मनुष्य जीवन में समय का एक जैसे रहना मुश्किल है ।जैसे मनुष्य बचपन से बाहर निकल कर युवावस्था में कदम रखता है युवावस्था से व्यक्ति वयस्क आयु में बढ़ता है तो जैसे मनुष्य का रूप बदलता है ठीक उसी प्रकार समय भी सदा एक सा नहीं रहता ।
हम मनुष्य सदा समय को अपनी परिस्थितियों के मुताबिक बनाना चाहते हैं परंतु ऐसा नहीं हो सकता। मनुष्य के जीवन में परेशानियां दुख देती है। कभी-कभी उन परेशानियों में हम घिर जाते हैं और फिर समय को ही दोष देने लगते हैं।
अच्छा समय आने की उम्मीद में इंसान हाथ पर हाथ रखे बैठा रहता है कि जब समय अच्छा आएगा तभी उस फलाने काम को करूंगा और इसी सोच में बहुत समय व्यर्थ कर देता है ।
पर क्या कभी हमने सोचा है परेशानियों का आना जाना लगा रहता है और इसी वक्त में अगर हम कुछ अच्छा सोच कर आगे बढ़े तो शायद हम अपने इस बुरे समय को अच्छे समय में बदल सकें।
यह पुरानी सोच है कि हमारा बुरा हाल होने की वजह किसी की बुरी नजर लगना है जबकि इस तरह की सोच अंधविश्वास की पहचान मानी गई है।
अगर हम अपने पूरे विश्वास के साथ और सच्ची लगन और मेहनत के साथ अपने बुरे समय में भी कार्य को लगातार करते रहे और लगातार आगे बढ़ने का प्रयास करने से ना रुके तो हम बदलाव ला सकते हैं।
परिस्थितियां कभी भी मनुष्य के अनुकूल नहीं रहती बल्कि हमें परिस्थितियों के अनुकूल रहना सीखना चाहिए और जिस अच्छे समय के बारे में सोचते हैं वह अच्छा समय कभी नहीं आता । वह अच्छा समय हमेशा सपनों में ही रहता है।
मनुष्य को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा और इसी अच्छी सोच के बदलाव के साथ सर्वप्रथम स्वयं को बदलना होगा इसलिए अपनी सोच को बदलना होगा।
बदलते समय के साथ आगे बढ़ने के लिए व्यक्ति को अपने जीवन में तरक्की पाने के लिए खुद से शुरूवात करनी होगी ना कि किसी भी तरह की मदद कीउम्मीद रखनी चाहिए ।
बुरे समय में इंसान को साथ देने वाला भी कोई नहीं होता इस कारण मनुष्य का सोचने का तरीका भी नकारात्मक हो जाता है। और वह अपने बुरे समय में असहाय महसूस करने लगता है।
बुरे समय में व्यक्ति की भविष्य को लेकर जो भी योजनाऐं होती हैं वह भी विफल होते हुए दिखने लगतीं हैं। ऐसे में व्यक्ति को समझदारी के साथ अपने हर कदम को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा ।
समाज भी हमें पुरानी समझ सिखाता है कि जब आपका समय खराब चल रहा हो तो कोई भी नया काम ना करो लेकिन अब हमें इस रूढ़िवादी सोच से आगे निकल कर खुद को समझाना होगा और समाज को भी अग्रसर करने में सहयोग देना होगा।
क्योंकि समाज की नकारात्मक सोच का फर्क हर व्यक्ति की मानसिकता पर पड़ता है ।
सोचो जरा अगर स्वतंत्रता सेनानी देश के आजाद होने से पहले के हालातो से ना लड़ते तो क्या स्वतंत्रता सैनानी देश को अंग्रेजों से आजादी दिला पाते।
देश को आजादी मिलना एक सबसे बड़ा उदाहरण है कि समय कितना ही खराब क्यों ना हो इंसान अगर अपने बुरे वक्त से साहस के साथ लड़ता है तो वहअपने लिए एक अच्छा समय लाने की हिम्मत रखता है और खुद को आजादी दिला सकता है।
समय हमेशा एक जैसा ही होता है जब मनुष्य का कोई भी काम नहीं बनता है तब ऐसे में समय को ही दोष देना इंसानी फितरत होती है और हमारा दिमाग भी समय को अच्छा और बुरा समझ ने लगता है।
अतः हमें समझना होगा हमारी अच्छी सोच ही हमें बुरे वक्त से निकलकर हमें अच्छा समय दे सकती है। इसलिए अपने बुरे समय में घबराना नहीं चाहिए बल्कि साहस के साथ अच्छे समय के लिए लगातार कोशिश करनी चाहिए और मन में विश्वास रखना चाहिए कि एक दिन हम अपनी कोशिशें से अच्छा समय ला सकते हैं।
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