युवा की निजता और बच्चों के बचपन में घुसती सोशल मीडिया

आज के वक्त में लगभग हर व्यक्ति सोशल मीडिया पर है ऐसा लगता है मानो सोशल मीडिया हमारी जिंदगी में अभिन्न अंग बन गया है

युवा वर्ग और बच्चे सोशल मीडिया पर ही अपना अधिकतर समय बिताते हैं और अपनी निजी जीवन के निजिकरण को काफी हद तक सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं इस सबसे अनजान कि आनेवाले समय में अपना निजिकरण शेयर करना उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

बदलते समय में सोशल मीडिया का हमारे जीवन में जरूरत से ज्यादा दखल देना और कभी-कभी एआई द्वारा हमारी तस्वीरों का बिना हमारी अनुमति के उपयोग करना भी हमारे लिए घातक हो सकता है और धोखाधड़ी जैसी घटनाएं भी हो सकती है । इसलिए पारदर्शिता होना बहुत जरूरी है।

ठीक इसी प्रकार बच्चों के बचपन के साथ भी सोशल मीडिया खिलवाड़ करती नजर आती है सोशल मीडिया का प्रभाव बच्चों के व्यक्तित्व व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित भी कर रहा है ।सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से अवसाद ,चिंता ,अनिद्रा, आत्मसम्मान में कभी ऐसी गंभीर समस्याएं भी देखने को मिल रही है।

जैसे-जैसे डिजिटल कम्युनिकेशन बढ़ रहा है ।साथ में जटिल और गहरी समस्या भी देखने को मिल रही हैं । सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा अत्यंत जरूरी है हालांकि सोशल मीडिया पर 18 साल से कम उम्र के बच्चे अपना अकाउंट नहीं बना सकते जो कि उनकी सुरक्षा को देखते हुए अच्छा है ।

सोशल मीडिया में बच्चो के यौन शोषण और पोर्नोग्राफी से जुड़ी सामग्री दूसरा बेहद गंभीर मामला है और चिंता जनक भी है ।इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के माध्यम से बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देना आईटी कानून बीएनएस और पोक्सो कानून के तहत गंभीर अपराध है।

संविधान के अनुच्छेद 15 और 39 के अनुसार बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। बच्चों के यौन शोषण को रोकने के लिए अमेरिका और दुनिया के दूसरे देशों में भी सख्त कानून है। अमेरिका चिल्ड्रन ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट के तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया जॉइन नहीं कर सकते हैं।

बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सोशल मीडिया पर भारत में दिल्ली उच्च न्यालय फैसले और दूसरे कानूनों के अनुसार मजबूत नियामक और उचित क्रियान्वयन के माध्यम से नाबालिक बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है।

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