सावन माह में महादेव जी की महिमा
बारिश के मौसम में जब बारिश होती है तो मौसम भी सुहावना हो जाता है बारिश की वजह से चारों तरफ हरियाली ही हरियाली देखने को मिलती है और गर्मी से भी राहत मिलने लगती है बारिश के समय में ही हिंदू धर्म के अनुसार सावन माह आता है जो कि पूरे एक महीने का होता है और सावन महीने में भगवान शिव की भक्तों द्वारा पूजा अर्चना की जाती है।
महादेव कथा
सावन के पूरे महीने भारत देश में भक्तों द्वारा पूजा अर्चना की जाती है और व्रत भी रखें जाते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव माता पार्वती जी के साथ सावन महीने में धरती पर निवास करने आते हैं।
सावन महीने में भक्तगण कांवर लाते हैं जिसमें गंगाजल होता है। कांवर के जल को भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है।
भगवान शिव के सावन महीने को लेकर एक कथा प्रचलित है की जब देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन हुआ था तो समुद्र मंथन से निकलने वाली वस्तु को देवता और राक्षस आपस में बांट रहे थे।
उसी समुद्र मंथन में से विष भी निकला जिसे कोई भी ग्रहण नहीं करना चाहता था तो ऐसे में उस विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया ।
विष को ग्रहण करने के बाद भगवान शिव जी को पानी पीने की इच्छा हुई जिसके लिए भगवान शिव माता पार्वती जी के साथ धरती पर आए और पानी पिया ।

तभी से सावन महीने में भक्तजन शिव मंदिरों में जाकर भगवान शिव को जल अर्पण करते हैं।
पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार भी भगवान शिव को सावन माह अत्यंत प्रिय है और सावन माह में भक्त जन अपने आराध्य भगवान शिव को मनाने का जतन करते हैं क्योंकि सावन महीने में कहते हैं भगवान शिव अपने भक्तों पर कृपा लूटाते हैं ।
कथा के अनुसार भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने सावन महीने में भगवान शिव की आराधना की जिस कारण भगवान शिव जी को भी सावन महीना पसंद है ।
सावन के महीने में कुंवारी लडकियां भगवान शिव पर जल चढ़ाने मंदिरों में जाती हैं और पूरे विधि विधान के साथ व्रत को रखती हैं और एक अच्छे पति को पाने की मंगलकामना भी करती हैं।
देवों में देव महादेव जी को सावन महीने में भक्त लोग अपनी भक्ति से प्रभु को खुश करने में ही अपनी खुशी समझते हैं और पूरे सावन महीने विश्वास के साथ भगवान शिव की आराधना को करते हैं।
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