हर साल 7 जून को विश्व खाद सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। विश्व खाद सुरक्षा दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र के खाद एवं कृषि संगठन द्वारा वर्ष 2018 में की गई थी। इसका उद्देश्य लोगों को सुरक्षित पौष्टिक और संतुलित भोजन के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना है। खाद्य-सुरक्षा का अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो।
विश्व खाद सुरक्षा दिवस जिसकी शुरुआत 2018 में हुई थी एक महत्वपूर्ण तिथि थी जिसकी वजह से इंसान जागरूक हुआ और विश्व खाद सुरक्षा दिवस के द्वारा भोजन के महत्व को समझकर और साथ ही साथ भोजन संतुलित पर्याप्त और पौष्टिक भी होना चाहिए इसकी तरफ भी जागरूकता बड़ी है।
संयुक्त राष्ट्र की यूएन क्रूड बेस्ट इंडेक्स 2021 रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में दुनिया भर में लगभग 93 करोड़ भोजन बर्बाद हुआ। इसी तरह भारत में भी प्रतिवर्ष प्रति व्यक्ति द्वारा लगभग 50 किलोग्राम भोजन व्यर्थ होता है जो की काफी शर्मनाक है क्योंकि भारत जैसे शहर में एक भारी आबादी है जो कि रोज के भोजन के लिए संघर्ष करती है और भुखे पेट सोने को मजबूर हैं।
भारत जैसे देश में जहां की संस्कृति मे अन्न को भगवान का दर्जा दिया गया है अन्न को भगवान का प्रसाद मानकर ग्रहण किया जाता है ऐसे देश में भी भोजन का इस तरह भोजन का तिरस्कार करना एक गलत बात है यहां तक की शादी विवाह और अन्य समारोह में जाकर आवश्यकता से अधिक भोजन लेकर उसे फेंक देते हैं ।
इसी तरह विदेशों में भी खान-पान की बदलती शैली के कारण संतुलित आहार और स्वस्थ भोजन से दूरी बढ़ रही है जिसका असर युवाओं और बच्चों की सेहत पर दिखाई पड़ता है कम उम्र मेंआख दांत पेट संबंधित बीमारी बढ़ रही हैं
अतः समय रहते हमें स्वस्थ भोजन के प्रति जागरूक होना चाहिए क्योंकि खानपान की बदलती शैली जो कि स्वास्थ्य के लिए हितकारी नहीं है ।और दूसरी तरफ हद से ज्यादा खाने को व्यर्थ करना भोजन की कीमत को ना समझना यह बातें व्यक्ति के अंदर भोजन के प्रति जागरूक न होने की वजह से होती है ।
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