शिव जी की महिमा तो सब जानते हैं ।जो कि बहुत ही अपरंपार है और कभी ना खत्म होने वाली महिमा है। हमने भगवान् शिवजी की महिमा के बारे में तो बहुत सुना है पर क्या आप लोगों ने कभी शिव जी के मंदिर के बारे में भी सुना है क्या। तो आज भगवान शिव के एक मंदिर त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर के बारे में सुनते हैं और क्या है इस मंदिर की विशेषता यह भी जानते हैं।
त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर से जुड़ी जरूरी बातें
त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के नासिक शहर से 28 किलोमीटर दूर त्र्यंम्बक शहर में बना हुआ है। यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है।
सबसे पहले मंदिर की बनावट की बात करें तो काले पत्थरों की संरचना से अद्भुत निर्माण हुआ है इस मंदिर का और इसी कारण यह अद्भुत भी लगता है। मंदिर का निर्माण अपने आप में काफी अद्भुत है और देखने में भी बहुत सुंदर है।
मंदिर का निर्माण 18 वीं शताब्दी में बालाजी बाजीराव ने कराया बताया जाता है। इस मंदिर के निर्माण में 16 लाख का खर्चा हुआ बताया जाता है। 16 लाख रुपए की राशि उस वक्त के समय पर बहुत बड़ी रकम बताई जाती है।
त्र्यंम्बकेश्वर मन्दिर गोदावरी नदी के किनारे पर स्थित है।
त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस मंदिर में स्थित ज्योतिर्लिंग उभरा हुआ नहीं बल्कि एक गहरे कुंड के जैसा है और इसमें तीन सुक्ष्म ज्योतिर्लिंग स्थित है जिन्हें ब्रह्मा विष्णु और महेश का संयुक्त रूप माना जाता है और इसी कारण इस मंदिर का नाम त्र्यंबकेश्वर मंदिर पड़ा। इस मंदिर में एक मुकुट भी है जो कि हीरे पन्ने से जड़ा हुआ बताते हैं और बताया जाता है इस मुकुट को पांडवों ने चढ़ाया था।
त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर से जुड़ी कथा
त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर एक प्राचीन मंदिर है और इस मंदिर से कई रहस्य भी जुड़े हुए हैं जो कि सुनने में बहुत ही अनोखे लगते हैं त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर से जुड़ी कहनी भी है जो की काफी प्रचलित है।
कहां जाता है त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर की जगह पर प्राचीन समय में महर्षि गौतम अपनी पत्नी अहिल्या के साथ निवास करते थे ।एक बार की बात है महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या के कारण गाय की हत्या हो गई। गाय की हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए महर्षि गौतम ने कठोर तपस्या की और महर्षि गौतम की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने वरदान मांगने को कहा। इसपर महर्षि गौतम ने वरदान रूप में पाप से मुक्ति पाने के लिए मां गंगा को अवतरित हों ऐसा वरदान मांगा।
भगवान शिव के आशीर्वाद से मां गंगा धरती पर अवतरित हुई और उसी जलधारा से गोदावरी उत्पन्न हुई ऐसा बताया जाता है। गोदावरी नदी को दक्षिण की गंगा भी कहा जाता है।
त्र्यंम्बकेश्वर मंदिर से हिंदू धर्म की गहरी आस्था जुडी हुई है और भक्त जन दर्शन करने के लिए पूरी आस्था के साथ मंदिर जाते हैं और खुशी-खुशी दर्शन मात्र से ही आनंदित हो जाते हैं।
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