गौ माता और गोरक्षा

अभी हाल ही में कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल के मुसलमानों ने बकरा ईद पर गोवंश की बलि ना चढ़ाने का फैसला किया और यही नहीं पश्चिम बंगाल, तेलंगाना आंध्र प्रदेश के मुस्लिम संगठनों ने केंद्र सरकार से गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है साथ ही गौमांस का निर्यात करने वालों को सख्त सजा दी जाए इस कानून की भी मांग की है।

समय-समय पर गौ हत्या और गोमांस को लेकर जगह-जगह आक्रोश व्यक्त किया जाता रहा है और इसी सिलसिले में आकोर्षित जनता ने संधेह में आकर मुसलमानों पर हिंसक हमले भी किए है।

यह मुद्दा धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और देश का मुद्दा है गौ माता की रक्षा को लेकर। सरकार को भी कुछ बड़े कदम उठाने चाहिए।

हमारे धार्मिक रीति -रिवाज के अनुसार गाय को मां का सम्मान दिया गया है और करोड़ों देवी- देवता का गाय में निवास है ऐसा माना जाता है

समय -समय पर इतिहास में भी गाय का सम्मान होता रहा है। भगवान श्री कृष्ण भी गाय को प्रेम करते थे।

अंग्रेज शासन काल से ही गोमांस को महत्व दिया गया और गोवंश को खत्म करने की कोशिश की गई जोकि आज भी जारी है।

प्राचीन समय से ही गाय हमारे घर आंगन की शोभा रही है ।हर घर के आगे एक गाय मिलती थी और उसके दूध दही और घी से हमारे परिवार का पालन पोषण होता था। इस तरह सदियों से गाय हमारे परिवार का हिस्सा बनकर रही है। खेतों में भी गाय किसान लोगों ने प्रयोग मे ली है। गाय को पूजनिय माना गया है।

गाय को राष्ट्रपशु घोषित करने के लिए मुसलमान संगठन यह कहकर चाहते हैं कि उनके और हिंदू भाइयों के बीच भाईचारा बड़े और गौ हत्या करने वालों और वह मांस खाने वालों पर कड़ी कार्यवाही हो।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से गौ हत्या करने वालों पर कड़ा कानून बने मुस्लिम समुदाय के नेता क्या कहना है भारतीयों में गाय के प्रति श्रद्धा है और गाय को मां का स्थान दिया गया है तो गाय की सुरक्षा के लिए नियम बनाए जाए।

भारतीय गोवंश की विशेषता बनाए रखने के लिए हमें फिर से अपने घर -आंगन में गाय को स्थान देना होगा हालांकि किसानों के लिए बहुत ही आसान होगा अगर हम गोवंश को बढ़ावा देना चाहते हैं तो उसके लए फिर से हर घर में एक गाय रखनी होगी हालांकि यह व्यवस्था शहर में मुश्किल है पर गांव में हर घर में एक गाय रख सकते हैं । शहरों में गौशालाओं की व्यवस्था होनी चाहिए जहां गाय को अच्छी देख में रखाजए और इस वंश की विशेषता बढ़ेगी।

औद्योगिकरण और वीफ निर्यात से प्रगति हो सकती है परंतु भारत सनातन सस्कृति और सादा जीवन उच्च विचारों को अपनाने की प्रेरणा लेनी होगी।

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