भक्ति कथा में श्री विष्णु कथा

बृहस्पतिवार के दिन जो भक्त श्री विष्णु जी का व्रत पालन करते हैं उन्हें पीला वस्त्र और पीला भोजन ही खाना चहिए। बृहस्पतिवार के व्रत में केले के पेड़ के पास बैठ कर श्री विष्णु जी की कथा सुननी चाहिए । बृहस्पति के दिन आटे की लोई में थोड़ी-सी हल्दी और चने की दाल मिलाकर गाय को खिलाने मात्र से भी जीवन में आए संकट खत्म हो जाते है।

श्री विष्णु कथा

प्राचीन काल में एक राजा थे । राजा न्याय प्रिय थे ।गरीबों की सुनते थे व नगर वासियों की दुख दरिद्रता दूर करने की सदा कोशिश करते थे और जो भी राजा के दरबार में भिक्षा मांगने आते उन्हें भरपूर दान दक्षिणा भी देते थे ।

राजा की रानी अत्यन्त क्रोधित एवं गुस्सैल स्वभाव की थी और राजा का गरीबों को दान दक्षिणा देना उसे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। रानी प्रति दिन राजा को दान दक्षिणा देने की मना करती थी परंतु राजा रानी की एक भी ना सुनता और दोनों हाथों से दान दक्षिणा दान करने में लगा रहता।

एक बार जब राजा शिकार करने के लिए वन गए थे तभी बृहस्पति देव साधु के भेष में महल में भिक्षा मांगने आए तो रानी ने भिक्षा देने से मना कर दिया और कहा मैं तो दान करने से परेशान हो गई हूं ।अगर यह धन नष्ट हो जाए तो मुझे बहुत शांति मिलेगी।

यह सुनकर साधु ने कहा यह तो मैं पहली बार सुन रहा हूं कि तुम्हें धन अच्छा नहीं लगता इसे नष्ट करना चाहती हो। अगर तुम चाहो तो अपने धन को गरीबों के कल्याण में लगा सकती हो ।

रानी ने कहा मैं अपना धन किसी को भी नहीं देना चाहती। रानी की बात सुनकर साधु ने तथास्तु कहा और कहा जैसा तुम चाहो वेसा ही होगा और यह कहकर साधु रूप में बृहस्पति देव आलोप हो गए।

राजा के महल से सारी धन संपत्ति नष्ट हो गई और यहां तक की राजा का परिवार खाने के लिए भी तरसने लगा। राजा भी काम ढूंढने के लिए दूसरी जगह के लिए चले गये।

राजा जंगल में लकड़ी काटकर बेचकर अपने जीवन व्यतीत करने लगे। रानी की दासियां कम हो गई जिस कारण रानी अपने बहुत से काम स्वयं करती धन की कमी के कारण कभी-कभी भूखा भी रहना पड़ता इस कारण वह दुखी रहती।

एक बार रानी ने अपनी दासी को अपनी बहन के यहां रूपए पैसे की मदद लेने के लिए भेजा जब दासी रानी की बहन के यहां गई तब रानी की बहन श्री विष्णु जी की कथा में व्यस्त थी जिस कारण वह दासी से कोई बात ना कर सकी। दासी खाली हाथ ही लौट गई।

श्री विष्णु जी की पूजा खत्म होने के बाद रानी को अपनी बहन द्वारा भेजी हुई दासी से ना बोल पाने का दुख हुआ उसने तुरंत अपनी दासी को अपनी बहन के यहां भेजा और कहलवाया की श्री विष्णु जी की कथा में व्यस्त होने के कारण आपकी बहन बोल ना सकी जिसका उन्हें बहुत खेद है।

जब दुखी रानी को अपनी बहन की दासी से बहन के न बोलने का कारण पता चला तो उसने पूछा क्या श्री विष्णु जी की कथा से सारे दुख और पाप खत्म हो जाते हैं।

रानी की बहन की दासी ने दुखी रानी को बताया कि हां अगर कोई सच्चे मन से श्री विष्णु जी की भक्ति भाव के साथ उपासना करता है और वृत का पालन विधि विधान से करता है तो श्री विष्णु जी अपने भक्तों की सारे पाप और दुख खत्म कर देते हैं।

यह सुनकर दुःखी रानी ने श्री विष्णु जी का व्रत रखने का विचार बनाया और सच्चे मन और विधि विधान से भगवान श्री विष्णु जी की आराधना में जुट गई।

कुछ समय बाद भगवान श्री विष्णु जी उसकी पूजा अर्चना से प्रसन्न होकर साधु रूप में दुखी रानी के द्वार पर आए और कहने लगे बोलो रानी तुम्हें क्या चाहिए रानी ने साधु रूप में श्री विष्णु जी को पहचान लिया और कहने लगी हे भगवान मुझसे हुईं गलतियों को माफ कर दो और मेरे पति वापस लौट आएं ऐसा वरदान दीजिए। भगवान तथास्तु कहकर आलोप हो गए।

भगवान विष्णु जी के आशीर्वाद से राजा अपने घर को लौट आए और फिर से पहले के जैसे धन-धान्य सुख-शांति राजा-रानी के जीवन में आ गई।

इस प्रकार श्री विष्णु जी की पूजा अर्चना से दुखी रानी ने वैभव प्राप्त किया।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *