शायद उस व्यक्ति की भी कुछ समस्याएं होंगी जिस कारण उसे अपने व्यवहार में बदलाव लाना पड़ा।
वहीं कुछ व्यक्ति अपने दूसरे रूप को समाज से छुपाते हैं ।जैसे की कुछ व्यक्ति समाज में दयालु भाव को रखते हैं पर असल जीवन में वह काफी क्रोधित स्वभाव के होते हैं और समाज में अपने क्रोधित स्वभाव को इसलिए छुपाते हैं ताकि उनके दयालु भाव को देखकर जो उनकी समाज में प्रतिष्ठा है वह कहीं धूमिल ना पड़ जाए।
इसी तरह कुछ व्यक्ति कम बातचीत करने वाले समाज से कम मिलने जुलने वाले होते हैं । ऐसे व्यक्ति हमें घमंडी और ईर्ष्यालु प्रवृत्ति के लगते हैं जबकि वह बहुत ही दयालु प्रवृत्ति के होते हैं।
इसलिए हमें हर इंसान को उसके द्वारा किए गए व्यवहार से उसके प्रति धारणाएं नहीं बनानी चाहिए बल्कि हमें हर इंसान के चेहरे के पीछे छुपे दूसरे चेहरे को भी देखने की कशिश करनी चाहिए।
इसी पर आधारित एक छोटी सी कहानी है।
एक साहूकार था जिसके पास बहुत जमीन थी। वह साहूकार स्वभाव से कम बोलता था और लोगों से बात भी तभी करता जब उसको कोई काम पड़ता उसके इस व्यवहार की वजह से आसपास के व्यक्ति उसको घमंडी और मतलबी समझते थे।
घमंडी और मतलबी समझने के कारण उस साहूकार से कोई व्यक्ति ज्यादा नहीं बोलता था।
एक बार की बात है साहूकार की जमीन पर आम के बहुत सारे वृक्ष लगे थे और उन वृक्षों पर बहुत सारे आम के फल भी थे ।वृक्षों पर लगे आम के फलो को देखकर एक दिन कुछ बच्चे वृक्षों पर चढ़कर आम तोड़ने लगे की तभी साहूकार वहां आ गया ।साहूकार को आते देख बच्चे डर गए और इस कारण बच्चे वृक्ष पर से नीचे गिर पड़े बच्चों को नीचे गिरने की वजह से चोट भी आईं।
साहूकार ने जल्दी से बच्चों के लिए इलाज मुहैया करवाया और बच्चों की सही से देखभाल भी की ।जब यह बात बच्चों के परिवारजन को पता चली तो सभी उस साहूकार के प्रति मन में बनाई घमंडी और मतलबी साहूकार के रूप को गलत मानने लगे और उसे दिन उन्हें समझ में आया जिस साहूकार को वे घमंडी और मतलबी समझते थे वह साहूकार तो बहुत दयालु निकला।
यह कहानी हमें समझाने के लिए है कि हमें किसी भी व्यक्ति को उसके व्यवहार से नहीं समझना चाहिए बल्कि हमें उसके असल रूप को देखने की कोशिश करनी चाहिए।
अगर हम केवल सफल लोगों के प्रति सम्मान रखते हैं और गरीब लोगों को हेय दृष्टि से देखते हैं तो इसमें हमारी ही गलती है।
समाज में एक पुरानी धारणा है कि जो व्यक्ति सफल है वह व्यक्ति सब की नजरों में होशियार और समझदार है और अगर कोई व्यक्ति अपने जीवन में असफल है तो उसका सभी मजाक उड़ाते हैं।
समाज की पुरानी धारणाओं से बाहर निकल कर हमें असली सच को समझना होगा। जब हम सच को देखने की कोशिश करने लगते हैं तब हमें हर व्यक्ति के दो चेहरे साफ साफ दिखाई देगा।
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